
ट्रंप ने इराकी प्रधानमंत्री को व्हाइट हाउस बुलाया: आर्थिक साझेदारी और सशस्त्र समूहों पर नियंत्रण रहेगा केंद्र में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जुलाई के मध्य में इराकी प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी की मेज़बानी करेंगे; यह उनकी पहली विदेश यात्रा होगी जिसमें आर्थिक सहयोग और ईरान समर्थित मिलिशिया का भविष्य प्रमुख मुद्दे होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी को मध्य जुलाई में व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। यह पिछले मई में सत्ता संभालने के बाद अल-ज़ैदी की पहली विदेश यात्रा होगी। बग़दाद स्थित अमेरिकी दूतावास और इराकी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मंगलवार को जारी संयुक्त वक्तव्य में बताया गया कि ट्रंप के विशेष दूत टॉम बैरक ने बग़दाद में अल-ज़ैदी से मुलाक़ात के दौरान यह निमंत्रण दिया। दोनों पक्षों ने 'साझा प्रतिबद्धता' दोहराते हुए इस रिश्ते को 'स्थायी और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी' में बदलने की इच्छा जताई।
व्हाइट हाउस की इस उच्च-स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देना होगा। इराकी सरकार के प्रवक्ता हैदर अल-अबूदी के अनुसार, प्रधानमंत्री अल-ज़ैदी अमेरिकी कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी गहराना चाहते हैं, ख़ासकर तेल क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने पर ज़ोर देंगे। इराक अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने और आंतरिक सुरक्षा मज़बूत करने के लिए वैश्विक निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश में है। यह पहल ऐसे समय हुई है जब वॉशिंगटन बग़दाद पर राज्येतर सशस्त्र समूहों—विशेषकर ईरान समर्थित मिलिशिया—को नियंत्रित करने का दबाव बढ़ा रहा है।
बैरक की बग़दाद यात्रा के दौरान सुरक्षा मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि दोनों पक्षों ने 'राज्य प्राधिकार से बाहर काम करने वाले सशस्त्र समूहों को निरस्त्र और भंग करने' पर बात की। यह इराकी धरती पर ईरान समर्थित मिलिशिया की भूमिका को लेकर लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी चिंता को रेखांकित करता है। अल-ज़ैदी ने पदभार ग्रहण करते ही ईरान के क़रीबी इन समूहों पर लगाम कसने का वादा किया था, लेकिन घरेलू राजनीतिक समीकरण इसे आसान नहीं बनाते।
दक्षिण एशिया, ख़ासकर भारत के लिए यह घटनाक्रम ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज़ से अहम है। इराक भारत को कच्चे तेल का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है, और वहाँ किसी भी तरह की अस्थिरता या अमेरिकी-ईरानी तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाज़ार पर पड़ता है। अगर व्हाइट हाउस वार्ता से इराक में निवेश का माहौल बेहतर होता है और सशस्त्र समूहों पर नियंत्रण कड़ा होता है, तो इससे न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों को भी स्थिरता मिलेगी।
आगे की राह में अल-ज़ैदी को नाज़ुक संतुलन साधना होगा—एक ओर अमेरिकी निवेश और सुरक्षा सहयोग की ज़रूरत, दूसरी ओर ईरान के प्रभाव में पली-बढ़ी राजनीतिक ताक़तें। जुलाई की यह मुलाक़ात महज़ औपचारिक नहीं होगी; इससे तय होगा कि ट्रंप प्रशासन इराक को केवल सुरक्षा सहयोगी के रूप में देखता है या एक आर्थिक भागीदार के तौर पर भी। अगर दोनों पक्ष ठोस निवेश समझौतों और मिलिशिया नियंत्रण की समयसीमा पर सहमत हो पाए, तो यह इराक के पुनर्निर्माण और पश्चिम एशिया की शक्ति संरचना में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इराकी प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा को आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को गहरा करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। रणनीतिक साझेदारी और निवेश पर जोर दिया गया है, जिसमें व्यावहारिक और व्यवसाय-उन्मुख लहजा है। सुरक्षा मुद्दे और सशस्त्र समूह पृष्ठभूमि में हैं।
व्हाइट हाउस का निमंत्रण नए इराकी प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा है, जिसमें ईरान समर्थक समूहों के हथियारों पर नियंत्रण केंद्र में है। अमेरिकी दबाव में, अल-ज़ैदी ने इन मिलिशिया को सीमित करने का वादा किया है, और यह यात्रा सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी सहित कई मुद्दों पर चर्चा करेगी। इसे इराक में तेहरान के प्रभाव को रोकने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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