
वैश्विक तकनीकी बिकवाली से एशियाई बाजार दहले; भारत में निफ्टी 1.2% टूटा
एआई वैल्यूएशन पर सवाल और फेड की सख्त नीति की आशंका से मंगलवार को वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट; बुधवार को सीमित सुधार।
मंगलवार 23 जून को अमेरिकी प्रौद्योगिकी शेयरों में तेज बिकवाली ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया। नैस्डैक-100 सूचकांक 999.81 अंक (3.29%) लुढ़ककर 29,347.27 पर आ गया, जबकि एसएंडपी 500 1.44% गिरा। इसका सबसे गहरा असार दक्षिण कोरिया पर पड़ा, जहां कोस्पी सूचकांक मार्च के बाद अपनी सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट में 10% टूट गया और सर्किट ब्रेकर सक्रिय हो गए। भारत में निफ्टी 50 1.2% (278.80 अंक) गिरकर 23,824.10 पर और सेंसेक्स 893.39 अंक टूटकर 76,200.68 पर बंद हुआ।
गिरावट के पीछे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी कंपनियों के बढ़े हुए मूल्यांकन पर बढ़ता संदेह और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंका प्रमुख कारण रहे। लगातार मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने इस उम्मीद को बल दिया कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे ऊंची वृद्धि वाले शेयरों पर दबाव बना। निवेशकों ने दो वर्षों की तेजी के बाद मुनाफावसूली की, खासकर चिप निर्माता और मेगा-कैप टेक कंपनियों में, जिनके प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर पहुंच गए थे।
एशियाई बाजारों में बुधवार को मिला-जुला रुख रहा। सियोल का कोस्पी 3.3% उछलकर 8,471 पर बंद हुआ, जिसमें सैमसंग 7% और एसके हाइनिक्स 3% से अधिक चढ़े। वहीं टोक्यो का निक्केई 0.9% गिरा और ताइपे, जकार्ता में भी गिरावट जारी रही। मूमू सिक्योरिटीज ऑस्ट्रेलिया के विश्लेषक माइकल मैकार्थी ने कहा, “पिछले सात कारोबारी दिनों में बाजारों की चाल चिंताजनक रही है – गिरावट और तेजी दोनों में तेज उतार-चढ़ाव अस्थिरता का संकेत है।” स्पेसएक्स के शेयर अपने आईपीओ मूल्य 150 डॉलर से नीचे गिरने के बाद 156 डॉलर पर बंद हुए, जो व्यापक टेक घबराहट के बीच नई सूचीबद्ध कंपनियों की संवेदनशीलता दर्शाता है।
भारत में मेटल इंडेक्स 3.2%, पीएसयू बैंक और आईटी इंडेक्स लगभग 2% गिरे, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर में मामूली बढ़त रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मंगलवार को मात्र 17.9 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जबकि जून में अब तक 34,272.8 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 680.2 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इंडिया वीआईएक्स अस्थिरता सूचकांक 8.6% उछलकर 13.9 पर पहुंच गया, जो निकट अवधि में ऊंचे जोखिम का संकेत है।
तेल की कीमतें चार माह के निचले स्तर के करीब आ गईं, क्योंकि ईरान युद्धविराम वार्ता के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही बढ़ने के संकेत मिले। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु निरीक्षण और जलमार्ग नियंत्रण पर परस्पर विरोधी बयानों से समझौते की अनिश्चितता बनी हुई है। डॉलर सूचकांक एक वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि येन 161.57 प्रति डॉलर के 40-वर्षीय निचले स्तर के करीब कमजोर बना रहा। बैंक ऑफ जापान की बैठक के ब्योरे से संकेत मिला कि कुछ सदस्यों ने नीतिगत दर को तटस्थ स्तर तक ले जाने के लिए और तेजी से बढ़ोतरी की वकालत की। अगला ध्यान अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन टेक्नोलॉजी की बुधवार को आने वाली आय रिपोर्ट पर रहेगा, जो एआई मांग की वास्तविक स्थिति का ताजा संकेत देगी। भारतीय बाजार के लिए निफ्टी का 23,800 का समर्थन स्तर महत्वपूर्ण है; इसके टूटने पर गिरावट तेज हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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वैश्विक तकनीकी बिकवाली दरों की चिंता और एआई मूल्यांकन पर संदेह के कारण और गहरा गई, जिससे बाजारों से अरबों डॉलर साफ हो गए। एशियाई शेयर बाजार हिंसक रूप से डगमगाए, और विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि इतने तेज उतार-चढ़ाव गहरी अस्थिरता का संकेत हैं। निवेशक कमजोर धारणा के बीच सुरक्षित पनाह के रूप में डॉलर की ओर भागे।
प्रौद्योगिकी शेयरों की बिकवाली दो मुख्य कारकों से प्रेरित है: कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारी अनुमानित पूंजीगत व्यय और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की बढ़ती संभावना। बाजार इस बात का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या एआई उछाल मौजूदा मूल्यांकनों को सही ठहरा सकता है, जबकि सख्त मौद्रिक नीति की संभावना दबाव बढ़ा रही है।
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