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रक्षा एवं सुरक्षासोमवार, 22 जून 2026

चीन की लगातार नौसैनिक गश्त के बीच ताइवान ने शुरू किया पांच दिवसीय युद्ध तत्परता अभ्यास

ताइवान की सेना ने वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में त्वरित तैनाती का परीक्षण शुरू किया, जबकि चीन ने द्वीप के चारों ओर 100 से अधिक जहाजों के साथ अभ्यास किया और अमेरिका ने निगरानी ड्रोन की पहली खेप पहुंचाई।

ताइवान ने 22 जून को पांच दिवसीय ‘तत्काल युद्ध तत्परता अभ्यास’ शुरू किया, जिसके तहत ताओयुआन शहर में टैंक और बख्तरबंद वाहन सड़कों पर उतारे गए। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य यह परखना है कि सैन्य इकाइयां शांतिकाल से युद्धकाल की स्थिति में कितनी तेजी से तैनात हो सकती हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने रविवार को वर्ष का अपना दूसरा ‘दीर्घ-दूरी समुद्री प्रशिक्षण मिशन’ पूरा किया, और मई के अंत में 100 से अधिक चीनी नौसैनिक जहाजों ने ताइवान के चारों ओर ‘संयुक्त गश्त’ और ‘युद्ध तत्परता गश्त’ की थी। ताइवानी अधिकारियों का कहना है कि चीनी वायु और नौसैनिक अभियानों की बढ़ती आवृत्ति ने शांति और युद्ध के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है, जिससे संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम हो गया है।

चीन की सरकार ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानती है और इन सैन्य गतिविधियों को नियमित संप्रभुता अभ्यास बताती है, जबकि ताइवान का रक्षा मंत्रालय इन्हें उकसावे की कार्रवाई के रूप में देखता है। ताइवान ने इसी महीने आरक्षित सैनिकों के प्रशिक्षण प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए सभी रिजर्विस्टों के लिए 14-दिवसीय गहन प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है, जो पहले दोहरे विकल्प पर आधारित थी। अमेरिका ने इसी दौरान चार एमक्यू-9बी स्काईगार्डियन ड्रोन में से पहली खेप ताइवान पहुंचाई है, जिनका उपयोग मुख्यतः युद्धक्षेत्र खुफिया जानकारी और निगरानी के लिए होगा। ताइवानी रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इन ड्रोनों का गहरा मूल्य अमेरिकी सैन्य प्रणालियों के साथ अंतःसंचालनीयता में है, जिससे ताइवान, अमेरिका और जापान के बीच वास्तविक समय में खुफिया साझेदारी संभव होगी। चीन अमेरिकी हथियार आपूर्ति को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और ‘लाल रेखा’ पार करने जैसा कृत्य मानता है।

अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल चाइना हब के विश्लेषकों के अनुसार, चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति ‘ग्रे ज़ोन’ रणनीति का हिस्सा है—बार-बार छोटे स्तर की मुखर कार्रवाइयां जो ताइवान की सुरक्षा तंत्र और अंतरराष्ट्रीय जनमत को धीरे-धीरे सुन्न कर देती हैं, और बिना खुले संघर्ष के यथास्थिति बदल देती हैं। यह पैटर्न दक्षिण चीन सागर में चीन की पूर्ववर्ती कार्रवाइयों से मिलता-जुलता है, जहां पहले नागरिक बुनियादी ढांचा खड़ा किया गया और बाद में सैन्य तैनाती की गई। इल जियोर्नेल में उद्धृत विश्लेषक यह संभावना भी जताते हैं कि हाल की उच्च आवृत्ति वाली नौसैनिक गतिविधियां केवल अर्धवार्षिक अभ्यास न होकर दीर्घकालिक घेराबंदी अभियान की शुरुआत हो सकती हैं। वहीं, पेंटागन के आकलन के अनुसार, चीन ने अपने प्रशिक्षण मैदानों पर ताइवानी सरकारी भवनों के मॉक-अप बनाकर ‘डिकैपिटेशन’ (नेतृत्व पर त्वरित कब्जे) के परिदृश्यों का अभ्यास किया है, जो सैन्य तैयारी की गंभीरता को दर्शाता है।

चीन ने 2049 तक ताइवान के ‘पुनर्मिलन’ का लक्ष्य रखा है और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने की बात करते हुए भी बल प्रयोग के विकल्प को खारिज नहीं किया है। ताइवान का वार्षिक हान कुआंग अभ्यास, जो एक बड़ा क्षेत्रीय युद्धाभ्यास है, 22 जुलाई को निर्धारित है; वर्तमान अभ्यास उसी की पूर्व तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। शेष एमक्यू-9बी ड्रोन अगले वर्ष ताइवान पहुंचने की उम्मीद है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव व्यापक हिंद-प्रशांत शक्ति प्रतिस्पर्धा को रेखांकित करता है, जहां समुद्री विवादों में इसी प्रकार की ग्रे ज़ोन रणनीति देखी जाती है, और यह क्षेत्रीय व्यापार व सुरक्षा को बाधित करने वाले संभावित संघर्ष की निगरानी की आवश्यकता को बल देता है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

