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Snap ने लॉन्च किए 2,195 डॉलर के AR चश्मे, स्मार्टफोन युग के बाद का दांव

स्नैप ने स्पेक्स नामक स्वतंत्र AR चश्मे पेश किए, जो मेटा और एपल जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में एक साहसिक कदम है।

स्नैप ने मंगलवार को कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में आयोजित ऑगमेंटेड वर्ल्ड एक्सपो में अपने बहुप्रतीक्षित संवर्धित वास्तविकता (AR) चश्मे 'स्पेक्स' का अनावरण किया। 2,195 डॉलर (लगभग 1.8 लाख रुपये) की कीमत वाले यह चश्मे एक स्वतंत्र कंप्यूटर हैं, जिन्हें स्मार्टफोन से जोड़े बिना इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने 200 डॉलर की वापसी योग्य अग्रिम राशि के साथ प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए हैं और इस शरद ऋतु में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस में शिपमेंट की योजना है। यह लॉन्च स्नैप के सीईओ इवान स्पीगल की उस दस वर्षीय यात्रा का परिणाम है, जो सोशल मीडिया ऐप से परे एक हार्डवेयर कंपनी के रूप में उभरने का सपना देख रहे थे।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब टेक उद्योग में स्मार्ट चश्मों की होड़ तेज़ हो गई है। मेटा के रे-बैन स्मार्ट चश्मे लगभग 350 डॉलर में उपलब्ध हैं और बाज़ार में लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं, जबकि एपल का विज़न प्रो हेडसेट 3,500 डॉलर में मिश्रित वास्तविकता का अनुभव देता है। गूगल भी इस वर्ष स्मार्ट चश्मे लाने की तैयारी में है। स्नैप के स्पेक्स इन सबसे अलग इस मायने में हैं कि ये पूरी तरह स्वायत्त AR डिवाइस हैं, न कि केवल कैमरा या डिस्प्ले वाला एक्सेसरी। इसी एक्सपो में क्वालकॉम ने अपना नया एक्सआर फ्लैगशिप चिप 'स्नैपड्रैगन रियलिटी एलीट' पेश किया, जो 48 TOPS तक की AI कंप्यूटिंग, बेहतर ग्राफिक्स और 20% अधिक बैटरी लाइफ का वादा करता है। यह चिप पहले ही श्याओमी समर्थित एक्सरियल के प्रोजेक्ट ऑरा जैसे चश्मों में इस्तेमाल होगी, जिससे संकेत मिलता है कि उद्योग अब शक्तिशाली, AI-संचालित पहनने योग्य उपकरणों की ओर बढ़ रहा है।

हालांकि, स्नैप के लिए यह दांव जोखिम भरा है। कंपनी का विज्ञापन कारोबार मेटा और टिकटॉक जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के दबाव में है, और निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है। एक सक्रिय निवेशक ने तो स्पेक्स इकाई को बंद करने या अलग करने की मांग तक कर दी है, क्योंकि यह भारी नकदी खर्च कर रही है। दूसरी ओर, स्नैपचैट का उपयोगकर्ता आधार भारत और पाकिस्तान जैसे दक्षिण एशियाई बाज़ारों में तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन स्पेक्स की शुरुआती बिक्री इन देशों में नहीं होगी। इंडोनेशियाई मीडिया के अनुसार, स्थानीय कीमत लगभग 3.8 करोड़ रुपिये होगी, जो इसे आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर रखती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्नैप का यह प्रयास स्मार्टफोन के बाद की दुनिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक साहसिक छलांग है। मार्क ज़करबर्ग भी कह चुके हैं कि स्मार्ट चश्मे अगला प्रमुख कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनेंगे। फिलहाल, स्पेक्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेवलपर इसके लिए आकर्षक ऐप तैयार कर पाते हैं या नहीं, और उपभोक्ता इतनी ऊंची कीमत चुकाने को तैयार होते हैं या नहीं। क्वालकॉम जैसी चिप निर्माता कंपनियों के नवाचार से तकनीकी बाधाएं कम हो रही हैं, लेकिन भारत जैसे कीमत-संवेदनशील बाज़ारों में AR चश्मों को लोकप्रिय होने में अभी लंबा समय लग सकता है। फिर भी, यह दौड़ निश्चित रूप से अगले दशक के तकनीकी परिदृश्य को आकार देने वाली है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

48%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa atlantica / anglosferaStampa europea continentale
Stampa atlantica / anglosfera/ economica
scetticismoironia

स्नैप ने 2,195 डॉलर के संवर्धित वास्तविकता चश्मे के साथ दौड़ में प्रवेश किया, लेकिन कीमत ने तुरंत संदेह पैदा कर दिया। यह लॉन्च मेटा, गूगल और एप्पल के साथ प्रतिद्वंद्विता को तेज करता है, जो सभी अगले कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के लिए होड़ में हैं। पर्यवेक्षक सवाल उठाते हैं कि क्या उपभोक्ता इतना प्रीमियम चुकाएंगे जब सस्ते विकल्प पहले से मौजूद हैं।

Stampa europea continentale/ mediterranea
distaccopragmatismo

स्नैप अपने स्पेक्स संवर्धित वास्तविकता चश्मे के साथ फिर से प्रयास कर रहा है, जिसकी कीमत 2,195 डॉलर है। यह उपकरण दस साल के प्रयास और सीईओ के 2026 तक उपभोक्ता-तैयार तकनीक देने के वादे की परिणति है। इसे एक स्वतंत्र पहनने योग्य कंप्यूटर के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो बाजार में बड़े हेडसेट को टक्कर देने का लक्ष्य रखता है।

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Snap ने लॉन्च किए 2,195 डॉलर के AR चश्मे, स्मार्टफोन युग के बाद का दांव

