
लेबनानी सेना की तैनाती पर इज़रायली गोलीबारी, अमेरिकी-मध्यस्थता वाली पायलट ज़ोन योजना पर संकट
दक्षिणी लेबनान में पहली पायलट ज़ोन तैनाती के दौरान इज़रायली बलों ने लेबनानी सैनिकों के नज़दीक गोलियाँ चलाईं, जिससे अमेरिकी-मध्यस्थता वाले ढाँचे की पहली परीक्षा ही विवादों में घिर गई।
लेबनानी सेना ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान के ज़ौतर अल-ग़रबिया कस्बे में तैनाती शुरू की, जो अमेरिकी-मध्यस्थता वाली ‘पायलट ज़ोन’ योजना का पहला कदम है। इसी दौरान इज़रायली बलों ने लेबनानी सैनिकों के नज़दीक गोलियाँ चलाईं। लेबनानी सेना कमान ने इसे ‘हमला’ बताते हुए चेतावनी दी कि इससे पायलट क्षेत्रों में तैनाती की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। इज़रायली सेना ने अलग बयान में कहा कि लेबनानी बल एक इंजीनियरिंग वाहन के साथ ज़ौतर अल-शरकिया में निर्धारित सीमा से लगभग 150 मीटर अंदर घुस आए थे, जो पायलट ज़ोन का हिस्सा नहीं है, और इस पर हवाई चेतावनी फ़ायर किया गया, जिसके बाद लेबनानी बल बिना किसी हताहत के पीछे हट गए।
यह घटना अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा फ़्रून, सरिफ़ा और ज़ौतर अल-ग़रबिया में पायलट ज़ोन संचालन शुरू होने की घोषणा के ठीक एक दिन बाद हुई। इस योजना के तहत इज़रायली सेना को चरणबद्ध तरीके से हटना है और लेबनानी सेना को इन क्षेत्रों में हिज़्बुल्लाह के हथियार ज़ब्त करने हैं। वाशिंगटन में लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात के दौरान लेबनानी सेना के लिए निरंतर समर्थन की अपील की और कहा कि ‘सशस्त्र बलों के बिना सब कुछ ढह जाएगा।’ ट्रंप ने कहा कि वे लेबनानी सेना के नियंत्रण और पायलट क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे, साथ ही यह भी कहा कि सीरिया का हिज़्बुल्लाह से लड़ने के लिए प्रवेश ‘प्रभावी हो सकता है।’
ज़ौतर अल-ग़रबिया के मेयर आबिद इज़्ज़ुद्दीन के अनुसार, क़स्बे का आधे से अधिक हिस्सा नष्ट हो चुका है और शेष घरों को भी भारी नुक़सान पहुँचा है, जिससे यह रहने लायक नहीं रहा। उन्होंने निवासियों की सुरक्षित वापसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पड़ोसी ज़ौतर अल-शरकिया में इज़रायली सेना की मौजूदगी के कारण स्थिति असुरक्षित है। लेबनानी सेना ने नागरिकों से सुरक्षा स्थिति स्थिर होने तक क्षेत्र में न जाने का आग्रह किया है और इंजीनियरिंग टीमें विस्फोटक अवशेषों की तलाश कर रही हैं।
यह पायलट ज़ोन प्रक्रिया पिछले महीने हस्ताक्षरित अमेरिकी-मध्यस्थता वाले ढाँचे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में स्थायी शांति स्थापित करना है। इज़रायली सैन्य अधिकारियों ने इसे लेबनानी सशस्त्र बलों की संप्रभुता की परीक्षा बताया है, हालाँकि इज़रायली पक्ष ने हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की लेबनान की क्षमता पर संदेह व्यक्त किया है। इस बीच, हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम क़ासिम ने हमास के नए प्रमुख ख़लील अल-हय्या को बधाई देते हुए कहा कि उनका संगठन फ़लस्तीनी प्रतिरोध के साथ खड़ा है।
सैन्य समन्वय समूह (MCG4L) के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है, लेकिन पहले ही दिन हुई गोलीबारी ने समझौते की नाज़ुकता को उजागर कर दिया है। लेबनानी सेना ने स्पष्ट किया कि वह केवल ज़ौतर अल-ग़रबिया में दाख़िल हुई है, ज़ौतर अल-शरकिया में नहीं, और इज़रायल से किसी भी समस्या का समाधान समन्वय माध्यमों से करने को कहा। अगले कदम के रूप में, तीनों पायलट गाँवों में लेबनानी सेना की पूर्ण तैनाती और हथियार-मुक्त क्षेत्र की स्थापना की प्रक्रिया जारी रहेगी, जिसकी सफलता पर व्यापक इज़रायली वापसी निर्भर करेगी।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.90 | critical |
Lebanon accuses Israel of opening fire to sabotage the deployment, while the Israeli army attempts to justify the action with territorial pretexts.
The bloc amplifies the Lebanese army's official statement as the primary narrative, while framing the Israeli explanation as a self-serving excuse. By repeatedly using the term 'occupation forces', it delegitimizes Israel's presence and actions.
The bloc omits the Israeli version that the area was not part of the pilot zone and that the shots were warning shots, as well as the US role as mediator.
The US-brokered plan proceeds, but the Israeli firing incident raises doubts about its implementation, while the Lebanese army continues its deployment.
The bloc presents both the Lebanese and Israeli perspectives without taking sides, using neutral language and attributing claims to sources. It emphasizes the procedural aspects and the role of the US, creating an impression of objective reporting.
The bloc omits the strong condemnation from the Lebanese army and the characterization of Israeli forces as occupiers, as well as the warning that the incident could derail the entire plan.
Iran condemns the Zionist aggression against the Lebanese army and warns that such actions undermine regional stability, while reiterating support for resistance.
The bloc uses the term 'Zionist' to delegitimize Israel and frames the incident as a clear act of aggression, omitting any context that might mitigate Israel's action. It presents a binary narrative of oppressor vs. victim.
The bloc omits the Israeli explanation, the US role, and the fact that the Lebanese army continued deployment, as well as any reference to Hezbollah.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ट्रंप ने न्यूयॉर्क मेयर की धमकी को खारिज किया, नेतन्याहू की गिरफ्तारी नहीं होगी
13 भाषाएँ · 33 स्रोत
Economy & Markets सेट्रंप ने कनाडा पर 50% शुल्क की धमकी दी, 1930 के कानून का पहली बार इस्तेमाल
6 भाषाएँ · 17 स्रोत
Technology सेओपनएआई के एआई मॉडल ने परीक्षण के दौरान खुद ही हैक की दूसरी कंपनी
8 भाषाएँ · 18 स्रोत