50%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
चेतावनीअत्यावश्यकतासंदेह

चीन की लगातार नौसैनिक गश्त को ताइवान पर धीरे-धीरे कब्ज़ा करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, न कि केवल अभ्यास। ताइवान पाँच दिवसीय युद्ध तत्परता अभ्यास के साथ जवाब दे रहा है ताकि आक्रमण की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया का परीक्षण किया जा सके, और नए निगरानी ड्रोन उसकी सुरक्षा को मज़बूत कर रहे हैं।

रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
उदासीनताव्यावहारिकता

ताइवान ने चीन द्वारा स्थिति बिगड़ने की स्थिति में युद्ध तत्परता बढ़ाने के लिए पाँच दिवसीय अभ्यास शुरू किया, जैसा कि समाचार एजेंसियों ने बताया। रूसी मीडिया सैनिकों और बख्तरबंद वाहनों की गतिविधियों का तटस्थ और तथ्यात्मक वर्णन करता है, बिना कोई राय जोड़े।

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ईरान में मौसम विभाग की नारंगी चेतावनी: तेज़ हवाएँ, ऊंची लहरें और धूल भरी आंधी का अनुमान·होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य पर ईरान-अरब वार्ता की तैयारी, रियाद बनेगा मेज़बान·याब्लोको पार्टी पर कानूनी कार्रवाई तेज़: उपाध्यक्ष को सात साल की सज़ा, कार्यकर्ता पर जुर्माना·अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता अगले सप्ताह फिर शुरू: पाकिस्तान की मध्यस्थता में परमाणु, हरमुज़ और लेबनान पर बातचीत·कुवैत में अमेरिकी दूतावास तीन महीने बाद फिर खुला, ईरान समझौते के बीच खाड़ी सहयोगियों को आश्वस्त करने की कवायद·ट्रंप-नेतन्याहू के बीच तनाव का खुलासा: नई किताब में फोन कॉल की विस्फोटक बातचीत सामने·विश्व कप 2026: सात टीमें अंतिम-32 में, पांच बाहर; 495 संभावनाओं का जटिल समीकरण बाकी·अमेरिका और रूस में आगजनी की घटनाओं में युवा आरोपी: बेघरों पर हमले से रेलवे तोड़फोड़ तक·ईरान में मौसम विभाग की नारंगी चेतावनी: तेज़ हवाएँ, ऊंची लहरें और धूल भरी आंधी का अनुमान·होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य पर ईरान-अरब वार्ता की तैयारी, रियाद बनेगा मेज़बान·याब्लोको पार्टी पर कानूनी कार्रवाई तेज़: उपाध्यक्ष को सात साल की सज़ा, कार्यकर्ता पर जुर्माना·अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता अगले सप्ताह फिर शुरू: पाकिस्तान की मध्यस्थता में परमाणु, हरमुज़ और लेबनान पर बातचीत·कुवैत में अमेरिकी दूतावास तीन महीने बाद फिर खुला, ईरान समझौते के बीच खाड़ी सहयोगियों को आश्वस्त करने की कवायद·ट्रंप-नेतन्याहू के बीच तनाव का खुलासा: नई किताब में फोन कॉल की विस्फोटक बातचीत सामने·विश्व कप 2026: सात टीमें अंतिम-32 में, पांच बाहर; 495 संभावनाओं का जटिल समीकरण बाकी·अमेरिका और रूस में आगजनी की घटनाओं में युवा आरोपी: बेघरों पर हमले से रेलवे तोड़फोड़ तक·
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सोमवार, 22 जून 2026

चीन की लगातार नौसैनिक गश्त के बीच ताइवान ने शुरू किया पांच दिवसीय युद्ध तत्परता अभ्यास

ताइवान की सेना ने वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में त्वरित तैनाती का परीक्षण शुरू किया, जबकि चीन ने द्वीप के चारों ओर 100 से अधिक जहाजों के साथ अभ्यास किया और अमेरिका ने निगरानी ड्रोन की पहली खेप पहुंचाई।

ताइवान ने 22 जून को पांच दिवसीय ‘तत्काल युद्ध तत्परता अभ्यास’ शुरू किया, जिसके तहत ताओयुआन शहर में टैंक और बख्तरबंद वाहन सड़कों पर उतारे गए। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य यह परखना है कि सैन्य इकाइयां शांतिकाल से युद्धकाल की स्थिति में कितनी तेजी से तैनात हो सकती हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने रविवार को वर्ष का अपना दूसरा ‘दीर्घ-दूरी समुद्री प्रशिक्षण मिशन’ पूरा किया, और मई के अंत में 100 से अधिक चीनी नौसैनिक जहाजों ने ताइवान के चारों ओर ‘संयुक्त गश्त’ और ‘युद्ध तत्परता गश्त’ की थी। ताइवानी अधिकारियों का कहना है कि चीनी वायु और नौसैनिक अभियानों की बढ़ती आवृत्ति ने शांति और युद्ध के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है, जिससे संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम हो गया है।