स्नैप ने स्पेक्स नामक स्वतंत्र AR चश्मे पेश किए, जो मेटा और एपल जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में एक साहसिक कदम है।

स्नैप ने मंगलवार को कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में आयोजित ऑगमेंटेड वर्ल्ड एक्सपो में अपने बहुप्रतीक्षित संवर्धित वास्तविकता (AR) चश्मे 'स्पेक्स' का अनावरण किया। 2,195 डॉलर (लगभग 1.8 लाख रुपये) की कीमत वाले यह चश्मे एक स्वतंत्र कंप्यूटर हैं, जिन्हें स्मार्टफोन से जोड़े बिना इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी ने 200 डॉलर की वापसी योग्य अग्रिम राशि के साथ प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए हैं और इस शरद ऋतु में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस में शिपमेंट की योजना है। यह लॉन्च स्नैप के सीईओ इवान स्पीगल की उस दस वर्षीय यात्रा का परिणाम है, जो सोशल मीडिया ऐप से परे एक हार्डवेयर कंपनी के रूप में उभरने का सपना देख रहे थे।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब टेक उद्योग में स्मार्ट चश्मों की होड़ तेज़ हो गई है। मेटा के रे-बैन स्मार्ट चश्मे लगभग 350 डॉलर में उपलब्ध हैं और बाज़ार में लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं, जबकि एपल का विज़न प्रो हेडसेट 3,500 डॉलर में मिश्रित वास्तविकता का अनुभव देता है। गूगल भी इस वर्ष स्मार्ट चश्मे लाने की तैयारी में है। स्नैप के स्पेक्स इन सबसे अलग इस मायने में हैं कि ये पूरी तरह स्वायत्त AR डिवाइस हैं, न कि केवल कैमरा या डिस्प्ले वाला एक्सेसरी। इसी एक्सपो में क्वालकॉम ने अपना नया एक्सआर फ्लैगशिप चिप 'स्नैपड्रैगन रियलिटी एलीट' पेश किया, जो 48 TOPS तक की AI कंप्यूटिंग, बेहतर ग्राफिक्स और 20% अधिक बैटरी लाइफ का वादा करता है। यह चिप पहले ही श्याओमी समर्थित एक्सरियल के प्रोजेक्ट ऑरा जैसे चश्मों में इस्तेमाल होगी, जिससे संकेत मिलता है कि उद्योग अब शक्तिशाली, AI-संचालित पहनने योग्य उपकरणों की ओर बढ़ रहा है।

हालांकि, स्नैप के लिए यह दांव जोखिम भरा है। कंपनी का विज्ञापन कारोबार मेटा और टिकटॉक जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के दबाव में है, और निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है। एक सक्रिय निवेशक ने तो स्पेक्स इकाई को बंद करने या अलग करने की मांग तक कर दी है, क्योंकि यह भारी नकदी खर्च कर रही है। दूसरी ओर, स्नैपचैट का उपयोगकर्ता आधार भारत और पाकिस्तान जैसे दक्षिण एशियाई बाज़ारों में तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन स्पेक्स की शुरुआती बिक्री इन देशों में नहीं होगी। इंडोनेशियाई मीडिया के अनुसार, स्थानीय कीमत लगभग 3.8 करोड़ रुपिये होगी, जो इसे आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर रखती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्नैप का यह प्रयास स्मार्टफोन के बाद की दुनिया की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक साहसिक छलांग है। मार्क ज़करबर्ग भी कह चुके हैं कि स्मार्ट चश्मे अगला प्रमुख कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनेंगे। फिलहाल, स्पेक्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेवलपर इसके लिए आकर्षक ऐप तैयार कर पाते हैं या नहीं, और उपभोक्ता इतनी ऊंची कीमत चुकाने को तैयार होते हैं या नहीं। क्वालकॉम जैसी चिप निर्माता कंपनियों के नवाचार से तकनीकी बाधाएं कम हो रही हैं, लेकिन भारत जैसे कीमत-संवेदनशील बाज़ारों में AR चश्मों को लोकप्रिय होने में अभी लंबा समय लग सकता है। फिर भी, यह दौड़ निश्चित रूप से अगले दशक के तकनीकी परिदृश्य को आकार देने वाली है।

स्रोतों में मतभेद

प्रौद्योगिकी · 5 स्रोत · 5 भाषाएँ

48%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र60%
निंदक40%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa atlantica / anglosferaStampa europea continentale
Stampa atlantica / anglosfera/ economica
scetticismoironia

स्नैप ने 2,195 डॉलर के संवर्धित वास्तविकता चश्मे के साथ दौड़ में प्रवेश किया, लेकिन कीमत ने तुरंत संदेह पैदा कर दिया। यह लॉन्च मेटा, गूगल और एप्पल के साथ प्रतिद्वंद्विता को तेज करता है, जो सभी अगले कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के लिए होड़ में हैं। पर्यवेक्षक सवाल उठाते हैं कि क्या उपभोक्ता इतना प्रीमियम चुकाएंगे जब सस्ते विकल्प पहले से मौजूद हैं।

Stampa europea continentale/ mediterranea
distaccopragmatismo

स्नैप अपने स्पेक्स संवर्धित वास्तविकता चश्मे के साथ फिर से प्रयास कर रहा है, जिसकी कीमत 2,195 डॉलर है। यह उपकरण दस साल के प्रयास और सीईओ के 2026 तक उपभोक्ता-तैयार तकनीक देने के वादे की परिणति है। इसे एक स्वतंत्र पहनने योग्य कंप्यूटर के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो बाजार में बड़े हेडसेट को टक्कर देने का लक्ष्य रखता है।

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