
हूती विद्रोहियों की सऊदी अरब पर समुद्री नाकेबंदी, बाब अल-मंदब पर नया संकट
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है, जिससे लाल सागर के रणनीतिक बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित होने की आशंका है।
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा करते हुए जहाजरानी कंपनियों को सऊदी बंदरगाहों पर माल लादने या उतारने से मना किया और चेतावनी दी कि ऐसा करने वाले जहाज ‘किसी भी स्थान पर’ सैन्य निशाना बन सकते हैं। इसके तत्काल बाद मंगलवार को भारत और चीन के लिए सऊदी कच्चा तेल लेकर जा रहे दो टैंकर लाल सागर में ही वापस स्वेज नहर की ओर मुड़ गए, जबकि एक अन्य जहाज ओमान के पास से ही लौट गया। समुद्री आंकड़ा कंपनी क्लिपर के अनुसार, पिछले एक माह में सऊदी अरब ने लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से रिकॉर्ड 41.9 लाख बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात किया है, क्योंकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो चुका है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने इस कदम को यमन पर ‘अन्यायपूर्ण घेराबंदी’ का जवाब बताया और ‘आंख के बदले आंख’ के सिद्धांत का हवाला दिया। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राज्य अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक कदम’ उठाएगा, जबकि सऊदी नेतृत्व वाली सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता ने किसी भी खतरे का ‘दृढ़ता और तेजी से’ जवाब देने की चेतावनी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि यदि नाकेबंदी हुई तो ‘हम इससे निपट लेंगे’ और पूर्व में हूती विद्रोहियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का स्मरण कराया। पश्चिमी समाचार एजेंसियों के अनुसार, ईरान ने हूती विद्रोहियों पर बाब अल-मंदब को बंद करने का दबाव डाला था, ताकि अमेरिकी हमलों के जवाब में वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहराया जा सके।
विश्लेषकों के अनुसार, बाब अल-मंदब के पूर्ण रूप से बंद होने पर वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 7 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है, जो होर्मुज संकट से पहले ही 10 प्रतिशत कटौती के साथ जुड़कर कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार ले जा सकता है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा था। भारत के लिए तत्काल चिंता तेल की कमी से अधिक आपूर्ति में विलंब, ऊंची ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि की है, क्योंकि सऊदी अरब भारत का एक प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है और लाल सागर मार्ग अब वैकल्पिक निर्यात धमनी बन गया है। समुद्री सुरक्षा कंपनी एंब्रे ने जहाज संचालकों को सऊदी बंदरगाहों पर रुकने के बाद लाल सागर से गुजरने पर पुनर्विचार की सलाह दी है।
तनाव की तात्कालिक वजह पिछले सप्ताह साना हवाई अड्डे पर हुआ हमला है, जहां ईरान से लौट रहे हूती प्रतिनिधिमंडल के विमान को उतरने से रोकने के लिए सऊदी गठबंधन ने रनवे पर बमबारी की थी। इसके जवाब में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के आभा हवाई अड्डे पर मिसाइलें दागीं, जो 2022 के युद्धविराम के बाद पहला सीधा हमला था। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में दस दिवसीय युद्धविराम का प्रस्ताव ईरान को भेजा गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। हूती विद्रोहियों के पास समुद्री खदानें, ड्रोन और विस्फोटक नौकाएं मौजूद हैं, और हालांकि अभी पूर्ण नाकेबंदी लागू नहीं हुई है, जहाजों का मार्ग बदलना इस बात का संकेत है कि खतरा वास्तविक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या हूती विद्रोही सैन्य कार्रवाई के जरिए जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करते हैं या स्थिति कूटनीतिक प्रयासों से थमती है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
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| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.40 | critical |
संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी हौथियों द्वारा महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में व्यवधान बर्दाश्त नहीं करेंगे; हम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करेंगे।
हौथी खतरे को अमेरिकी नेतृत्व वाले आदेश के लिए सीधी चुनौती के रूप में प्रस्तुत करके और ट्रंप के वादे को उजागर करके, कथा अमेरिकी हस्तक्षेप को अपरिहार्य और उचित बनाती है।
यमन पर सऊदी नाकाबंदी का मानवीय संदर्भ, जिसे हौथी अपने औचित्य के रूप में उद्धृत करते हैं, को छोड़ दिया गया है, इसके बजाय हौथी कार्रवाई को अमेरिका-ईरान संघर्ष में एक अकारण वृद्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका हौथी समस्या से पहले की तरह निपटेगा; अलार्म की कोई आवश्यकता नहीं है।
ट्रंप के हौथियों से 'निपटने' के वादे को बार-बार उद्धृत करके, कथा एक जटिल क्षेत्रीय संघर्ष को एक सरल अमेरिकी प्रतिक्रिया तक सीमित कर देती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि खतरा नियंत्रण में है।
हौथी नाकाबंदी के शिपिंग पर वास्तविक प्रभाव या अमेरिका-ईरान के बीच व्यापक वृद्धि की कोई चर्चा छोड़ दी गई है, केवल ट्रंप के शब्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
भारत को तत्काल वैकल्पिक तेल आपूर्ति सुरक्षित करनी चाहिए क्योंकि हौथी नाकाबंदी सऊदी अरब से हमारी ऊर्जा जीवन रेखा को खतरे में डालती है।
भारत जा रहे एक टैंकर के यू-टर्न को उजागर करके और 100 डॉलर तेल की चेतावनी देकर, कथा तत्काल भेद्यता की भावना पैदा करती है और नीतिगत कार्रवाई का आह्वान करती है।
अमेरिका-ईरान युद्ध का व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ और हौथी शिकायतों को छोड़ दिया गया है, जो भारत के लिए आर्थिक परिणामों पर संकीर्ण रूप से ध्यान केंद्रित करता है।
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