
रूस में चुनावी इंटरनेट प्रतिबंध की चेतावनी, कोलंबिया में विदेशी मतदान शुरू
रूसी चुनाव आयोग प्रमुख ने सितंबर मतदान के दौरान सुरक्षा कारणों से इंटरनेट कटौती को उचित ठहराया, जबकि कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के लिए प्रवासी मतदान जारी है।
रूस की केंद्रीय चुनाव आयोग (सीआईके) की अध्यक्ष एला पाम्फिलोवा ने सितंबर 2026 में होने वाले संसदीय और क्षेत्रीय चुनावों से पहले देश में इंटरनेट और मोबाइल संचार सेवाओं पर संभावित प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ये कदम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ड्रोन हमलों का खतरा बढ़ गया है। पाम्फिलोवा ने जनता से अपील की कि वे 'शिकायत न करें', क्योंकि 'इंटरनेट न मिलने और लोगों की जान बचाने' के बीच चुनाव स्पष्ट है। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने सीमित कनेक्टिविटी के बावजूद दूरस्थ इलेक्ट्रॉनिक मतदान (डीईजी) करना सीख लिया है और मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त वाई-फाई प्वाइंट लगाए जाएंगे।
इस बार के चुनाव असाधारण पैमाने पर होंगे: राज्य ड्यूमा की 450 सीटों के अलावा 2,200 से अधिक स्थानीय अभियानों में 20,700 से ज्यादा जनादेश भरे जाएंगे। पाम्फिलोवा ने स्वीकार किया कि सामाजिक माहौल चुनौतीपूर्ण है—लोग थके हुए हैं, मोहभंग और अवसाद के तत्व मौजूद हैं, और न्याय की भावना पहले से कहीं अधिक तीव्र है। ऐसे में नौकरशाही या लापरवाही पर तीखी प्रतिक्रिया हो सकती है। पहली बार मतदान करने वाले 16 लाख से अधिक युवाओं को जोड़ने की चुनौती भी सामने है। सुरक्षा के मद्देनज़र सभी मतदान विधियों—जिनमें अग्रिम मतदान और बाह्य-क्षेत्रीय केंद्र शामिल हैं—का इस्तेमाल किया जाएगा। डीईजी की सुविधा अधिकतम 33 क्षेत्रों में उपलब्ध होगी। वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने के लिए सरकार श्वेत सूची में सभी बैंकों को शामिल करने पर विचार कर रही है, जिससे इंटरनेट प्रतिबंधों के दौरान भी बैंकिंग ऐप काम कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, रूस 150 से अधिक देशों में 300 से ज्यादा मतदान केंद्र खोलने की योजना बना रहा है, लेकिन पाम्फिलोवा ने संकेत दिया कि हर देश के साथ संबंधों और वहां की स्थिति के अनुसार विदेशी मतदान की संभावनाओं को समायोजित किया जाएगा। सीआईके ने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के स्वागत के लिए एक समन्वय कार्यदल भी गठित किया है, हालांकि सदस्यों ने 'अमित्र देशों' से दबाव और हमलों की आशंका जताई है। इसके विपरीत, कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के लिए विदेशों में मतदान 14 जून से शुरू हो गया। वहां 67 देशों में 14 लाख से अधिक प्रवासी कोलंबियाई मतदान करने के पात्र हैं, जिसमें अमेरिका, स्पेन और वेनेज़ुएला सबसे बड़े केंद्र हैं। कोलंबिया का यह कदम दिखाता है कि कैसे कुछ लोकतंत्र प्रवासी मतदान को सुगम बना रहे हैं, जबकि रूस सुरक्षा चिंताओं के चलते प्रतिबंधों पर जोर दे रहा है।
पाम्फिलोवा ने इन चुनावों को 'स्थिरता और देश की मजबूती का बिंदु' बनाने का लक्ष्य रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा खतरों, जनता की थकान और बाहरी दबाव के बीच यह रूसी चुनाव प्रणाली की बड़ी परीक्षा होगी। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, जहां भारत जैसे देशों में इलेक्ट्रॉनिक मतदान और प्रवासी मतदान पर बहस जारी है, रूस और कोलंबिया के ये विपरीत अनुभव प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी के बीच संतुलन साधने की जटिलता को रेखांकित करते हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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केंद्रीय चुनाव आयोग की अध्यक्ष ने समझाया कि मतदान के दौरान कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों, जिनमें ड्रोन का खतरा भी शामिल है, से इंटरनेट और संचार पर प्रतिबंध लग सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे शिकायत न करें और अस्थायी असुविधा को जीवन बचाने के मुकाबले तौलें। इन कदमों को मनमाने प्रतिबंध नहीं, बल्कि आवश्यक और उचित बताया गया।
रूसी चुनाव प्रमुख ने स्वीकार किया कि मतदान के दौरान इंटरनेट और अन्य संचार सेवाएं काटी जा सकती हैं, और नागरिकों से शिकायत न करने को कहा। चुपचाप स्वीकार करने के इस आह्वान को सत्तावादी सूचना नियंत्रण और संभावित धोखाधड़ी का संकेत माना जा रहा है। ध्यान चुनावी पारदर्शिता की चिंता और डिजिटल अधिकारों पर अंकुश पर है।
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