
अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच AI मॉडलों की चीनी कंपनियों को बिक्री जारी
ओपनएआई और गूगल सिंगापुर स्थित सहायक कंपनियों के जरिए चीन की अलीबाबा, बाइडू और टेनसेंट को उन्नत AI सेवाएं दे रहे हैं, जिससे पेंटागन की काली सूची के बावजूद प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का रास्ता खुला है।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई और गूगल सिंगापुर में पंजीकृत अपनी सहायक इकाइयों के माध्यम से चीनी प्रौद्योगिकी दिग्गजों अलीबाबा, बाइडू और टेनसेंट को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल उपलब्ध करा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग इन चीनी कंपनियों पर सेना के साथ सहयोग का आरोप लगाते हुए इन्हें प्रतिबंध सूची में डाल चुका है। यह घटनाक्रम अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों में एक बड़ी खामी को उजागर करता है, क्योंकि मौजूदा कानून चीन के बाहर स्थित सहायक कंपनियों को AI सेवाएं देने पर रोक नहीं लगाते।
इस खामी का लाभ उठाते हुए, गूगल ने हांगकांग और सिंगापुर में अपनी AI सेवाओं को भौगोलिक प्रतिबंधों के साथ उपलब्ध कराने की पुष्टि की है, जबकि ओपनएआई ने पत्रकारों के संपर्क के बाद अलीबाबा से जुड़े उपयोगकर्ताओं की API पहुंच निलंबित कर दी। दूसरी ओर, एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर चीनी फर्मों को अपने मॉडल के उपयोग से पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीनी डेवलपर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने के लिए इन तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं, वहीं ओपनएआई और गूगल स्वयं अमेरिकी न्याय विभाग और संघीय व्यापार आयोग की अविश्वास जांच का सामना कर रहे हैं।
इस प्रतिस्पर्धा के बीच, दक्षिण कोरिया AI चिप बूम का एक प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरा है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स उच्च-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स की भारी मांग से राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया का कुल निर्यात मार्च 2025 से जून 2026 के बीच 159.5 अरब डॉलर से बढ़कर 275.95 अरब डॉलर हो गया, जिसमें चिप्स की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। हालांकि, इस तेजी ने शेयर बाजार में सट्टेबाजी को भी बढ़ावा दिया है, जहां एसके हाइनिक्स का बाजार पूंजीकरण जनवरी से जून 2026 के बीच 342 अरब डॉलर से बढ़कर 1.36 ट्रिलियन डॉलर हो गया।
चीन ने चिप डिजाइन में उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां हुआवेई जैसी कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद नवीन तकनीकों से प्रदर्शन सुधार रही हैं। हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर पिछले वर्ष 140 प्रतिशत चढ़े हैं। फिर भी, विनिर्माण क्षमता में चीन अभी भी अमेरिका से काफी पीछे है, उसकी कंप्यूट क्षमता अमेरिका की तुलना में केवल सातवें हिस्से के बराबर है। इसी संदर्भ में, बीजिंग ने अब सीमित मात्रा में एनवीडिया के H200 चिप्स के आयात की अनुमति देने का संकेत दिया है, जिसके लिए अलीबाबा, बाइटडांस और डीपसीक जैसी कंपनियां आवेदन कर सकती हैं, बशर्ते वे उपयोग का औचित्य बता सकें।
आगे का ध्यान दो मोर्चों पर रहेगा: पहला, अमेरिकी प्रशासन क्या सिंगापुर जैसे तीसरे देशों के जरिए हो रहे AI हस्तांतरण पर नए प्रतिबंध लगाता है; और दूसरा, क्या चीन में H200 चिप्स का सीमित आयात वास्तव में शुरू हो पाता है, जिस पर एनवीडिया ने अभी तक अपने वित्तीय अनुमानों में कोई राजस्व शामिल नहीं किया है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.70 | critical |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.30 | aligned |
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