
अफ़डी पार्टी सम्मेलन के ख़िलाफ़ एरफ़र्ट में हज़ारों का प्रदर्शन, राजमार्ग जाम
जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अफ़डी के वार्षिक अधिवेशन के दौरान सड़कों पर बैठकर विरोध जताने वाले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, लेकिन पार्टी ने नेतृत्व का पुनर्निर्वाचन कर पूर्वी राज्यों में चुनावी तैयारियों को रेखांकित किया।
जर्मनी के एरफ़र्ट शहर में अल्टरनेटिव फ़ॉर जर्मनी (अफ़डी) के दो दिवसीय संघीय सम्मेलन के दौरान शनिवार को हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने राजमार्गों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। पुलिस के अनुसार, लगभग 15,000 से 20,000 लोगों ने प्रदर्शन में भाग लिया, जिनमें से कुछ ने ऑटोबान ए71 पर बैठकर यातायात रोक दिया। वामपंथी दलों, श्रमिक संघों और नागरिक समाज समूहों द्वारा आयोजित इन विरोधों के दौरान पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने एक अफ़डी कार्यालय और पुलिसकर्मियों पर पायरोटेक्निक और रंगीन बैग फेंके। प्रदर्शनकारी संगठन 'विडरसेटज़ेन' के प्रवक्ता जॉर्ज बेकर ने कहा कि वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जर्मनी में फ़ासीवाद बढ़ रहा है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन बाधाओं के बावजूद, पार्टी के लगभग 600 प्रतिनिधियों में से 540 सुबह 7:30 बजे तक सम्मेलन स्थल पर पहुँच चुके थे, क्योंकि पुलिस ने उन्हें विशेष बसों से सुरक्षित पहुँचाया था। अफ़डी ने सह-नेता एलिस वाइडेल और टीनो क्रुपाला को पुनर्निर्वाचित किया, जो चार वर्षों से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। जर्मन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी ने राष्ट्रवादी बयानबाज़ी, सख़्त आव्रजन नीतियों और आर्थिक स्थिरता से निराश मतदाताओं को आकर्षित करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर 29% तक की जनमत सर्वेक्षण बढ़त हासिल कर ली है। पूर्वी राज्य सैक्सोनी-एनहाल्ट में तो उसे 41% समर्थन प्राप्त है, जहाँ सितंबर में चुनाव होने हैं।
यूरोपीय सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार, अफ़डी के कुछ धड़ों को अतिवादी माना जाता है, हालाँकि एक अदालती आदेश ने घरेलू ख़ुफ़िया सेवा के इस वर्गीकरण को फ़िलहाल निलंबित कर दिया है। मुख्यधारा की पार्टियाँ 'फ़ायरवॉल' रणनीति के तहत अफ़डी के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार करती हैं। सम्मेलन के दौरान थुरिंगिया के अफ़डी नेता ब्योर्न होके ने पार्टी की असंगति सूची को संशोधित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे बाद में एक वर्ष के भीतर आंतरिक समीक्षा के लिए टाल दिया गया। साथ ही, युवा संगठन 'जेनरेशन डॉयचलैंड' ने पार्टी के वित्तीय और नीतिगत निकायों में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग की, जिसे पार्टी नेतृत्व ने समर्थन दिया।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से, जर्मनी की राजनीतिक स्थिरता भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि अफ़डी की आव्रजन-विरोधी नीतियाँ और यूरो-संशयवाद भारतीय प्रवासियों, छात्रों और व्यापारिक समुदाय के लिए अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। हालाँकि, जर्मन संवैधानिक ढाँचे और मुख्यधारा दलों के प्रतिरोध के कारण तत्काल नीतिगत बदलाव की संभावना कम है।
यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ जब नाज़ी पार्टी की एक ऐतिहासिक बैठक की 100वीं वर्षगाँठ के साथ इसका संयोग विवादास्पद बना हुआ है। अफ़डी अब सैक्सोनी-एनहाल्ट और मेक्लेनबर्ग-वोर्पोमर्न में सितंबर में होने वाले राज्य चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहाँ उसकी जीत की संभावना जर्मन राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकती है। प्रदर्शनकारी समूहों ने चुनाव प्रचार के दौरान भी विरोध जारी रखने की घोषणा की है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एरफर्ट में, यूनियनों और वामपंथी समूहों के हजारों प्रदर्शनकारियों ने एएफडी कांग्रेस को रोकने के लिए राजमार्गों को जाम कर दिया और जर्मनी में फासीवाद के उदय की निंदा की। दंगा पुलिस बड़ी संख्या में तैनात थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि वे धुर दक्षिणपंथ के सामान्यीकरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस कार्रवाई को एक खतरनाक राजनीतिक ताकत के खिलाफ आवश्यक नागरिक प्रतिरोध के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
एरफर्ट में एएफडी कांग्रेस बड़े पैमाने पर यातायात अवरोधों और झड़पों से चिह्नित रही, जिसमें पुलिस ने आतिशबाजी करने वाले वामपंथी चरमपंथियों पर लाठियां बरसाईं। हॉल के अंदर, पार्टी की आंतरिक सत्ता संघर्ष तेज हो गया क्योंकि युवा शाखा ने प्रमुख पदों के लिए दबाव डाला, जबकि एएफडी के चुनावी सर्वेक्षणों में लगातार वृद्धि जारी है। यह आयोजन सड़क विरोध और अपनी चढ़ाई के बीच फंसे धुर दक्षिणपंथी दल के इर्द-गिर्द तनाव को स्पष्ट करता है।
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