
पश्चिमी तट में बसने वालों ने दो मस्जिदों को जलाया, हेब्रोन समझौता रद्द करने की घोषणा से तनाव बढ़ा
इजरायली बसने वालों द्वारा रामल्लाह के उत्तर में दो गांवों की मस्जिदों में आगजनी और हेब्रोन में इब्राहीमी मस्जिद क्षेत्र पर नियंत्रण छीनने की योजना ने पश्चिमी तट में हिंसा और राजनीतिक संकट को गहरा दिया है।
बुधवार तड़के, इजरायली बसने वालों के एक समूह ने रामल्लाह के उत्तर में स्थित जिलजिलिया और मजारा अल-नुबानी गांवों की दो मस्जिदों में आग लगा दी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने मस्जिद के वुज़ू कक्ष को जलाया, दीवारों पर ‘बदला’, ‘पहाड़ी युवाओं का सलाम’ और ‘मस्जिदों की रात’ जैसे घृणास्पद नारे हिब्रू में लिखे, और भागने से पहले भारी क्षति पहुंचाई। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन इजरायली सेना के पहुंचने पर स्थिति और बिगड़ गई—सैनिकों ने आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड दागे, हालांकि कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। यह घटना पिछले कुछ दिनों में दीर दिबवान और बुरका गांवों में मस्जिदों के प्रवेश द्वार जलाए जाने के बाद हुई, जिसके सिलसिले में छह संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था।
इस हिंसा के समानांतर, इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने 1997 के हेब्रोन समझौते के एक अहम हिस्से को रद्द करने की घोषणा की, जो फिलिस्तीनी नगर परिषद को हेब्रोन के एच2 क्षेत्र—जहां इब्राहीमी मस्जिद (कुलपिताओं की गुफा) स्थित है—में योजना और निर्माण का अधिकार देता था। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने इस कदम को ‘एकतरफा, अस्वीकार्य और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ बताते हुए चेतावनी दी कि यह दो-राज्य समाधान की राजनीतिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी इसे पवित्र स्थलों की यथास्थिति के लिए खतरा माना है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाओं में, लेबनान के हिजबुल्लाह ने मस्जिद जलाए जाने की कड़ी निंदा करते हुए अरब और इस्लामी देशों से कब्जे के खिलाफ प्रयासों को एकजुट करने का आह्वान किया। इजरायली सेना ने आगजनी और भित्तिचित्रों की पुष्टि की, लेकिन दोषियों की पहचान नहीं बताई। गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिमी तट में बसने वालों की हिंसा में तेज वृद्धि हुई है; मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सैकड़ों फिलिस्तीनी गांवों पर हमले हो चुके हैं, और कई मामलों में इजरायली बलों की मौजूदगी के बावजूद दंडमुक्ति का माहौल बना हुआ है।
ये घटनाक्रम भारत और दक्षिण एशिया के लिए भी चिंताजनक हैं। पश्चिम एशिया में अस्थिरता ऊर्जा आपूर्ति और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना एक वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाता है जो सांप्रदायिक सद्भाव को कमजोर करती है—एक ऐसा मुद्दा जिससे भारत भी जूझ रहा है। हेब्रोन में एकतरफा कार्रवाई उस नाजुक संतुलन को बिगाड़ती है जो यरुशलम और अयोध्या जैसे विवादित धार्मिक स्थलों पर बातचीत के जरिए बना है, और यह संदेश देती है कि शक्ति के बल पर पवित्र स्थानों का नियंत्रण बदला जा सकता है।
फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि इजरायल को हेब्रोन समझौते से पीछे हटने और बसने वालों की हिंसा पर लगाम लगाने के लिए बाध्य किया जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगी, तो पश्चिमी तट में व्यापक टकराव और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बढ़ जाएगा। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख शक्तियों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्या कूटनीतिक दबाव से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है या हिंसा का चक्र और गहराएगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इज़राइली बसने वालों ने रामल्लाह के उत्तर में दो गांवों की मस्जिदों में आग लगा दी, वज़ू के कमरे को नुकसान पहुंचाया और दीवारों पर शत्रुतापूर्ण नारे लिखे। स्थानीय निवासियों और फ़िलिस्तीनी नागरिक सुरक्षा दल ने आग बुझाने का प्रयास किया। यह हमला फ़िलिस्तीनी पूजा स्थलों के ख़िलाफ़ चरमपंथी हिंसा की लहर का हिस्सा है।
फ़िलिस्तीनी मीडिया ने बताया कि रामल्लाह क्षेत्र में बसने वालों ने एक मस्जिद में आग लगा दी। पुलिस ने पहले ही मस्जिद के प्रवेश द्वारों और वाहनों में आगजनी के सिलसिले में छह संदिग्धों को गिरफ़्तार किया था, और एक सुरक्षा सूत्र ने बसने वालों की संलिप्तता की पुष्टि करते हुए कई स्थानों पर झड़प की घटनाएं बताईं।
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