
हॉर्मुज खुलने से तेल बाजार में भारी अधिशेष की आशंका, IEA ने घटाया मांग अनुमान
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद 2027 में आपूर्ति में 80 लाख बैरल की बढ़ोतरी से बाजार अभाव से बहुतायत की ओर मुड़ सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की जून रिपोर्ट ने वैश्विक तेल बाजार की दिशा बदल दी है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के युद्धविराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने के अंतरिम समझौते ने उम्मीद जगाई है कि इतिहास का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट समाप्त हो सकता है। फरवरी में शुरू युद्ध ने मध्य पूर्व से 1.4 करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक तेल प्रवाह रोक दिया था। 19 जून को स्विट्जरलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर से नीचे आ गया, लेकिन IEA ने साफ किया कि सामान्य होने में वक्त लगेगा।
युद्ध ने मांग और आपूर्ति दोनों को गहरा झटका दिया। IEA ने 2026 की वैश्विक मांग के अनुमान को मई से 7 लाख बैरल प्रतिदिन घटाकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन की वार्षिक गिरावट कर दी। आपूर्ति में 39 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी से कुल उत्पादन 10.24 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह जाएगा। हालांकि, मांग में भारी गिरावट के कारण इस साल बाजार घाटा 10 लाख बैरल प्रतिदिन से कम रहने का अनुमान है, जो पिछले 17.8 लाख बैरल के अनुमान से काफी कम है। दूसरी तिमाही में तेल आपूर्ति सालाना 50 लाख बैरल प्रतिदिन गिरी, 2020 के बाद पहली तिमाही गिरावट। सरकारी रणनीतिक भंडार 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर हैं, और मई में निकासी दर 46 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंची। ऊंची ईंधन कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान ने मांग को कुचल दिया।
भारत और दक्षिण एशिया, जो 80 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करते हैं, के लिए हॉर्मुज की नाकेबंदी का अर्थ था बढ़ता आयात बिल, ईंधन महंगाई और संभावित किल्लत। समझौते से राहत की उम्मीद है, लेकिन मांग में कमी और खाली भंडारों के चलते कीमतें तुरंत स्थिर नहीं होंगी। वैश्विक बाजारों में एसएंडपी 500 में 3.3 प्रतिशत उछाल और ट्रेजरी यील्ड में नरमी आई, फिर भी विश्लेषक चेताते हैं कि हॉर्मुज खुलने के बाद भी पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला अस्त-व्यस्त रहेगी और सरकारी भंडार गंभीर रूप से कम हैं। IEA मानता है कि समझौता जोखिम खत्म नहीं करता।
2027 का परिदृश्य चौंकाने वाला है। IEA के पहले अनुमान के अनुसार, यदि शांति टिकती है और ईरानी निर्यात प्रतिबंध हटते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति 80 लाख बैरल प्रतिदिन उछलकर 11 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो जाएगी, जबकि मांग सिर्फ 20 लाख बैरल बढ़कर 10.53 करोड़ बैरल रह जाएगी। इससे 50 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक का भारी अधिशेष बनेगा—अभाव से बहुतायत की ओर नाटकीय मोड़। भारत जैसे बड़े आयातकों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और महंगाई दबाव में कमी आएगी, लेकिन संक्रमण काल रणनीतिक भंडारों और राजकोषीय सहनशक्ति की परीक्षा लेगा। IEA ने आगाह किया है कि सामान्यीकरण की राह अनिश्चितताओं से भरी है; किसी नए तनाव से प्रवाह फिर बाधित हो सकता है।
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IEA ने 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग के अपने पूर्वानुमान को तेजी से घटाकर 1.1 मिलियन बैरल प्रति दिन कर दिया, लेकिन आपूर्ति के दृष्टिकोण को थोड़ा सुधारकर 102.4 मिलियन बैरल प्रति दिन कर दिया। मई में रूसी तेल निर्यात राजस्व 0.7 बिलियन डॉलर गिरा, फिर भी साल-दर-साल 8 बिलियन डॉलर से अधिक ऊंचा रहा। एक व्यावहारिक नजरिया जो नकारात्मक और सकारात्मक संकेतों को बिना अलार्म के संतुलित करता है।
IEA को युद्ध के बाद तेल आपूर्ति में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है, बाजार 2027 में बड़े अधिशेष की ओर बढ़ रहा है क्योंकि उत्पादन वृद्धि मांग से आगे निकल गई है। अमेरिका-ईरान समझौता तीन महीने के संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से खाड़ी के निर्यात और उत्पादन को धीरे-धीरे वापस लाने की अनुमति देगा यदि संघर्ष विराम टिकता है। स्थिरीकरण पर केंद्रित एक सतर्क आशावादी दृष्टिकोण।
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