
रूसी खिलाड़ियों की वापसी: ISU ने आठ फिगर स्केटर्स को दिया न्यूट्रल स्टेटस, यूरोपीय देशों ने फंडिंग रोकने की धमकी
अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा रूसी और बेलारूसी एथलीटों पर से प्रतिबंध हटाने के क्रम में फिगर स्केटिंग से लेकर हैंडबॉल तक कई खेलों में वापसी का रास्ता साफ हुआ है, लेकिन यूरोपीय संघ के नौ देशों ने आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग संघ (ISU) ने रूस की तीन बार की राष्ट्रीय चैंपियन और 2026 ओलंपिक की दावेदार अदेलिया पेत्रोस्यान समेत आठ फिगर स्केटर्स को न्यूट्रल स्टेटस प्रदान कर दिया है। इस सूची में अलीना गोर्बाचेवा, अलीसा द्वोएग्लाज़ोवा, अन्ना फ्रोलोवा, मार्गारीटा बाज़िल्युक, ग्रिगोरी फेडोरोव और जोड़ी स्पर्धा के विक्टोरिया द्विनीना व आर्टेम पेत्रोव शामिल हैं। ISU ने 30 जून से रूसी और बेलारूसी खिलाड़ियों को न्यूट्रल स्टेटस के तहत प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति दी थी, लेकिन हर एथलीट की व्यक्तिगत जांच अनिवार्य रखी गई। शर्तों के मुताबिक, जो खिलाड़ी सशस्त्र बलों या राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों में सेवारत हैं, फरवरी 2022 के बाद यूक्रेन के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई में शामिल रहे, या सार्वजनिक रूप से रूस के रुख का समर्थन किया, उन्हें मंजूरी नहीं मिलेगी। इसी कड़ी में पूर्व ओलंपिक पदक विजेता एलेक्जेंड्रा ट्रूसोवा और कामिला वालिएवा अभी प्रतीक्षा सूची में हैं।
यह कदम अंतरराष्ट्रीय खेल परिदृश्य में बड़े बदलाव का हिस्सा है। 7 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने रूसी ओलंपिक समिति के निलंबन को अस्थायी रूप से हटा लिया और रूसी खिलाड़ियों पर प्रतिबंधों से जुड़ी अपनी सिफारिशें वापस ले लीं। IOC के प्रवक्ता के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि रूस ने यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों के क्षेत्रीय खेल निकायों को अपने ढांचे से हटा दिया था, जो अक्टूबर 2023 में लगाए गए प्रतिबंधों का मूल कारण था। हालांकि, IOC ने स्पष्ट किया कि यह अस्थायी कदम है और रूस के प्रति व्यापक रुख में कोई बदलाव नहीं दर्शाता। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल महासंघ (IHF) ने भी रूसी और बेलारूसी टीमों व प्रतिनिधियों पर से प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटा दिया, जिससे वे विश्व चैंपियनशिप जैसी IHF-स्वीकृत प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकेंगे। लेकिन यूरोपीय हैंडबॉल महासंघ (EHF) के तहत होने वाली यूरोपीय चैंपियनशिप पर यह छूट लागू नहीं होगी।
यूरोपीय देशों ने इन फैसलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एस्टोनिया, डेनमार्क, फिनलैंड, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, पोलैंड, रोमानिया और स्वीडन—इन नौ देशों ने यूरोपीय संघ के खेल आयुक्त को पत्र लिखकर मांग की है कि जो खेल संस्थाएं रूसी और बेलारूसी एथलीटों को वापस ले रही हैं, उनकी यूरोपीय संघ से मिलने वाली आर्थिक मदद रोक दी जाए। पत्र में तर्क दिया गया कि यूक्रेनी खिलाड़ियों की कठिनाइयों—विस्थापन, प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव, सेना में भर्ती—को नजरअंदाज कर यह कदम उठाया गया है। इन देशों का कहना है कि मानवाधिकार, कानून का शासन और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंध खेल के मूल सिद्धांत हैं, और युद्ध की भारी मानवीय कीमत के सामने खेल को राजनीति से अलग रखने के तर्क टिक नहीं पाते।
इन घटनाक्रमों का सीधा खेल परिणाम यह है कि रूसी फिगर स्केटर्स अब 2026 के मिलान-कोर्टिना शीतकालीन ओलंपिक के क्वालिफिकेशन टूर्नामेंटों में उतर सकते हैं, हालांकि टीम स्पर्धाओं में उनकी भागीदारी अब भी वर्जित है। हैंडबॉल में रूस और बेलारूस को विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करना होगा, जबकि यूरोपीय स्तर पर EHF का प्रतिबंध कायम है। IOC का अस्थायी रुख और यूरोपीय संघ की फंडिंग रोकने की धमकी अंतरराष्ट्रीय महासंघों के लिए वित्तीय अनिश्चितता पैदा कर सकती है, जिसका असर एशिया समेत दुनिया भर के खेल विकास कार्यक्रमों पर पड़ सकता है। फिलहाल, बर्फ पर वापसी का रास्ता खुला है, लेकिन खेल प्रशासन और कूटनीति के बीच खिंची लकीरें अभी धुंधली हैं।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.60 | aligned |
| इज़राइली प्रेस | 0.00 | neutral |
स्वीडन को अब हैंडबॉल में फिर से रूस का सामना करने की तैयारी करनी होगी, जो IHF के उन्हें फिर से शामिल करने के निर्णय का परिणाम है।
स्वीडन-रूस मैच की ठोस संभावना पर ध्यान केंद्रित करके, लेख एक अमूर्त नीतिगत निर्णय को एक ठोस खतरे में बदल देता है, जिससे पुनः प्रवेश जोखिम भरा लगता है।
यह इस तथ्य को छोड़ देता है कि स्वीडन उन नौ देशों में से एक है जिन्होंने औपचारिक रूप से पुनः प्रवेश का विरोध किया था, जिससे उसकी चिंता और स्पष्ट हो जाती।
रूसी एथलीटों को आखिरकार वह तटस्थ दर्जा मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं, और IOC यूरोपीय दबाव का सामना कर रहा है।
तटस्थ दर्जा देने को एक सकारात्मक कदम के रूप में उजागर करके और IOC के बचाव को उद्धृत करके, कथा पुनः प्रवेश को एक स्वाभाविक और उचित प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है।
यह इस तथ्य को छोड़ देता है कि कई यूरोपीय देश दृढ़ता से विरोध कर रहे हैं और फंडिंग में कटौती की धमकी दे रहे हैं, जो सुचारू पुन: एकीकरण की कथा को कमजोर करेगा।
IOC का यूरोपीय संघ के अल्पसंख्यक देशों द्वारा खेलों के राजनीतिकरण का विरोध करना सही है।
IOC के आधिकारिक बचाव और विरोध करने वाले देशों की सूची की रिपोर्ट करके, लेख IOC को एक तर्कसंगत अभिनेता के रूप में प्रस्तुत करता है जो अनुचित राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है।
यह रूसी एथलीटों के दृष्टिकोण को छोड़ देता है, केवल संस्थागत संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।
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