
पोप लियो चौदहवें ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया, शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में होगा औपचारिक हस्ताक्षर
वैटिकन के पोप ने मध्य पूर्व युद्ध समाप्त करने के अंतरिम समझौते पर ईश्वर का आभार जताया, पाकिस्तान की मध्यस्थता में बर्गनश्टोक में शुक्रवार को समझौता ज्ञापन पर दस्तखत होंगे।
वैटिकन सिटी स्थित कास्तेल गंदोल्फो में मंगलवार शाम पोप लियो चौदहवें ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "ईश्वर का शुक्र है।" पोप ने पत्रकारों से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों शक्तियां शुक्रवार को अपने समझौते को औपचारिक रूप देने जा रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी भी कई मुद्दे सुलझाने बाकी हैं, लेकिन युद्ध की ओर लौटने के बजाय बातचीत और संवाद के जरिए समाधान निकालना हमेशा बेहतर होता है। पोप ने उम्मीद जताई कि यह समझौता वास्तव में युद्ध का अंत करेगा और दुनिया आगे बढ़ सकेगी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पोप और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच महीनों से चले आ रहे वैचारिक टकराव की पृष्ठभूमि ताजा है। अप्रैल में पोप ने ट्रंप की उस धमकी को अस्वीकार्य बताया था जिसमें उन्होंने ईरानी सभ्यता को रातों-रात मिटा देने की बात कही थी। अमेरिका और इज़रायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान पोप लगातार युद्ध की आलोचना करते रहे और धार्मिक भाषा में युद्ध को सही ठहराने वाले नेताओं को फटकार लगाई। उन्होंने यहां तक कहा कि मसीह युद्ध करने वालों की प्रार्थनाएं नहीं सुनते, बल्कि उन्हें अस्वीकार करते हैं।
स्विस विदेश मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को बर्गनश्टोक शहर में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। इंडोनेशियाई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि दोनों देशों के नेता इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि समझौते की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन पाकिस्तान को मुख्य मध्यस्थ के रूप में सामने रखा गया है। यह भूमिका दक्षिण एशिया के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और ईरान से सटी सीमा उसे स्वाभाविक मध्यस्थ बनाती है, वहीं भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में स्थिरता की चाहत इस समझौते को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम बनाती है।
रूसी और दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने पोप के संदेश को व्यापकता से उठाया, जिसमें उनकी इस टिप्पणी पर जोर दिया गया कि "युद्ध वास्तव में समाप्त हो गया है" और अब आगे बढ़ने का समय है। अरब जगत में भी इस समझौते को लेकर सतर्क आशावाद दिखा, क्योंकि मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रखा था। पोप ने अपने संबोधन में विश्व कप 2026 से पहले दिए गए अपने उस संदेश की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि जीवन अकेले चमकने की दौड़ नहीं है—यह भावना अब कूटनीति के मैदान में भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है।
आगे की राह में कई बिंदुओं पर सहमति बनाना बाकी है, लेकिन पोप का यह सार्वजनिक समर्थन वैश्विक कूटनीति को नैतिक बल देता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होते हैं, तो यह न केवल पश्चिम एशिया में हिंसा के चक्र को तोड़ने का मौका होगा, बल्कि दक्षिण एशिया जैसे ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों के लिए तेल आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने में भी मदद करेगा। पोप का यह आग्रह कि बातचीत ही एकमात्र मार्ग है, आने वाले दिनों में कठिन वार्ताओं के लिए एक नैतिक आधार तैयार कर सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पोप ने समझौते का स्वागत किया, ईश्वर का शुक्रिया अदा किया और कहा कि बातचीत हमेशा युद्ध से बेहतर है। इसे ईरानी कूटनीति की जीत और स्थायी शांति की ओर कदम बताया गया।
पोप ने अंतरिम समझौते के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा किया, यह याद दिलाते हुए कि युद्ध की उनकी पहले की आलोचना से ट्रंप नाराज हो गए थे। रिपोर्ट तटस्थ रही, समझौते को अनसुलझे मुद्दों के साथ एक कूटनीतिक कदम बताया।
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