चीन की सरकार ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानती है और इन सैन्य गतिविधियों को नियमित संप्रभुता अभ्यास बताती है, जबकि ताइवान का रक्षा मंत्रालय इन्हें उकसावे की कार्रवाई के रूप में देखता है। ताइवान ने इसी महीने आरक्षित सैनिकों के प्रशिक्षण प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए सभी रिजर्विस्टों के लिए 14-दिवसीय गहन प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है, जो पहले दोहरे विकल्प पर आधारित थी। अमेरिका ने इसी दौरान चार एमक्यू-9बी स्काईगार्डियन ड्रोन में से पहली खेप ताइवान पहुंचाई है, जिनका उपयोग मुख्यतः युद्धक्षेत्र खुफिया जानकारी और निगरानी के लिए होगा। ताइवानी रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इन ड्रोनों का गहरा मूल्य अमेरिकी सैन्य प्रणालियों के साथ अंतःसंचालनीयता में है, जिससे ताइवान, अमेरिका और जापान के बीच वास्तविक समय में खुफिया साझेदारी संभव होगी। चीन अमेरिकी हथियार आपूर्ति को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और ‘लाल रेखा’ पार करने जैसा कृत्य मानता है।

अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल चाइना हब के विश्लेषकों के अनुसार, चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति ‘ग्रे ज़ोन’ रणनीति का हिस्सा है—बार-बार छोटे स्तर की मुखर कार्रवाइयां जो ताइवान की सुरक्षा तंत्र और अंतरराष्ट्रीय जनमत को धीरे-धीरे सुन्न कर देती हैं, और बिना खुले संघर्ष के यथास्थिति बदल देती हैं। यह पैटर्न दक्षिण चीन सागर में चीन की पूर्ववर्ती कार्रवाइयों से मिलता-जुलता है, जहां पहले नागरिक बुनियादी ढांचा खड़ा किया गया और बाद में सैन्य तैनाती की गई। इल जियोर्नेल में उद्धृत विश्लेषक यह संभावना भी जताते हैं कि हाल की उच्च आवृत्ति वाली नौसैनिक गतिविधियां केवल अर्धवार्षिक अभ्यास न होकर दीर्घकालिक घेराबंदी अभियान की शुरुआत हो सकती हैं। वहीं, पेंटागन के आकलन के अनुसार, चीन ने अपने प्रशिक्षण मैदानों पर ताइवानी सरकारी भवनों के मॉक-अप बनाकर ‘डिकैपिटेशन’ (नेतृत्व पर त्वरित कब्जे) के परिदृश्यों का अभ्यास किया है, जो सैन्य तैयारी की गंभीरता को दर्शाता है।

चीन ने 2049 तक ताइवान के ‘पुनर्मिलन’ का लक्ष्य रखा है और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने की बात करते हुए भी बल प्रयोग के विकल्प को खारिज नहीं किया है। ताइवान का वार्षिक हान कुआंग अभ्यास, जो एक बड़ा क्षेत्रीय युद्धाभ्यास है, 22 जुलाई को निर्धारित है; वर्तमान अभ्यास उसी की पूर्व तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। शेष एमक्यू-9बी ड्रोन अगले वर्ष ताइवान पहुंचने की उम्मीद है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए, ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव व्यापक हिंद-प्रशांत शक्ति प्रतिस्पर्धा को रेखांकित करता है, जहां समुद्री विवादों में इसी प्रकार की ग्रे ज़ोन रणनीति देखी जाती है, और यह क्षेत्रीय व्यापार व सुरक्षा को बाधित करने वाले संभावित संघर्ष की निगरानी की आवश्यकता को बल देता है।

स्रोतों में मतभेद

रक्षा एवं सुरक्षा · 3 स्रोत · 3 भाषाएँ

50%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र50%
निंदक50%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
चेतावनीअत्यावश्यकतासंदेह

चीन की लगातार नौसैनिक गश्त को ताइवान पर धीरे-धीरे कब्ज़ा करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, न कि केवल अभ्यास। ताइवान पाँच दिवसीय युद्ध तत्परता अभ्यास के साथ जवाब दे रहा है ताकि आक्रमण की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया का परीक्षण किया जा सके, और नए निगरानी ड्रोन उसकी सुरक्षा को मज़बूत कर रहे हैं।

रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
उदासीनताव्यावहारिकता

ताइवान ने चीन द्वारा स्थिति बिगड़ने की स्थिति में युद्ध तत्परता बढ़ाने के लिए पाँच दिवसीय अभ्यास शुरू किया, जैसा कि समाचार एजेंसियों ने बताया। रूसी मीडिया सैनिकों और बख्तरबंद वाहनों की गतिविधियों का तटस्थ और तथ्यात्मक वर्णन करता है, बिना कोई राय जोड़े।

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