
रूस से अमेरिका तक: विदेशी नागरिकों की डिजिटल प्रोफाइलिंग का वैश्विक विस्तार
रूस ने प्रवासियों के लिए एकीकृत डिजिटल प्रोफाइल शुरू किया, जबकि अमेरिका और इंडोनेशिया में भी बायोमेट्रिक पंजीकरण अनिवार्य किए जाने से विदेशी नागरिकों की निगरानी का दायरा बढ़ रहा है।
रूस में 30 जून को ‘डिजिटल प्रोफाइल ऑफ फॉरेन सिटिजन’ नामक राजकीय सूचना संसाधन सक्रिय हुआ, जो प्रवासियों और नागरिकताहीन व्यक्तियों का पूर्ण डेटा संकलित करेगा। गृह मंत्रालय की प्रवक्ता इरीना वोल्क के अनुसार, इस प्रोफाइल में पहचान दस्तावेज, प्रवासी पंजीकरण, श्रम गतिविधि, शिक्षा, चिकित्सा बीमा, अचल संपत्ति, वाहन, प्रशासनिक उल्लंघन और रूस में प्रवेश पर लगे प्रतिबंधों की जानकारी शामिल होगी। सरकारी एजेंसियां, संगठन और स्वयं विदेशी नागरिक ‘गोसुस्लुगी’ पोर्टल के माध्यम से इस डेटा तक पहुंच सकेंगे।
रूसी पक्ष इस कदम को प्रवासन प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताता है। सरकारी बयानों में कहा गया है कि यह संसाधन देश में प्रवासन स्थिति के आकलन और राजकीय प्रबंधन की दक्षता बढ़ाने के लिए पूर्ण, विश्वसनीय और अद्यतन सूचना सुनिश्चित करेगा। मॉस्को स्थित विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल मार्च 2024 के क्रोकस सिटी हॉल हमले के बाद प्रवासन नीति को सख्त करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसमें पहले ही बायोमेट्रिक डेटा संग्रह का प्रयोग और अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का रजिस्टर शुरू किया जा चुका है।
अमेरिका में भी विदेशी नागरिकों के पंजीकरण को लेकर नए नियम स्थिर हो रहे हैं। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक अंतिम नियम जारी किया है जो अप्रैल 2025 से चल रही अंतरिम व्यवस्था को स्थायी करता है। इसके तहत, बिना उचित प्रवेश दस्तावेज के 30 दिन से अधिक रहने वाले विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन पंजीकरण और बायोमेट्रिक संग्रह (जैसे फिंगरप्रिंट) अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। वहीं, इंडोनेशिया में 1 जुलाई से नए मोबाइल सिम कार्ड के पंजीकरण के लिए चेहरे की बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य कर दी गई है, जो पूर्व में केवल राष्ट्रीय पहचान संख्या पर निर्भर प्रणाली की जगह लेगी। संचार मंत्री मेउत्या हाफिद ने कहा कि इससे गुमनामी कम होगी और आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य में, ये घटनाक्रम प्रवासी श्रमिकों और छात्रों के लिए बढ़ती निगरानी और डेटा संग्रह की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हैं। भारत से बड़ी संख्या में लोग रूस, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में कार्यरत हैं, जहां इस तरह के डिजिटल प्रोफाइल अनिवार्य होने पर उनकी व्यक्तिगत जानकारी का दायरा विस्तृत होगा। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सुरक्षा और अंतर-सरकारी सूचना साझेदारी को लेकर नए सवाल उठ सकते हैं, हालांकि अभी तक किसी दक्षिण एशियाई सरकार ने इन कदमों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
रूसी प्रणाली में 30 जून 2026 से नागरिकता और लिंग संबंधी डेटा जोड़े जाने की योजना है, और डिजिटल प्रोफाइल कागजी पेटेंट का स्थान ले सकेगा। अमेरिकी नियम के तहत 28 अगस्त 2026 तक संभावित बदलावों पर टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं। इंडोनेशिया में नई व्यवस्था अभी लागू हुई है और ऑपरेटरों द्वारा इसके क्रियान्वयन पर नजर रखी जाएगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूस ने विदेशी नागरिकों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्रोफ़ाइल सक्रिय की है, जिसमें पहचान दस्तावेज़, कार्य परमिट, शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा, संपत्ति, वाहन और किसी भी प्रशासनिक उल्लंघन या प्रवेश प्रतिबंध को समेकित किया गया है। इस सेवा को सटीक प्रवासन आकलन और अधिक कुशल राज्य प्रशासन के लिए एक उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कथा व्यवस्था, पूर्णता और प्रवासन नियंत्रण के तकनीकी आधुनिकीकरण पर जोर देती है।
संयुक्त राज्य अमेरिका में हजारों प्रवासियों के लिए उलटी गिनती शुरू हो गई है, जो नए सरकारी नियमों के तहत अक्टूबर 2026 से सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों तक पहुंच खो देंगे। इस कदम को एक गंभीर कटौती के रूप में पेश किया गया है जो कमजोर समुदायों से आवश्यक चिकित्सा कवरेज छीन लेगा। कवरेज मानवीय लागत और आसन्न समय सीमा की तात्कालिकता को बढ़ाता है।
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