
वैश्विक वृद्धि दर घटकर 3% पर, मुद्रास्फीति बढ़ी: IMF ने ऊर्जा संकट को ठहराया जिम्मेदार
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 3.0% कर दिया, जबकि मुद्रास्फीति 4.7% तक पहुंचने की आशंका जताई है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने जुलाई 2026 की अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक तस्वीर पेश की है। संस्था ने वर्ष 2026 के लिए विश्व आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 3.1% से घटाकर 3.0% कर दिया, जो इस वर्ष का दूसरा संशोधन है। इसके विपरीत, वैश्विक मुद्रास्फीति दर का पूर्वानुमान 4.1% से बढ़ाकर 4.7% कर दिया गया। IMF के अनुसार, इस बदलाव का प्रमुख कारण मध्य पूर्व में पुनः भड़के संघर्ष के चलते ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल है। कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर से लगभग 25% अधिक बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक व्यापार वृद्धि दर 2025 के 5.0% से गिरकर 2026 में 3.5% रह जाने का अनुमान है।
वैश्विक मंदी का प्रभाव सभी क्षेत्रों पर एक समान नहीं पड़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े हार्डवेयर उत्पादक देश, जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और मलेशिया, इस तकनीकी मांग के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। दक्षिण कोरिया की पहली तिमाही की वृद्धि दर 7.5% रही, जो IMF के पूर्व अनुमान से चार गुना अधिक है। इसके विपरीत, ऊर्जा आयातक और AI आपूर्ति श्रृंखला से बाहर के देश सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। सऊदी अरब की वृद्धि दर का अनुमान 1.4% घटाकर मात्र 1.7% कर दिया गया, जबकि मध्य पूर्व और मध्य एशिया क्षेत्र की कुल वृद्धि दर 0.7% रहने का अनुमान है। दक्षिण एशिया के लिए यह परिदृश्य चिंताजनक है, क्योंकि भारत सहित अधिकांश देश ऊर्जा के शुद्ध आयातक हैं और AI हार्डवेयर निर्यात में उनकी सीमित भागीदारी है।
इस वैश्विक दबाव के बीच, विभिन्न केंद्रीय बैंकों ने सतर्क रुख अपनाया है। ब्राजील में वित्तीय बाजार ने लगातार चौथे सप्ताह 2026 की मुद्रास्फीति दर का अनुमान घटाकर 5.12% कर दिया, जो चार सप्ताह पहले 5.33% था। इसके बावजूद, ब्राजील की मुद्रास्फीति 3% के लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है और बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक अगस्त की बैठक में ब्याज दर में एक और कटौती कर सकता है। घाना में बैंक ऑफ घाना ने नीतिगत दर 14% पर स्थिर रखी, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर में इसे घटाकर 12-13% किया जा सकता है, क्योंकि हालिया मुद्रास्फीति वृद्धि को लक्ष्य गलियारे की ओर सामान्यीकरण माना जा रहा है। नाइजीरिया में केंद्रीय बैंक ने लगातार दूसरी बार दर 26.5% पर रखी, हालांकि जून में मुद्रास्फीति मामूली रूप से घटकर 15.91% हो गई। विशेषज्ञों ने चेताया कि उच्च ब्याज दरें छोटे व्यवसायों को प्रभावित कर रही हैं और समावेशी विकास के लिए दर स्थिरता आवश्यक है।
भारत के लिए यह वैश्विक परिदृश्य दोहरी चुनौती प्रस्तुत करता है। एक ओर, ऊर्जा की ऊंची कीमतें आयात बिल बढ़ाकर चालू खाता घाटे पर दबाव डाल सकती हैं, वहीं दूसरी ओर वैश्विक मांग में कमी निर्यात को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, AI-संचालित सेवा निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति कुछ राहत प्रदान कर सकती है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव अगस्त के पहले सप्ताह में ब्राजील के केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति बैठक और सितंबर में घाना की बैठक होगी, जबकि वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | 0.00 | neutral |
ब्राज़ील का बाजार मुद्रास्फीति के अनुमानों को नीचे की ओर संशोधित करता है, यह दर्शाता है कि मध्य पूर्व युद्ध घरेलू विश्वास को कम नहीं करता है।
फोकस सर्वेक्षण की साप्ताहिक गिरावट को बार-बार उद्धृत करके, कथा स्थिर सुधार की भावना पैदा करती है और बाहरी जोखिमों को स्थानीय परिस्थितियों के लिए अप्रासंगिक बताकर कम करती है।
IMF के वैश्विक विकास पूर्वानुमान में कटौती और मध्य पूर्व संघर्ष से स्पष्ट संबंध को छोड़ दिया गया है, क्योंकि कथा अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों पर घरेलू बाजार की भावना को प्राथमिकता देती है।
अफ्रीकी केंद्रीय बैंक अपने रास्ते पर बने रहते हैं: क्रमिक कटौती और स्थिरता, वैश्विक तनावों से प्रभावित हुए बिना।
दर निर्णयों को डेटा-संचालित बताकर और मुद्रास्फीति में वृद्धि को संरचनात्मक बताकर सामान्यीकृत करके, कथा घरेलू मौद्रिक नीति को वैश्विक मुद्रास्फीति झटके से अलग करती है।
IMF की चेतावनी उभरते बाजारों के विचलन और मध्य पूर्व संघर्ष के ऊर्जा कीमतों पर सीधे प्रभाव के बारे में संबोधित नहीं की गई है; इसके बजाय, ध्यान स्थानीय मुद्रास्फीति रुझानों और केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता पर है।
IMF पुष्टि करता है: मध्य पूर्व संघर्ष वैश्विक मुद्रास्फीति और विकास मंदी का चालक है।
IMF की रिपोर्ट को आधिकारिक बताकर और तेल की कीमत में 25% की वृद्धि को उजागर करके, कथा क्षेत्रीय युद्ध और वैश्विक आर्थिक गिरावट के बीच एक सीधा कारण संबंध स्थापित करती है, जिससे संघर्ष की केंद्रीयता मजबूत होती है।
कथा ईरान की घरेलू आर्थिक स्थितियों या संघर्ष से ईरान पर पड़ने वाले प्रभाव की किसी भी चर्चा को छोड़ देती है; यह पूरी तरह से वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित है, संभवतः संघर्ष के बाहरी परिणामों पर जोर देने के लिए।
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