
यूनेस्को की नई धरोहरें: पौराणिक पर्वत, खून के धब्बों से सने तट और अफ्रीका की प्रवासी छवियां
बुसान में यूनेस्को समिति ने यूनान के ओलिंप पर्वत, नॉरमैंडी के डी-डे समुद्रतट और जापान की आसुका-फुजिवारा प्राचीन राजधानियों सहित कई स्थलों को विश्व विरासत सूची में शामिल किया।
दक्षिण सूडान के बोमा-बादिंगिलो परिदृश्य में इस समय एक अनोखा नजारा है। छह लाख से अधिक सफेद कान वाले कोब, टियांग और मोंगला गजलें वर्षा और बाढ़ की लय के साथ विशाल दलदलों, बाढ़ के मैदानों और सवाना को पार कर रही हैं। यह पृथ्वी पर स्तनधारियों के सबसे बड़े प्रवासों में से एक है—एक ऐसा दृश्य जो अब यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में देश के पहले स्थल के रूप में अंकित हो गया है। इसी बैठक में, दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित एक सत्र के दौरान, समिति ने दुनिया भर से आए दर्जनों नामांकनों पर विचार किया और अनेक स्थानों को वैश्विक पहचान दी।
यूनान का ओलिंप पर्वत, जो 2,918 मीटर ऊंचा है और प्राचीन मिथकों में बारह ओलंपियन देवताओं का निवास माना जाता था, एक सांस्कृतिक और प्राकृतिक मिश्रित स्थल के रूप में सूची में शामिल हुआ। यूनानी प्रतिनिधि जॉर्जियोस कौमौत्साकोस ने कहा, “हम वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लाभ के लिए ओलिंप की सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।” वहीं फ्रांस के नॉरमैंडी तट पर 80 किलोमीटर से अधिक फैले वे समुद्रतट भी विरासत सूची में आ गए, जहां 6 जून 1944 को मित्र सेनाओं ने उतरकर नाजी कब्जे से पश्चिमी यूरोप को मुक्त कराने का निर्णायक अभियान शुरू किया था। यूटा, ओमाहा, गोल्ड, जूनो और स्वोर्ड नामक इन तटों पर आज भी तोपखाने की बैटरियां और स्मारक मौजूद हैं, जो उस विशाल मानवीय बलिदान की गवाही देते हैं।
जापान के नारा प्रांत में स्थित आसुका और फुजिवारा के पुरातात्विक स्थल, जो छठी से आठवीं शताब्दी के बीच प्राचीन राजधानियों के अवशेष हैं, इस सूची का हिस्सा बन गए हैं। इन उन्नीस स्थलों में आसुका महल और फुजिवारा महल के खंडहर, बौद्ध मंदिरों के अवशेष और कब्रों के टीले शामिल हैं। ताकामात्सुजुका मकबरा अपने चमकीले रंगों वाले भितिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि कितोरा मकबरे में पूर्वी एशिया का सबसे पुराना खगोलीय चार्ट मिला है। नारा विश्वविद्यालय के पुरातत्व प्रोफेसर योशियुकी आइहारा के अनुसार, ये स्थल इस बात का प्रमाण हैं कि कैसे चीन और कोरियाई प्रायद्वीप के प्रभाव से जापान का प्रारंभिक केंद्रीकृत राज्य बना।
बर्लिन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित ज़ेहलेंडॉर्फ वन बस्ती, जो पहले से मौजूद आधुनिकतावादी आवासीय परिसरों का विस्तार है, अपने रंग-बिरंगे अग्रभागों—पीले, नीले, हरे और गहरे लाल—और तीन रंगों वाली खिड़कियों के कारण ‘तोता बस्ती’ उपनाम पा चुकी है। वास्तुकार ब्रूनो टाउट ने 1920 के दशक में ‘रोशनी, हवा और धूप’ के सिद्धांत पर यहां स्वास्थ्य और सामाजिक समानता को प्राथमिकता दी थी, किंतु आज कुछ निवासी इस विरासत दर्जे से बढ़ते किराए और कड़े संरक्षण नियमों की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। इस बैठक में मध्य इटली के सामूहिक स्वामित्व वाले ‘कंडोमिनियल’ थिएटर, फिनलैंड के अल्वार आल्टो के आधुनिकतावादी भवन-समूह और ईरान के अलामुत किले को भी सूची में शामिल किया गया।
विश्व विरासत समिति के निर्णय अतीत की गाथाओं और वर्तमान की चिंताओं के बीच एक सेतु का काम करते हैं। जहां ओलिंप के तल पर बसे दिओन-ओलिंपस के महापौर इवांगेलोस गेरोलिओलियोस पर्यटन के दबाव को लेकर “हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है” कह रहे थे, वहीं नॉरमैंडी के क्षेत्रीय अध्यक्ष हेर्वे मोरिन यह दोहरा रहे थे कि “यह निर्णय हमें इस विरासत को सहेजने, संरक्षित करने और और अधिक संजोने के लिए बाध्य करता है।” बोमा-बादिंगिलो के दलदलों में अब भी हजारों गजलें चर रही हैं, और ज़ेहलेंडॉर्फ की रंगीन बालकनियों पर हल्की धूप पड़ रही है—ये सब मिलकर यह याद दिलाते हैं कि विरासत महज अतीत का संग्रह नहीं, एक जीवंत नाता है जो हर पीढ़ी के साथ नए अर्थ गढ़ता है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.40 | aligned |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.20 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.30 | aligned |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.30 | aligned |
Europe celebrates the inscription of its iconic sites on the UNESCO list, recognizing their universal value.
Through a solemn and descriptive tone, the coverage presents European sites as bearers of universal values, legitimizing their candidacy with historical weight.
The recognition of South Sudan's first site is omitted, which would have broadened the global perspective.
The UNESCO committee has included the D-Day beaches and Mount Olympus, expanding the World Heritage list.
By presenting facts without emphasis, the Anglophone coverage normalizes the UNESCO decision-making process, avoiding any triumphalist tone.
The mythological significance of Mount Olympus is not explored, reducing the narrative to a mere bureaucratic event.
UNESCO adds sites from around the world, demonstrating commitment to cultural and natural diversity.
By listing sites from multiple continents, Gulf coverage emphasizes UNESCO's inclusiveness, balancing attention between Western and non-Western areas.
The mythological detail of Mount Olympus is omitted, favoring a geographical and historical description.
UNESCO recognizes the Japanese archaeological sites as a testimony to the formation of a centralized state, celebrating national heritage.
By selecting and highlighting Asian sites, Southeast Asian coverage constructs a narrative of historical legitimacy for regional nations.
The extension of Berlin's heritage is not mentioned, focusing instead on Asian archaeological sites.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
कैस्पियन सागर में ईरानी जहाज पर यूक्रेनी हमला: तेहरान ने चेतावनी दी, 'जवाब अवश्य मिलेगा'
5 भाषाएँ · 12 स्रोत
Economy & Markets सेCXMT की ऐतिहासिक शेयर बिक्री: चीनी चिप निर्माता 466% उछला, बना मुख्यभूमि चीन की सबसे मूल्यवान कंपनी
8 भाषाएँ · 15 स्रोत
Technology सेAI की मांग से बढ़ी मेमोरी की कीमतें, 100 डॉलर वाले स्मार्टफोन का बाजार खत्म होने की कगार पर
4 भाषाएँ · 6 स्रोत