
जॉर्डन में ईरानी मिसाइल हमलों से तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत, पेंटागन ने लगभग 100 घायलों की पुष्टि की
पेंटागन ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई से ईरानी हमलों में करीब 100 सैनिक घायल हुए, जबकि जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर हुए ताजा हमलों में तीन सैनिक मारे गए और अमेरिकी हताहतों के आंकड़ों को लेकर विवाद गहराया।
जॉर्डन स्थित मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर पिछले सप्ताह ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए, जिनकी पहचान सार्जेंट एंजेल एस. रैम्परसाड, फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहान और प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस के रूप में हुई। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने सोमवार को बताया कि 7 जुलाई से अब तक ईरान के हमलों में “लगभग 100 सेवा सदस्य किसी न किसी स्तर की चोट से प्रभावित” हुए हैं, हालांकि 96 प्रतिशत ड्यूटी पर लौट आए हैं। इससे पहले पेंटागन पर आरोप लगा था कि वह हताहतों की वास्तविक संख्या छिपा रहा है, जिसे पार्नेल ने “आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण” बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्डन में हुई क्षति के लिए “अन्य ऑपरेटरों” को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जब अमेरिका दूसरों को अपनी सुरक्षा का काम सौंपता है तो “कभी-कभी चीजें ठीक से काम नहीं करतीं।” उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि हर अमेरिकी सैनिक की मौत का ईरान को “कई गुना भुगतान करना होगा।” वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो उसे “अविस्मरणीय सबक” सिखाए जाएंगे। ईरान के आईआरजीसी से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, जॉर्डन और इराक के अलावा बहरीन, कुवैत और सीरिया में भी अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
जॉर्डन के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल कासिद महमूद के अनुसार, ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक को उन्नत करते हुए ऐसी रणनीति अपनाई है जिसमें साधारण मिसाइलों से रडार को उलझाकर फिर बेहतर गुणवत्ता वाली मिसाइलें दागी जाती हैं, जो अंतिम 30-40 किलोमीटर में अपना लक्ष्य बदल लेती हैं। इसी आधार पर 48 घंटों के भीतर एक ही बेस पर तीन सफल हमले हुए—पहला जिम पर, दूसरा खाली हैंगर पर और तीसरा सैनिकों के सोने के कंटेनरयुक्त आवास पर। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि मामला समीक्षाधीन है, लेकिन स्वीकार किया कि “दुर्भाग्यवश कुछ मिसाइलें बचाव को भेद गईं।” पेंटागन के आधिकारिक डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम में जुलाई के दौरान कार्रवाई में घायलों की संख्या अब भी शून्य दिख रही है, जिसे एक अमेरिकी अधिकारी ने “प्रशासन के हित में आधिकारिक अक्षमता” करार दिया।
दक्षिण एशियाई रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का यह विस्तार हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ेगा। जॉर्डन, जो 1994 से इज़राइल के साथ शांति समझौते के बाद नाटो का प्रमुख सहयोगी है, अमेरिकी सेना की व्यापक मेजबानी करता है, लेकिन ईरानी हमलों से पहले यह अपेक्षाकृत सुरक्षित था। अब यह स्पष्ट हो गया है कि तेहरान ने अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों को भेदने की क्षमता हासिल कर ली है, जिससे खाड़ी देशों में तैनात लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पेंटागन ने आश्वासन दिया है कि हताहतों के अद्यतन आंकड़े जल्द ही सार्वजनिक प्रणाली पर डाले जाएंगे, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। अमेरिकी सेना लगातार ग्यारहवीं रात ईरान पर मिसाइल हमले कर रही है, जबकि राजनयिक वार्ता के कोई संकेत नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ सप्ताह में यह संघर्ष और गहराने की आशंका है, क्योंकि दोनों पक्ष सैन्य क्षमता प्रदर्शन और जवाबी कार्रवाई के चक्र में फंसते जा रहे हैं।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
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| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.50 | critical |
व्हाइट हाउस ईरानी आक्रमण की निंदा करता है और जवाबी कार्रवाई का वादा करता है, जबकि पेंटागन रक्षात्मक कमियों को स्वीकार करता है।
सैनिकों की भेद्यता और मजबूत प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर देकर, आसन्न खतरे का एक ढांचा बनाया जाता है जो सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराता है।
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मॉस्को अमेरिकी नुकसान को उदासीनता से देखता है, आधिकारिक रिपोर्टों में विरोधाभासों को उजागर करता है।
आधिकारिक आंकड़ों में संख्याओं और विसंगतियों का उपयोग करके, यह अमेरिकी बयानों की विश्वसनीयता को कम करता है, अपारदर्शी संघर्ष प्रबंधन का सुझाव देता है।
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नई दिल्ली इस घटना को अंतरराष्ट्रीय समाचार के रूप में दर्ज करता है, बिना किसी को दोष दिए।
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जकार्ता और कुआलालंपुर पेंटागन की पारदर्शिता की कमी की निंदा करते हैं, आधिकारिक संस्करण पर सवाल उठाते हैं।
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