
इंग्लैंड में सर्वाइकल कैंसर से शून्य मौत, पौधा-आधारित आहार में एडिटिव्स की भरमार: स्वास्थ्य के नए सबूत
द लैंसेट के अध्ययन में एचपीवी टीकाकरण से युवा महिलाओं में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर की शून्य मृत्यु दर्ज, जबकि लंदन के शोध में वीगन बर्गर जैसे उत्पादों में पारंपरिक मांसाहार की तुलना में लगभग दोगुने एडिटिव्स पाए गए।
इंग्लैंड में वर्ष 2020 से 2024 के बीच 20-25 आयु वर्ग की किसी भी महिला की मृत्यु एचपीवी-संबंधित सर्वाइकल कैंसर से नहीं हुई। द लैंसेट में प्रकाशित यह जनसंख्या-स्तरीय परिणाम व्यापक टीकाकरण अभियान की दीर्घकालिक सफलता को रेखांकित करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, टीके की दो खुराकें तीन खुराकों जितनी ही प्रभावी साबित हुई हैं और कुछ मामलों में एक खुराक भी पर्याप्त हो सकती है। यह सुरक्षा केवल गर्भाशय-ग्रीवा तक सीमित नहीं है, बल्कि सिर और गर्दन के अन्य एचपीवी-जनित कैंसरों पर भी लागू होती है।
दूसरी ओर, लंदन के इंस्टीट्यूट फॉर ऑप्टिमम न्यूट्रिशन के एक तुलनात्मक विश्लेषण ने पौधा-आधारित खाद्य पदार्थों की स्वास्थ्यप्रद छवि पर प्रश्नचिह्न लगाया है। अध्ययन में पाया गया कि वीगन बर्गर, पनीर विकल्प और अन्य प्रसंस्कृत शाकाहारी उत्पादों में 199 खाद्य योजक (एडिटिव्स) मौजूद थे, जबकि पारंपरिक मांसाहारी उत्पादों में यह संख्या 100 थी। यूरोपीय संघ-अनुमोदित ‘ई’ श्रेणी के योजकों का आंकड़ा भी 39 बनाम 31 रहा। शोध के प्रमुख जोसेफ व्हिटेकर ने स्पष्ट किया कि सभी योजक सुरक्षा जांच पास कर चुके हैं, अतः इससे स्वास्थ्य जोखिम में अनिवार्य वृद्धि का दावा नहीं किया जा सकता, फिर भी यह निष्कर्ष ‘प्राकृतिक’ लेबल के पीछे छिपे अति-प्रसंस्करण की ओर इशारा करता है।
मिस्र में जन्म नियंत्रण गोलियों और कैंसर के बीच संबंध की अफवाहों को स्वास्थ्य मंत्रालय और काहिरा विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान ने सिरे से खारिज किया है। ऑन्कोलॉजिस्ट ओला खुर्शीद के अनुसार, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा यह सिद्ध करती है कि ये गोलियाँ डिम्बग्रंथि और गर्भाशय कैंसर के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। स्तन कैंसर का जोखिम उपयोग के दौरान थोड़ा बढ़ सकता है, परंतु गोलियाँ बंद करने के लगभग दस वर्षों बाद यह पूरी तरह समाप्त हो जाता है। विशेषज्ञों ने पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक उत्परिवर्तन वाली महिलाओं के लिए वैयक्तिक चिकित्सकीय परामर्श को अनिवार्य बताया है।
आहार संबंधी एक अन्य पहलू में, स्पेन की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी और रूसी आहार विशेषज्ञों ने किण्वित खाद्य पदार्थों के लाभों को रेखांकित किया है। दही, केफिर, किमची और रूसी व्यंजनों में शामिल खट्टी गोभी व नमकीन हेरिंग आंत के सूक्ष्मजीव संतुलन को सुधारते हैं, सूजन घटाते हैं और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व प्रदान करते हैं। वहीं, अर्जेंटीना की पशु चिकित्सक वालू मारिनेली ने इस मिथक को खारिज किया कि पालतू पशुओं के व्यावसायिक आहार में प्राकृतिक भोजन मिलाना हानिकारक है; उनके अनुसार यह पूर्णतः व्यक्तिगत सहनशीलता पर निर्भर करता है।
इन साक्ष्यों का वैश्विक दक्षिण, विशेषकर भारत के लिए सीधा संदेश है। सर्वाइकल कैंसर का उच्च बोझ झेल रहे देश में एचपीवी टीकाकरण का विस्तार और अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूकता दोनों ही प्राथमिकता बनने चाहिए। अगला ठोस कदम अमेरिकी राज्य अलाबामा की तर्ज पर राष्ट्रीय कैंसर उन्मूलन पहलों का क्रियान्वयन और खाद्य लेबलिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना होगा।
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