
यूरोपीय संघ में 21वें प्रतिबंध पैकेज पर गतिरोध: मछली, गैस और बैंक पर मतभेद, तेल मूल्य सीमा में ढील का खतरा
राजदूतों की आपात बैठक में आधी रात तक सहमति न बनने पर रूसी तेल की मूल्य सीमा स्वतः बढ़ सकती है, जिससे मास्को को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
यूरोपीय संघ के सदस्य देश मंगलवार दोपहर बाद एक आपातकालीन राजदूत-स्तरीय बैठक में 21वें प्रतिबंध पैकेज पर अंतिम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आयरलैंड की अध्यक्षता में बुलाई गई इस बैठक का लक्ष्य आधी रात की समय-सीमा से पहले गतिरोध तोड़ना है। यदि सहमति नहीं बनी, तो रूसी तेल पर वर्तमान मूल्य सीमा में स्वचालित वृद्धि हो जाएगी, जिससे मास्को को तेल निर्यात से अधिक आय प्राप्त होने का मार्ग खुल सकता है।
लिथुआनिया के विदेश मंत्री के अनुसार, यूरोपीय संघ के भीतर सदस्य देश अपने आर्थिक हितों को प्रतिबंधों की कठोरता पर वरीयता दे रहे हैं, जो 20वें पैकेज के समय से ही उभरती प्रवृत्ति है। सबसे बड़ा मतभेद रूसी ऊर्जा संसाधनों, विशेषकर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के परिवहन पर प्रतिबंधों को लेकर है। लिथुआनिया चाहता है कि यूरोपीय ध्वज वाले जहाजों द्वारा रूसी एलएनजी की ढुलाई पर रोक लगाई जाए, क्योंकि वैश्विक स्तर पर एलएनजी परिवहन में सक्षम जहाजों का बड़ा हिस्सा यूरोप में ही है।
दूसरी ओर, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, पोलैंड और पुर्तगाल सहित कई देशों ने रूसी कॉड (अटलांटिक मछली) के आयात पर प्रतिबंध का विरोध किया है। यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में यूरोपीय संघ ने रूस से 75,525 टन कॉड का आयात किया, जिसका मूल्य 619 मिलियन यूरो था और यह संघ के कुल कॉड आयात का 24 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, ऑस्ट्रिया ने राइफाइजन बैंक इंटरनेशनल के लिए अपवाद की मांग की है, जो पहले स्ट्राबाग कंस्ट्रक्शन कंपनी के शेयरों के अधिग्रहण से जुड़े विवाद का हिस्सा है। बुल्गारिया ने रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च के प्रमुख पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया था, जिसके बाद उस प्रावधान को हटा दिया गया।
इन मतभेदों के चलते प्रस्तावित पैकेज पहले ही कमजोर किया जा चुका है। यूक्रेन में लड़ने वाले रूसी नागरिकों पर वीज़ा प्रतिबंध का प्रस्ताव वार्ता में समाप्त हो गया, और जर्मनी के विरोध के बाद रूसी अलास्का पोलॉक मछली पर आयात रोक भी हटा दी गई। यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की 13 जुलाई की बैठक में 250 नए व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों की सूची पर सहमति नहीं बन पाई थी। गौरतलब है कि इस बार हंगरी बाधा नहीं बना है, क्योंकि वहां नए प्रधानमंत्री पीटर मग्यार के आने के बाद वीटो की आशंका कम हुई है।
यूरोपीय संघ की आयरिश अध्यक्षता एक समझौते की दिशा में काम कर रही है, जिसमें मछली से जुड़े प्रावधानों को पैकेज से बाहर रखकर अन्य मुद्दों पर सहमति बनाई जा सकती है। यदि आधी रात तक निर्णय नहीं होता, तो तेल मूल्य सीमा की स्वचालित पुनर्गणना से रूस को प्रति बैरल अधिक मूल्य प्राप्त होगा, जिसका दक्षिण एशियाई ऊर्जा बाजारों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। राजदूतों की बैठक का परिणाम आने वाले घंटों में अपेक्षित है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.30 | critical |
The EU is fracturing because member states put their own economic interests above collective solidarity, proving the sanctions regime is hollow.
Emphasises internal EU divisions and quotes a Baltic official to validate the narrative of EU failure, while downplaying the complexity of negotiations.
Does not mention that the deadlock also stems from legitimate economic concerns of some member states, not merely selfishness.
Russia struggles to sell all the oil it is forced to export, with volumes at sea near the highs of the year.
Uses a single quantitative indicator (oil at sea) to imply operational difficulty for Russia, without contextualising demand-side factors or temporary fluctuations.
Does not consider that the increase in oil at sea may be temporary and not indicative of a structural crisis, nor does it mention that Russia might be deliberately storing oil.
The EU races against the clock to approve the 21st sanctions package, but disagreements over cod and visas risk triggering an automatic oil price cap increase that would benefit Russia.
Creates urgency through the imminent deadline and personalises disagreements on specific products (cod) to make the difficulty tangible, while framing the automatic price cap as a catastrophic consequence.
Does not highlight that the automatic price cap could still be managed through adjustment mechanisms, reducing the alarm, nor does it mention that some member states' objections are based on legitimate economic interests.
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