
अमेरिकी वीज़ा में असामान्य बायोमेट्रिक शर्त ने रद्द कराया इज़रायली मंत्री का दौरा
दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन-गवीर को उंगलियों के निशान देने की मांग के बाद वाशिंगटन की अनिच्छा के संकेत मिले, जिससे कूटनीतिक रिश्तों पर सवाल उठे।
इज़रायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने अमेरिका की एक निजी पारिवारिक यात्रा अचानक रद्द कर दी, जब वीज़ा प्रक्रिया में असामान्य रूप से उन्हें व्यक्तिगत रूप से दूतावास जाकर बायोमेट्रिक डेटा देने को कहा गया। यह कदम एक कैबिनेट मंत्री के लिए दुर्लभ है, खासकर तब जब उनके पास कूटनीतिक पासपोर्ट हो। इज़रायली मीडिया के अनुसार, बेन-गवीर सोमवार को दूतावास गए और अंगुलियों के निशान दिए, लेकिन अंततः यह कहते हुए यात्रा रद्द कर दी कि वीज़ा समय पर नहीं आएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी इज़रायली नागरिकों को ऐसी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है, जिसे चैनल 12 ने 'झूठा दावा' बताया।
अरब और ईरानी मीडिया ने इस घटना को वाशिंगटन की ओर से एक स्पष्ट संकेत के रूप में देखा। स्काई न्यूज़ अरबिया और लेबनान के अन-नहर ने रिपोर्ट किया कि बेन-गवीर का आपराधिक रिकॉर्ड और उग्रवादी छवि इस अनिच्छा की वजह हो सकती है। ईरान के दोन्याए-एक्तेसाद और हमशहरी ऑनलाइन ने ज़ोर देकर कहा कि ट्रंप प्रशासन शायद उन्हें अमेरिकी धरती पर नहीं देखना चाहता था, और कूटनीतिक वीज़ा की छोटी प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा गया। अल्जीरिया के इशोरूक ने भी इस 'कठिनाई' को कूटनीतिक पासपोर्ट के बावजूद असामान्य बताया। इंडोनेशियाई मीडिया इंडोनेशिया ने इसे दक्षिणपंथी इज़रायली नेतृत्व और वाशिंगटन के बीच संबंधों में दरार की अटकलों से जोड़ा।
यह विवाद तब और गहरा गया जब पता चला कि बेन-गवीर मियामी में एक इज़रायली व्यवसायी की बेटी की शादी में शामिल होने जा रहे थे, और यात्रा का खर्च वही व्यवसायी उठा रहा था। हारेत्ज़ अखबार के अनुसार, इस यात्रा के कारण उन्होंने एक मानहानि मुकदमे की सुनवाई भी स्थगित करवाई थी। बांग्लादेश के प्रथम आलो ने भी इस घटनाक्रम को प्रमुखता से छापा और कहा कि अमेरिकी दूतावास की शर्त को इज़रायली मीडिया वाशिंगटन की अनिच्छा के रूप में देख रहा है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर बेन-गवीर की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो पहले भी उत्तेजक बयानों और कार्रवाइयों के लिए आलोचना झेल चुके हैं।
व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में देखें तो यह घटना अमेरिका-इज़रायल संबंधों की जटिलता को रेखांकित करती है। ट्रंप प्रशासन को इज़रायल का प्रबल समर्थक माना जाता है, फिर भी वह बेन-गवीर जैसे ध्रुवीकरण करने वाले नेताओं से सार्वजनिक दूरी बनाकर एक संतुलित छवि पेश करना चाहता है। दक्षिण एशिया के लिए यह प्रासंगिक है, क्योंकि भारत के अमेरिका और इज़रायल दोनों से घनिष्ठ संबंध हैं, और ऐसे कूटनीतिक संकेत यह दर्शाते हैं कि वीज़ा नीतियां किस तरह मूक राजनीतिक औज़ार बन सकती हैं। आगे देखना होगा कि क्या यह एक अलग-थलग मामला रहेगा या इज़रायली कैबिनेट के अन्य सदस्यों के लिए भी ऐसी ही बाधाएं खड़ी होंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ज़ायोनी शासन के चरमपंथी मंत्री को अमेरिकी वीज़ा देने से इनकार कर दिया गया, जिससे पता चलता है कि वाशिंगटन भी ऐसे व्यक्ति की मेज़बानी करने से हिचक रहा है। एक इज़रायली व्यवसायी द्वारा वित्तपोषित उनकी विवादास्पद यात्रा का रद्द होना, सहयोगियों के बीच भी इज़रायली धुर दक्षिणपंथ के अलगाव को उजागर करता है।
ज़ायोनी इकाई की 'यहूदी शक्ति' पार्टी के चरमपंथी नेता को वीज़ा बाधाओं का सामना करने के बाद अपनी अमेरिकी यात्रा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजनयिक पासपोर्ट होने के बावजूद, उन्हें असामान्य प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ा, जो इज़रायली धुर दक्षिणपंथ के प्रति वाशिंगटन की असहजता का संकेत है।
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