
Apple ने प्रतिबंधित चीनी कंपनी CXMT से चिप खरीदने के लिए व्हाइट हाउस से मंजूरी मांगी
मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के बीच Apple ने अमेरिकी प्रशासन से पेंटागन की काली सूची में शामिल चीनी कंपनी के साथ कारोबार की अनुमति मांगी है।
Apple ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से चीनी मेमोरी चिप निर्माता चांगशिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज (CXMT) से खरीद की अनुमति मांगी है, जिसे पेंटागन ने चीनी सेना से कथित संबंधों के कारण काली सूची में डाला हुआ है। यह कदम तब उठाया गया जब मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत और AI डेटा सेंटरों की भारी मांग के चलते Apple को अपने कई उत्पादों—iPad, MacBook, HomePod और Apple TV—की कीमतें 20% तक बढ़ानी पड़ीं, जिसके बाद एक ही दिन में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 263 अरब डॉलर घट गया।
यह दबाव मेमोरी चिप बाजार की संरचनात्मक तंगी से उपजा है। AI मॉडलों के प्रशिक्षण और संचालन के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट जैसे उपभोक्ता उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND स्टोरेज चिप की आपूर्ति सीमित है। वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप उद्योग तीन कंपनियों—अमेरिका की Micron और दक्षिण कोरिया की Samsung व SK Hynix—में केंद्रित है, जिससे Apple जैसे बड़े खरीदार भी कीमतों के दबाव से अछूते नहीं रह पाए। CXMT चीन की शीर्ष मेमोरी चिप कंपनी है और उसे आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने से Apple को मौजूदा आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाने और लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
वाशिंगटन में इस पहल को लेकर तीखा राजनीतिक विरोध उभर रहा है। हाउस चाइना कमेटी के रिपब्लिकन अध्यक्ष जॉन मूलेनार ने इसे “गंभीर गलती” बताते हुए कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभुत्व बनाने में मदद करना अमेरिकी तकनीकी उद्योग और अर्थव्यवस्था को चीन पर और अधिक निर्भर बना देगा। यह रुख 2022 की उस घटना की याद दिलाता है जब Apple ने चीनी बाजार के लिए YMTC से चिप खरीदने की योजना बनाई थी और तत्कालीन सीनेटर मार्को रुबियो ने चेतावनी दी थी कि कंपनी “आग से खेल रही है।” पेंटागन ने फरवरी में अपनी 1260H सूची से CXMT और YMTC को हटा दिया था, लेकिन व्हाइट हाउस की नाराजगी के बाद एक घंटे के भीतर बदलाव वापस ले लिए गए और जून में दोनों कंपनियां फिर से सूची में शामिल कर दी गईं।
भारत और अन्य उभरते बाजारों में यह घटनाक्रम उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में तनाव के चलते Dell, Lenovo और HP जैसे प्रतिस्पर्धी पहले ही लैपटॉप की कीमतें बढ़ा चुके हैं, और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि Apple के इस कदम से अन्य खुदरा विक्रेता भी मूल्य वृद्धि के लिए प्रेरित हो सकते हैं। हालांकि अभी iPhone इस दौर से बचा हुआ है, विश्लेषक आने वाले महीनों में इसके दाम बढ़ने की आशंका जता रहे हैं।
अगला ठोस पड़ाव अमेरिकी प्रशासन का निर्णय होगा—यदि वह Apple को CXMT से खरीद की अनुमति देता है तो कांग्रेस की कड़ी जांच और संभावित कानूनी बाधाएं सामने आ सकती हैं। इस बीच, मेमोरी चिप की कीमतों में स्थिरता के संकेत नहीं हैं, जिससे वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक मूल्य वृद्धि का दौर तय दिखता है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.50 | critical |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.30 | critical |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Market and regulation drive the narrative: Apple acts rationally to protect its supply chain, the Pentagon for national security.
The normalization technique reduces geopolitical tension to bureaucratic routine, making the neutral stance plausible.
It omits that the Pentagon blacklist is primarily aimed at China and Russia, and that Apple might circumvent sanctions.
Russia exposes hypocrisy: sanctions are selective and serve to maintain dominance, not security.
Symmetrical escalation equates Apple's lobbying with sanctions against Russia, creating a false equivalence that legitimizes criticism.
It omits that Apple is a private company and that the Pentagon has legitimate security concerns.
The Arab world denounces technological exclusion: while Apple gets what it wants, developing countries remain cut off.
Universalization of inequality turns a specific case into a symbol of global disparity, appealing to a sense of justice.
It omits that Arab countries are not directly involved in the chip dispute.
India watches from afar: the matter is an American affair, but chip prices concern everyone.
Detachment allows commentary without taking sides, maintaining a rational observer profile.
It omits the role of lobbying and ethical implications.
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