
रूस से लेकर मेक्सिको तक डिजिटल धोखाधड़ी के नए हथकंडों पर अलर्ट, भारत के लिए भी सबक
कई देशों में साइबर अपराधियों ने सामाजिक इंजीनियरिंग और एआई-जनित नकली संदेशों के ज़रिए बैंकिंग व निजी डेटा चुराने की ताज़ा लहर शुरू की है।
रूस, मेक्सिको, इंडोनेशिया और ब्राज़ील की सरकारी एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों ने पिछले सप्ताह डिजिटल धोखाधड़ी के नए तरीकों को लेकर चेतावनी जारी की है। रूस में ‘शांति भंग करने’ की फ़र्ज़ी शिकायतों वाले मैसेज तेज़ी से फैल रहे हैं, जबकि मेक्सिको में कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को निशाना बनाकर बैंक डेटा मांगा जा रहा है। ये सभी मामले सामाजिक इंजीनियरिंग पर आधारित हैं, जिनमें पीड़ित की जिज्ञासा या भय का दोहन करके संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती है।
रूसी परियोजना ‘न दाई सिब्या ओबमानुत’ के प्रमुख इवान सोलोव्योव के अनुसार, मैसेंजर ऐप पर भेजे जा रहे संदेशों में दावा किया जाता है कि प्राप्तकर्ता के घर के पते पर पड़ोसियों ने शोर की शिकायत दर्ज कराई है। संदेश में एक लिंक दिया जाता है, जिस पर क्लिक करते ही पारंपरिक धोखाधड़ी की शृंखला शुरू हो जाती है—बाद में फ़र्ज़ी कानून प्रवर्तन अधिकारियों के फ़ोन आते हैं और पीड़ित को गंभीर अपराधों में फंसाने या वित्तीय लेन-देन कराने का प्रयास किया जाता है। रूसी गृह मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि दो-चरणीय फ़ोन धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं, जिनमें पहले मासूम कॉल करके एसएमएस कोड लिया जाता है और फिर दूसरी कॉल में खुद को सुरक्षा अधिकारी बताकर वित्तीय कार्रवाई कराई जाती है।
मेक्सिको के कल्याण सचिवालय (बिएनेस्टार) ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सामाजिक कार्यक्रमों के तहत कभी भी फ़ोन, मैसेज या व्हाट्सएप के ज़रिए बैंक खाते, पासवर्ड या सत्यापन कोड नहीं मांगे जाते। विभाग ने लाभार्थियों से केवल आधिकारिक चैनलों पर भरोसा करने और किसी भी संदिग्ध संचार की सूचना देने को कहा है। इंडोनेशिया में वित्तीय सेवा प्राधिकरण (ओजेके) के नए विनियमन पीओजेके नंबर 12/2024 के तहत बैंकों और फिनटेक कंपनियों को रीयल-टाइम धोखाधड़ी प्रबंधन प्रणाली अपनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें एआई-आधारित व्यवहार विश्लेषण और स्वचालित जोखिम स्कोरिंग शामिल है।
ब्राज़ील की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की पहली छमाही में बैंकिंग धोखाधड़ी में 220 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहाँ ‘फ़र्ज़ी सुरक्षा केंद्र’ कॉल, पिक्स भुगतान प्रणाली का दुरुपयोग और नकली बोलेटो (भुगतान पर्ची) जैसे तरीके आम हैं। बैंक इंटर जैसी संस्थाएं बायोमीट्रिक सत्यापन और विशेष रिफंड मैकेनिज़्म (एमईडी) का उपयोग कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उपयोगकर्ता जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत में भी यूपीआई धोखाधड़ी और फ़र्ज़ी कस्टमर केयर कॉल की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक और साइबर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर एडवाइज़री जारी करती हैं, लेकिन सीमा-पार से संचालित इन गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है। फ़िलहाल सभी प्रभावित देशों में जांच जारी है और नागरिकों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने तथा अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सलाह दी गई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूस में मैसेजिंग ऐप के जरिए एक नई धोखाधड़ी फैल रही है, जिसमें उपयोगकर्ताओं को शोर की शिकायतों की फर्जी सूचनाएं मिलती हैं जिनमें एक खतरनाक लिंक होता है। यह योजना जिज्ञासा और अपनी बेगुनाही साबित करने की इच्छा का फायदा उठाती है।
लैटिन अमेरिका में अधिकारी सामाजिक कार्यक्रमों के लाभार्थियों को निशाना बनाने वाली धोखाधड़ी वाली कॉल और संदेशों के बारे में चेतावनी दे रहे हैं, जिनका उद्देश्य व्यक्तिगत और बैंकिंग डेटा चुराना है। इस बीच, बैंक धोखाधड़ी बढ़ रही है, अपराधी अत्यधिक व्यक्तिगत हमले करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर रहे हैं।
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