
ब्रिटेन: शरणार्थियों को बसने से पहले चुकाने होंगे 10,000 पाउंड, नए विधेयक में प्रावधान
ब्रिटिश सरकार ने शरण पाने वालों के लिए आवास व सहायता की लागत वसूलने की योजना बनाई है, जिसके तहत वयस्क शरणार्थियों को स्थायी निवास के लिए आवेदन से पहले लगभग 10,000 पाउंड चुकाने होंगे।
ब्रिटेन सरकार ने आव्रजन और शरण विधेयक में एक नया प्रावधान रखा है, जिसके तहत पर्याप्त आय वाले वयस्क शरणार्थियों को स्थायी निवास (सेटलमेंट) के लिए आवेदन करने से पहले अपने आवास और वित्तीय सहायता की लागत के रूप में लगभग 10,000 पाउंड (करीब 13,200 अमेरिकी डॉलर) की रकम चुकानी होगी। गृह मंत्री शबाना महमूद ने इसे "अधिकार के साथ जिम्मेदारी" बताते हुए कहा कि जब लोग योगदान करने में सक्षम हों तो उनसे ब्रिटिश जनता की उदारता का बदला चुकाने की अपेक्षा की जाएगी। यह राशि आय-परीक्षण आधारित होगी और मासिक किस्तों में वसूली जा सकेगी, हालांकि आय सीमा और भुगतान की सटीक शर्तें अभी तय नहीं की गई हैं। जिनके शरण दावे खारिज हो चुके हैं, उन्हें भी सरकारी सीमा से अधिक आय होने पर यह रकम लौटानी होगी। बच्चों को इस दायरे से बाहर रखा गया है और नियम पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं होंगे।
ब्रिटिश गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले वर्ष शरण चाहने वालों के आवास और सहायता पर करीब 4 अरब पाउंड खर्च हुए, जिससे करदाताओं पर बोझ कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। राजनीतिक रूप से, लेबर सरकार पर निगेल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी का दबाव है, जो अवैध प्रवासन पर सख्त रुख अपनाने की मांग कर रही है। सरकार ने अगले दशक में 45,000 अतिरिक्त लोगों को निष्कासित करने की योजना भी बनाई है, जिनके पास रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। हालांकि, लेबर पार्टी के भीतर ही कुछ सांसद विधेयक के कड़े प्रावधानों का विरोध कर सकते हैं, जिससे आगे की राह आसान नहीं दिखती।
ब्रिटेन की शरणार्थी परिषद (रिफ्यूजी काउंसिल) ने इस योजना को "अनुचित और अव्यावहारिक" बताते हुए इसे शरणार्थियों पर अतिरिक्त कर करार दिया है। परिषद के बाह्य मामलों के निदेशक इमरान हुसैन के अनुसार, शरण प्रक्रिया के दौरान काम करने पर प्रतिबंध के कारण लोग सरकारी सहायता पर निर्भर रहते हैं, और यह नया वित्तीय बोझ उन्हीं पर पड़ेगा जो खाली हाथ आते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रवासन वेधशाला की निदेशक डॉ. मेडलिन सम्पशन ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि शरण मिलने के पाँच साल बाद केवल 13 प्रतिशत शरणार्थी सालाना 20,000 पाउंड या उससे अधिक कमा पाते हैं, इसलिए सरकार को इस प्रणाली से बड़ी रकम वसूलने की संभावना कम है। गृह मंत्रालय के अपने आँकड़े बताते हैं कि 2015-2023 के बीच शरण पाने वालों में से एक चौथाई उसी वर्ष नौकरी पा सके, और आठ साल बाद भी केवल 40 प्रतिशत न्यूनतम मजदूरी से अधिक कमा रहे थे।
दक्षिण एशिया से ब्रिटेन आने वाले शरणार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए, यह नीति अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के नागरिकों को प्रभावित कर सकती है। विधेयक में कनाडा की तर्ज पर सामुदायिक और विश्वविद्यालय प्रायोजन के जरिए शरणार्थियों के लिए नए सुरक्षित रास्ते बनाने का भी प्रावधान है, लेकिन मुख्य विवाद लागत वसूली वाले प्रावधान पर ही केंद्रित है। यह विधेयक जल्द ही संसद में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा, और गृह सचिव को भविष्य में शुल्क और आय सीमा में बदलाव का अधिकार दिया गया है, ताकि करदाताओं के साथ न्याय हो और कोई प्रवासी अभाव में न धकेला जाए।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.70 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.50 | critical |
Britain invokes fiscal responsibility to justify reclaiming costs from recognized refugees.
The measure is presented as a universal rule of public accounting, overlooking the specific vulnerability of refugees.
Omitted is the detail that many refugees lack sufficient income to repay, and that integration costs are already borne by the state.
The West punishes refugees with policies that shift reception costs onto them.
The British state is personified as a hostile, unfair actor while refugees are passive victims, reinforcing a moral opposition.
The UK fiscal context and the fact that other European countries adopt similar measures are omitted.
Russia observes how Western policies backfire on their promoters, revealing the true nature of the system.
A symmetry is drawn between British actions and an image of a declining West, using the news to corroborate a narrative of systemic crisis.
Any acknowledgment of British reception efforts or practical migration management challenges is omitted.
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