
वित्तीय नियमन की उलटी दिशाएं: अमेरिका में ढील की आशंका, अफ्रीका-अर्जेंटीना में कड़ा रुख
मूडीज़ ने अमेरिकी बैंक पूंजी नियमों में प्रस्तावित ढील को जोखिम भरा बताया, जबकि घाना, नाइजीरिया, केन्या और अर्जेंटीना कर, डिजिटल भुगतान और क्रिप्टो पर सख्त नियंत्रण लागू कर रहे हैं।
वैश्विक वित्तीय नियमन के परिदृश्य में इस समय एक गहरा विरोधाभास उभर रहा है। एक ओर, अमेरिका में बैंकिंग क्षेत्र के लिए पूंजी आवश्यकताओं में ढील देने की तैयारी चल रही है, जिसे लेकर मूडीज़ जैसी रेटिंग एजेंसी ने निवेशकों को आगाह किया है। मार्च में प्रस्तावित इन बदलावों के तहत जोखिम-भारित परिसंपत्तियों की गणना को सरल बनाने और बड़े बैंकों पर अधिभार घटाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद बैंकों को सुरक्षित बनाने में जो दशक भर की मेहनत लगी, वह अब कमजोर पड़ सकती है। यह रुझान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई अन्य हिस्से नियामकीय सख्ती की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
अफ्रीकी महाद्वीप इस कड़े रुख का सबसे जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। घाना के केंद्रीय बैंक ने बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे अनधिकृत विदेशी मुद्रा वॉलेट सेवाओं, विशेषकर क्रिप्टो प्लेटफॉर्मों द्वारा संचालित अमेरिकी डॉलर वॉलेट, को समर्थन देना तुरंत बंद करें। साथ ही, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां बैंक ऑफ घाना की न्यूनतम पूंजी सीमा में ढील की मांग कर रही हैं, ताकि वित्तीय समावेशन को झटका न लगे। नाइजीरिया में केंद्रीय बैंक ने एक साथ कई मोर्चों पर कदम उठाए हैं: नाइजीरियन ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट (एनओएफआर) जैसी नई बेंचमार्क दर से मौद्रिक नीति की पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया गया, वित्तीय होल्डिंग कंपनियों के लिए सख्त स्वामित्व और पूंजी नियम प्रस्तावित किए गए, और 2027 से सभी भुगतान डेटा को स्थानीय सर्वरों पर संग्रहित करने का आदेश दिया गया। केन्या में कर प्राधिकरण की आईटैक्स प्रणाली ने पूर्व-भरित रिटर्न की जगह एक सत्यापन व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे करदाता अपने रिकॉर्ड के बजाय सरकारी आंकड़ों से मिलान करने को मजबूर हैं।
लैटिन अमेरिका में भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल रही है। अर्जेंटीना की कर एजेंसी एआरसीए ने वेतनभोगी कर्मचारियों द्वारा कपड़े और उपकरण खर्चों पर ली जाने वाली कर कटौतियों की बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। सिस्टम-आधारित क्रॉस-चेकिंग में असामान्य रूप से उच्च अनियमितताएं पकड़ी गईं, जिसके बाद हजारों करदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजे गए और जल्द नियमितीकरण का विकल्प दिया गया। यह कार्रवाई दर्शाती है कि कर अनुपालन को लेकर सरकारें अब डेटा एनालिटिक्स का आक्रामक इस्तेमाल कर रही हैं।
यह दोहरी राह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। अमेरिकी ढील से यदि प्रणालीगत जोखिम बढ़ता है, तो इसकी लहरें दक्षिण एशिया सहित उभरते बाजारों तक पहुंच सकती हैं। भारत में पहले ही भुगतान डेटा के स्थानीय भंडारण और क्रिप्टोकरेंसी पर सतर्क रुख अपनाया जा चुका है, जो अफ्रीकी देशों के कदमों से मेल खाता है। विश्लेषकों का मानना है कि नियामकीय विखंडन से पूंजी प्रवाह में अनिश्चितता बढ़ सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मजबूत निगरानी ढांचे दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं। आने वाले वर्षों में यह संतुलन और भी जटिल होगा, क्योंकि सरकारें विकास को प्रोत्साहन देने और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच रस्सी पर चल रही हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका संकट के बाद के पूंजी ढांचे को पीछे ले जा रहा है जिसने बैंकों को सुरक्षित बनाया था। मूडीज़ ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित नियामक ढील से लीवरेज बढ़ सकता है और करदाताओं को भविष्य के बेलआउट के जोखिम में डाल सकता है।
कई अफ्रीकी नियामक नियमों को सख्त कर रहे हैं: घाना माइक्रोफाइनेंस पूंजी बढ़ाता है और क्रिप्टो-लिंक्ड डॉलर वॉलेट को रोकता है, केन्या पूर्व-भरी कर रिटर्न लागू करता है, और नाइजीरिया स्थानीय डेटा भंडारण और एक नई ओवरनाइट दर लागू करता है। इन कदमों का उद्देश्य स्थिरता और अनुपालन है, हालांकि आलोचक वित्तीय समावेशन में कमी और परिचालन दबाव की चेतावनी देते हैं।
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