
ईरान ने जॉर्डन-कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया, THAAD और पैट्रियट सिस्टम नष्ट
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि ये हमले अमेरिकी आक्रमण का जवाब हैं और इनका उद्देश्य मेज़बान देशों की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि उसने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर वहां तैनात पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली, THAAD मिसाइल रक्षा रडार और C-RAM रडार को नष्ट कर दिया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस पर ड्रोन हैंगर और सैन्य उपकरणों के गोदाम को भी निशाना बनाया गया, जबकि जॉर्डन के मुवफ्फक सल्ती एयरबेस पर हेलीकॉप्टर रखरखाव केंद्र और ईंधन टैंकों में आग लगा दी गई। IRGC ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी क्षेत्र पर बार-बार किए गए हमलों के प्रतिशोध में की गई है, और इसका उद्देश्य जॉर्डन या कुवैत की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करना नहीं, बल्कि उन भूमियों पर हमला करना है जिन पर अमेरिकी सेना का कब्ज़ा है।
तेहरान के इस रुख़ के समानांतर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरानी दावों को ख़ारिज करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग व्यावसायिक जहाज़ों के लिए खुला है और अमेरिकी सेना ने मई से अब तक 900 से अधिक जहाज़ों को सुरक्षित निकाला है। वहीं, जॉर्डन सरकार ने आधिकारिक रूप से अपनी धरती पर अमेरिकी सैन्य अड्डों के अस्तित्व से इनकार किया है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मुवफ्फक सल्ती एयरबेस पर ईरानी मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई घायल हुए। कुवैत की सेना ने ईरानी ड्रोन हमलों की पुष्टि की है और बताया कि नागरिक बुनियादी ढांचे—बिजली संयंत्र, जल शोधन केंद्र और तेल रिफाइनरियां—भी निशाना बनाए गए, जिससे अत्यधिक गर्मी के बीच आम नागरिकों को एयर कंडीशनिंग का उपयोग सीमित करना पड़ा।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक दृश्य जांच ने पुष्टि की है कि पिछले दो सप्ताह में ईरानी हमलों ने पूरे मध्य पूर्व में नौ अमेरिकी-संबद्ध स्थलों को क्षति पहुंचाई, जिसमें रहने के क्वार्टर, ड्रोन शेल्टर और रडार प्रणालियां शामिल हैं। इस जांच के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के इस दावे के बावजूद कि ईरान की सैन्य क्षमता काफ़ी हद तक नष्ट हो चुकी है, तेहरान ने सटीक निशाना लगाने की अपनी क्षमता बरकरार रखी है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान जानबूझकर कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे छोटे और कमज़ोर क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बना रहा है, ताकि अमेरिकी गठबंधन पर दबाव बढ़ाया जा सके और आंतरिक असहमति को हवा दी जा सके।
यह सैन्य टकराव फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले से शुरू हुआ, जिसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए। जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत युद्धविराम और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का रास्ता बनना था, लेकिन जुलाई की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए युद्धविराम समाप्त कर दिया। तब से अमेरिका लगातार बारहवीं रात ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है, जबकि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर को खदान से उड़ाने और जलमार्ग को अमेरिकी सेना की मौजूदगी तक बंद रखने की चेतावनी दी है।
अमेरिकी कांग्रेस ने इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप के युद्ध अधिकारों को सीमित करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया है, जबकि ब्रिटेन ने सुरक्षा स्थिति बिगड़ने पर तेहरान से अपने दूतावास कर्मियों को अस्थायी रूप से वापस बुला लिया है। क्षेत्रीय स्तर पर, जॉर्डन की जनता के एक बड़े हिस्से में अमेरिकी नीतियों के प्रति असंतोष है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के हमलों ने, जो सीधे जॉर्डन की धरती पर हो रहे हैं, आधिकारिक रुख़ और जनमत के बीच की खाई को कुछ हद तक कम किया है। फ़िलहाल, किसी भी पक्ष ने नए युद्धविराम की संभावना पर कोई ठोस संकेत नहीं दिया है, और दोनों ओर से सैन्य कार्रवाई जारी है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +1.00 | aligned |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
IRGC ईरान की ओर से बोलता है, बच्चों को मारने वाली अमेरिकी सेना को दंडित करने के कानूनी और नैतिक अधिकार का दावा करता है।
कथा आक्रामकता को नैतिक बनाती है, हमले को आक्रामकता के रूप में नहीं बल्कि उचित और आनुपातिक सजा के रूप में प्रस्तुत करती है।
ईरान पर पूर्व और समवर्ती अमेरिकी हमलों के संदर्भ को छोड़ दिया गया है, जो संघर्ष की एक सममित व्याख्या को उचित ठहराएगा।
रूस ईरानी दावों और अमेरिकी जवाबी कार्रवाइयों की रिपोर्ट करता है, एक सूचित पर्यवेक्षक की स्थिति बनाए रखता है।
स्रोतों को संतुलित करने की तकनीक निष्पक्षता का आभास कराती है, जबकि अमेरिकी कार्रवाइयों को शामिल करना संघर्ष में समरूपता का सुझाव देता है।
ईरानी हमले के नैतिक चरित्र-चित्रण को छोड़ दिया गया है, जिससे कथा घटनाओं के एक क्रॉनिकल तक सीमित हो जाती है।
भारत बिना किसी टिप्पणी के ईरानी दावे की रिपोर्ट करता है, एक अलग समाचार क्रॉनिकल स्वर अपनाता है।
मूल्यांकनात्मक परहेज पक्ष लेने से बचता है, समाचार को एक मात्र असत्यापित दावे के रूप में प्रस्तुत करता है।
संघर्ष या अमेरिकी कार्रवाइयों के किसी भी संदर्भ को छोड़ दिया गया है, दावे को व्यापक तस्वीर से अलग कर दिया गया है।
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