
बहरीन और कुवैत ने ईरान पर पहली बार सीधे हमले किए: खाड़ी क्षेत्र में बदलते सैन्य समीकरण
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात की खुफिया मदद से बहरीन और कुवैत ने ईरानी ड्रोन-मिसाइल ठिकानों पर हमले किए, जो लंबे युद्ध के दबाव में अरब देशों की बढ़ती सैन्य सहभागिता दर्शाता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन और कुवैत ने जुलाई के पहले सप्ताह में गुप्त रूप से लड़ाकू विमानों को ईरानी सैन्य ठिकानों पर भेजा। यह पहली बार था जब इन दो खाड़ी देशों ने ईरान के खिलाफ सीधी जवाबी कार्रवाई की। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इन हमलों में ड्रोन और मिसाइल भंडारण केंद्रों के साथ-साथ अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुफिया जानकारी और रक्षात्मक हवाई कवर उपलब्ध कराया, जिसे क्षेत्र में अरब देशों के बीच उभरते सैन्य समन्वय का संकेत माना जा रहा है।
खाड़ी देशों की दुविधा इस युद्ध के लंबा खिंचने से गहराई है। WSJ के अनुसार, बहरीन और कुवैत पर ईरान लगातार हमले कर रहा था, विशेषकर इसलिए क्योंकि ये देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करते हैं। कुवैत ने फरवरी 2026 से अब तक 170 से अधिक मिसाइलों और 380 ड्रोन को रोकने का दावा किया, जबकि 27 सैनिक घायल हुए। ईरान ने हाल के हफ्तों में कुवैत के बिजली संयंत्र और जल-शोधन सुविधा को भी निशाना बनाया। इसके विपरीत, यूएई ने युद्ध के शुरुआती चरण में ईरान पर कई हमले किए थे, लेकिन अब वह सार्वजनिक रूप से तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की वकालत करता है, जो खाड़ी देशों के लिए महत्वपूर्ण तेल निर्यात मार्ग है। सऊदी अरब ने भी प्रारंभिक हमलों में भाग लिया था, लेकिन अब अपनी स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है। वहीं, ओमान और कतर लंबे समय से ईरान और पश्चिम के बीच संतुलन बनाने की नीति पर चल रहे हैं और उन्होंने सीधे टकराव से दूरी बनाए रखी है।
विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध का लंबा खिंचना खाड़ी देशों के लिए सबसे बुरा परिदृश्य है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की मध्य-पूर्व विश्लेषक दीना एस्फांदियारी के अनुसार, "ऐसी स्थिति इन देशों को स्थिरता के प्रतीक के रूप में अपनी छवि बनाए रखने का मौका नहीं देती, जो उनकी अर्थव्यवस्थाओं के मॉडल को ही प्रभावित करता है।" WSJ की रिपोर्ट बताती है कि बहरीन और कुवैत के छोटे वायुसेना बेड़े, जो अमेरिकी और यूरोपीय विमानों से लैस हैं, ने दिखाया कि वे बिना जवाब के हमले सहने को तैयार नहीं हैं। यह रवैया खाड़ी क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा सोच में बदलाव का संकेत देता है, जहां छोटे देश भी अब सक्रिय सैन्य भूमिका अपना रहे हैं।
यह संघर्ष 2026 की शुरुआत से जारी है, जिसमें ईरान ने कई खाड़ी देशों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। WSJ के अनुसार, बहरीन में अमेरिकी बेस की मरम्मत पर लगभग 40 करोड़ डॉलर खर्च होने का अनुमान है, जबकि क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों को कुल 2.2 से 5.1 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचा है। बहरीन और कुवैत की सरकारों ने हमलों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यूएई ने एक बयान में बहरीन और कुवैत के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए उनकी सुरक्षा और स्थिरता के लिए सभी उपायों के समर्थन की बात दोहराई। ईरानी उप-विदेश मंत्री ने एक संदेश में यूरोप से राजनयिक पहल की अपील की, न कि आक्रामक ताकतों के पीछे चलने की। मामले की पुष्टि के लिए अभी स्वतंत्र स्रोतों से पुख्ता जानकारी नहीं मिली है, लेकिन रिपोर्ट क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में हो रहे गहरे बदलाव की ओर इशारा करती है।
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