
IOC के फैसले से रूसी खिलाड़ियों की वापसी का रास्ता साफ, लेकिन रुकावटें बरकरार
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने रूसी ओलंपिक समिति का निलंबन अस्थायी रूप से हटा दिया, जिससे विभिन्न खेल महासंघों में बहाली की लहर दौड़ गई है, परंतु पश्चिमी देशों का विरोध और कानूनी चुनौतियाँ जारी हैं।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के 7 जुलाई के फैसले ने रूसी खेल जगत को एक बड़ी कूटनीतिक जीत दिलाई। कार्यकारी बोर्ड ने अक्टूबर 2023 से लगे रूसी ओलंपिक समिति के निलंबन को अस्थायी रूप से हटा लिया और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए टीम स्पर्धाओं व क्वालीफाइंग प्रतियोगिताओं में रूसी एथलीटों की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया। IOC अध्यक्ष किर्स्टी कोवेंट्री ने कहा कि वे नहीं चाहते कि एथलीट अपनी सरकारों के कृत्यों की कीमत चुकाएँ। हालाँकि, रूसी ध्वज और राष्ट्रगान पर फिलहाल रोक बरकरार है और लौटने वाले खिलाड़ियों को कड़े डोपिंग परीक्षणों से गुज़रना होगा।
इस निर्णय के बाद खेल महासंघों की प्रतिक्रियाएँ तीन धाराओं में बँट गईं। पहली धारा ने तुरंत पूर्ण बहाली का रास्ता अपनाया: अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल महासंघ (FIVB) ने रूसी टीमों को प्रतियोगिताओं में शामिल करने की घोषणा की, जबकि आधुनिक पेंटाथलॉन संघ (UIPM) ने सभी प्रतिबंध हटाकर राष्ट्रीय ध्वज और गान के साथ उतरने की अनुमति दे दी। दूसरी धारा सतर्क समीक्षा की है: फीफा ने कहा कि वह यूएफा सहित सदस्यों के साथ विचार-विमर्श करेगा, और अंतरराष्ट्रीय स्की महासंघ (FIS) ने आगामी सीज़न के लिए शर्तें तय करने से पहले गहन मूल्यांकन की बात कही। तीसरी धारा ने विरोध जताया: विश्व एथलेटिक्स (WA) ने अपना प्रतिबंध बरकरार रखा, जिसके खिलाफ रूसी एथलेटिक्स महासंघ ने खेल पंचाट न्यायालय (CAS) में अपील दायर कर दी है।
भौगोलिक दृष्टि से प्रतिक्रियाओं में स्पष्ट विभाजन उभरा। पश्चिमी देशों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया: कनाडा के खेल मंत्री ने इसे “स्तब्ध करने वाला” बताया और स्पष्ट किया कि सरकारी वित्तपोषित आयोजनों में कोई रूसी एथलीट भाग नहीं लेगा; एस्टोनिया ने यूरोपीय संघ से IOC की फंडिंग रोकने की माँग की; नॉर्वे, ब्रिटेन, लातविया और स्वीडन ने भी असहमति जताई। पोलैंड वॉलीबाल महासंघ के अध्यक्ष ने अपनी स्थिति “हथौड़े और निहाई के बीच” बताई, क्योंकि सरकारी नीति के चलते रूसी खिलाड़ियों को वीज़ा नहीं मिल सकता। इसके विपरीत, एशियाई ओलंपिक परिषद ने IOC के फैसले का स्वागत किया और कहा कि खिलाड़ियों की भागीदारी में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
रूसी पक्ष ने इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता करार दिया। खेल मंत्री मिखाइल देगत्यारेव ने कहा कि यह लंबी कानूनी और राजनयिक मशक्कत का नतीजा है, और 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय महासंघ पहले ही जूनियर स्तर पर रूसी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ अनुमति दे चुके हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे “वैध अधिकारों की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया। दूसरी ओर, यूक्रेन ने इस फैसले को “समयपूर्व और निराधार” करार दिया, जबकि युद्ध पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
आगे की राह असमान बनी हुई है। रूसी पेंटाथलॉन टीम अगस्त में इस्तांबुल में होने वाली यूरोपीय चैंपियनशिप में ध्वज-गान के साथ उतरेगी, वहीं फीफा की समीक्षा का पहला ठोस परिणाम अक्टूबर में अंडर-15 विश्व कप में दिख सकता है। लेकिन पोलैंड जैसे देशों में वीज़ा अड़चन और विश्व एथलेटिक्स का कड़ा रुख दर्शाता है कि खेल पटल पर वापसी का हर कदम कानूनी और कूटनीतिक संघर्षों से तय होगा। CAS में दायर अपील का परिणाम ट्रैक एंड फील्ड की दुनिया में रूस की मौजूदगी की दिशा तय करेगा।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.60 | aligned |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Russia attempts to overturn through legal means a decision that Europe considers justified.
The challenge to CAS is presented as an act of rebellion against the international sports order, downplaying the reasons for the suspension.
The recent IOC decision to ease sanctions, which could weaken World Athletics' position, is not mentioned.
Russia, a victim of discrimination, reclaims its rightful place in sport thanks to the IOC and justice.
International support (Italian coach) is highlighted, and the IOC decision is presented as a victory, while the challenge to World Athletics is a fight for rights.
It does not mention that World Athletics' ban remains in place despite the IOC decision, and that many Western countries still oppose the return of Russians.
Russia invokes athletes' right to compete, World Athletics defends its principled stance.
The two narratives are balanced, giving voice to both without judgment, as if it were a matter of legal interpretation.
The recent IOC decision to ease sanctions, which could affect the case, is not mentioned.
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