
एमबाप्पे के इनकार पर गिल ने गेंद फेंकी, पैराग्वे को हराकर फ्रांस क्वार्टर फाइनल में
फिलाडेल्फिया में खेले गए तनावपूर्ण मुकाबले में एकमात्र गोल दागने वाले एमबाप्पे के हाथ मिलाने से इनकार करने के बाद पैराग्वे के गोलकीपर गिल ने उनकी पीठ पर गेंद मारी।
फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में रविवार को खेले गए विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में एक नाटकीय अंत देखने को मिला। फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर अंतिम-आठ में जगह बनाई, लेकिन मैच की समाप्ति पर पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने आक्रोश में आकर फ्रांसीसी कप्तान किलियन एमबाप्पे की पीठ पर गेंद दे मारी। असल में गिल ने हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया था, मगर एमबाप्पे अपने साथियों के साथ जश्न मनाते हुए आगे निकल गए। गिल ने बताया, ‘मैंने उनका हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन जब उन्होंने मेरी तरफ ध्यान नहीं दिया तो मैं अपना आपा खो बैठा।’ स्पेनिश मीडिया के साथ बातचीत में गिल ने आगे कहा कि ‘मैं केवल उनका अभिवादन करना चाहता था, पर ऐसा लगा कि वह अकड़ गए—उन्होंने मेरी ओर देखा तक नहीं, बस हंसते रहे।’
यह घटनाक्रम पूरे मैच के दौरान जारी तनाव का नतीजा था। भीषण गर्मी में खेले गए इस मुकाबले में पैराग्वे ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। मिडफील्डर आंद्रेस कुबास ने 34वें मिनट में एमबाप्पे को बेरहमी से पकड़ा जिससे दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए। बाद में मातियास गलार्सा ने गेंद से दूर एमबाप्पे को धक्का दिया और 77वें मिनट में हुआन होसे कासेरेस ने उनकी पिंडली पर लात मारी। दिलचस्प बात यह कि इनमें से किसी भी बेरहम चुनौती पर पैराग्वे को कोई पीला कार्ड नहीं दिखाया गया, जबकि फ्रांस के तीन खिलाड़ियों को पीला कार्ड झेलना पड़ा।
फ्रांस ने इन आक्रामक रणनीतियों का सामना करते हुए धैर्य बनाए रखा और 70वें मिनट में निर्णायक गोल किया। देसिरे दूए को डिएगो गोमेज ने पेनाल्टी क्षेत्र में गिरा दिया और वीएआर की समीक्षा के बाद रेफरी ने पेनाल्टी दे दी। एमबाप्पे ने गिल को छकाते हुए गेंद को नेट में पहुंचाया। यह टूर्नामेंट में उनका सातवां गोल था जिसने उन्हें गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी के बराबर ला खड़ा किया। गिल ने माना कि पेनाल्टी के बिना पैराग्वे मैच बचा सकता था और उन्होंने कई शानदार बचाव भी किए।
मैच के बाद फ्रांसीसी कोच डीडिए देसां ने पैराग्वे की शैली पर तंज कसते हुए कहा कि ‘उन्होंने हर तरह की चाल चली, यह ऐसा फुटबॉल नहीं जो स्टेडियम में लोगों को खींचे।’ वहीं एमबाप्पे ने कहा, ‘हमें पता था कि मुकाबला ऐसा होगा। हम भी कीचड़ में उतर सकते हैं। उन्हें लगा हम सूट-बूट में आएंगे, लेकिन हम तैयार थे।’ दक्षिण अमेरिकी दृष्टिकोण से गिल ने कहा, ‘हम दक्षिण अमेरिका में इस तरह की रगड़ के आदी हैं, उन्हें शायद नहीं। हम यही मैदान पर लाना चाहते थे।’ फ्रांस अब 10 जुलाई को क्वार्टर फाइनल में मोरक्को से भिड़ेगा, जबकि पैराग्वे इतिहास के अपने सर्वश्रेष्ठ विश्व कप अभियान के बाद बाहर हो गया।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.10 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
Mbappé showed professionalism by not reacting to Paraguay's rough tactics, and Gill's explanation merely confirms that he was the one who lost control.
The bloc uses Gill's own admission of losing his temper to validate Mbappé's composure, thereby reinforcing a narrative of French superiority and discipline.
Omits that Mbappé was actively celebrating and taunting the crowd before Gill approached, which could have contributed to the snub.
Gill's anger is understandable because Mbappé's refusal to shake hands shows arrogance.
The bloc gives direct voice to Gill's quote, 'Since Mbappé didn't pay attention, I lost temper,' making his outburst seem like a justified response to a slight.
Omits that Gill had been aggressively targeting Mbappé throughout the match, which might have influenced Mbappé's attitude.
Mbappé's arrogance is to blame; Gill simply wanted to shake hands and was humiliated.
The bloc uses a direct quote - 'Parece que se agrandó' - to paint Mbappé as egotistical, and positions Gill's narrative as the truthful account.
Omits that Mbappé had just scored the winning goal and was celebrating with teammates and fans, which could explain his distraction.
The post-match scuffle adds a strange footnote to France's victory, but both players have their own version of events.
The bloc presents the incident as an interesting story with two sides, maintaining a balanced tone through quotes from Gill and observations of Mbappé's behavior.
Omits the broader pattern of rough play by Paraguay specifically targeting Mbappé, which could contextualize the snub.
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