
ईरान में खामेनेई की अंत्येष्टि चार जुलाई से, छह दिन चलेगा राष्ट्रीय आयोजन
युद्धविराम और आर्थिक विरोध के बीच ईरान पूर्व सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि दे रहा है, जिसमें करोड़ों लोगों के शामिल होने का अनुमान है।
ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की राजकीय अंत्येष्टि चार जुलाई से शुरू होकर छह दिनों तक चलेगी, जिसमें तेहरान, क़ोम, मशहद और इराक के नजफ़ व करबला में कार्यक्रम आयोजित होंगे। यह आयोजन उनकी मृत्यु के चार महीने से अधिक समय बाद हो रहा है, जो 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमले के पहले दिन उनके आवास पर बमबारी में हुई थी। युद्ध के कारण मार्च में टलने वाली यह अंत्येष्टि अब अमेरिका और इजरायल के साथ नाजुक युद्धविराम के बीच हो रही है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य 'राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक घटकों के बीच राष्ट्रीय एकता और सामंजस्य को मार्गदर्शक की केंद्रीय भूमिका के इर्द-गिर्द मजबूत करना' है। तेहरान प्रशासन को अकेले राजधानी में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिसके लिए तीन दिन का सार्वजनिक अवकाश और व्यापक यातायात प्रतिबंध लगाए गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया है कि लगभग तीस देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, लेकिन यूरोपीय देशों को आमंत्रित नहीं किया गया है, क्योंकि वे युद्ध के दौरान 'इतिहास के सही पक्ष' पर नहीं खड़े थे। वहीं, अरब मीडिया रिपोर्टों में इस विलंब को लेकर नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं और आलोचकों द्वारा भागीदारी का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया गया है।
यह अंत्येष्टि ईरानी शासन के लिए एक बड़ी लामबंदी की परीक्षा है, जो पिछले छह महीनों में महंगाई और सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद आयोजित हो रही है। राजकीय टेलीविजन पर खामेनेई पर वृत्तचित्रों का प्रसारण और भीषण गर्मी को लेकर जागरूकता संदेश इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर प्रयासरत है। इराकी अधिकारियों ने भी नजफ़ और करबला में शोक जुलूसों की पुष्टि की है, जिससे यह आयोजन एक क्षेत्रीय आयाम ले रहा है। दक्षिण एशियाई कूटनीतिक हलकों में इसे ईरान की आंतरिक स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन की कसौटी के रूप में देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
खामेनेई ने लगभग चार दशकों तक ईरान का नेतृत्व किया और उनकी मृत्यु युद्ध के पहले ही दिन हुई, जिसने देश को एक जटिल राजनीतिक और सैन्य स्थिति में डाल दिया। उनके बेटे मोजतबा को मार्च की शुरुआत में विशेषज्ञ परिषद द्वारा सर्वोच्च नेता चुना गया, लेकिन वे तब से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस चयन को 'अस्वीकार्य' बताया था। अब अंतिम संस्कार के बाद नौ जुलाई को मशहद में इमाम रज़ा के मकबरे में दफ़न की प्रक्रिया पूरी होगी, जिसके साथ ही ईरानी नेतृत्व के नए अध्याय की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Iran celebrates the Supreme Leader with a six-day funeral that unites the nation in reverence and defiance toward the outside. The event is presented as a proof of the regime's strength, turning mourning into an opportunity to reaffirm sovereignty and resistance against foreign threats.
Khamenei's funeral is seen as a propaganda display to consolidate the regime's power, raising alarm over nuclear and regional implications. Mass participation is interpreted as a sign of authoritarian control rather than genuine mourning.
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