
बारिश और बाढ़ की चेतावनी से लेकर 40°C की गर्मी तक: उत्तरी गोलार्ध में मौसम का दोहरा प्रकोप
ईरान और भारत में भारी बारिश से राहत और ख़तरा, जबकि फ्रांस, जर्मनी और इज़राइल भीषण गर्मी की चपेट में; मौसम विभाग ने अगले सप्ताह तक सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
उत्तरी गोलार्ध इस समय मौसम के दो बिल्कुल विपरीत चेहरों से जूझ रहा है। जहाँ एक ओर ईरान और भारत के कई इलाके भारी बारिश, आकस्मिक बाढ़ और तेज़ हवाओं की चपेट में हैं, वहीं दूसरी ओर फ्रांस, जर्मनी और इज़राइल रिकॉर्डतोड़ गर्मी की चेतावनियों के साये में आ गए हैं। यह दोहरा संकट एक साथ सक्रिय हुए शक्तिशाली वायुमंडलीय तंत्रों का नतीजा है, जिसने एक ही सप्ताह में कई महाद्वीपों को आपदा प्रबंधन के लिए अलर्ट पर ला दिया है।
ईरान में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संगठन ने दो मज़बूत बारिश प्रणालियों के प्रवेश के मद्देनज़र आठ उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों के लिए नारंगी चेतावनी जारी की है। पश्चिम व पूर्वी अज़रबैजान, अर्दबील, गिलान, माज़ंदरान, ख़ोरासान रज़वी और अल्बुर्ज़ की ऊँचाइयों में रगबार, ओलावृष्टि और अचानक बाढ़ की आशंका है। अधिकारियों ने नदी किनारों और मौसमी जलमार्गों पर ठहरने से सख़्त मना किया है। वहीं दूसरी तरफ़ मौसम विज्ञानी चेतावनी दे रहे हैं कि इस साल गर्मी सामान्य से कहीं अधिक तपिश भरी होगी; अधिकांश प्रांतों में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहने का अनुमान है, और केंद्रीय व ज़ाग्रोस क्षेत्रों में यह वृद्धि 5 डिग्री तक पहुँच सकती है। इस तरह ईरान एक साथ तात्कालिक बाढ़ के ख़तरे और आने वाले सप्ताहों की भीषण गर्मी, दोनों का सामना कर रहा है।
भारत की राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इसी बारिश प्रणाली का एक राहत भरा पहलू देखने को मिल रहा है। हल्की बारिश, गरज-चमक और झोंकेदार हवाओं ने प्रचंड गर्मी से काफ़ी राहत दी है और तापमान मौसमी औसत से नीचे चला गया है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार यह सुहावना दौर 21 जून तक जारी रह सकता है, हालाँकि 18 जून से पारा धीरे-धीरे फिर चढ़ने लगेगा। इसके विपरीत, ईरान के पूर्वी छोर पर स्थित सिस्तान-बलूचेस्तान और ख़ोरासान में “120-दिवसीय हवाओं” से उठे धूल भरे तूफ़ान और भारी रगबार दृश्यता घटा रहे हैं और बाढ़ का ख़तरा पैदा कर रहे हैं। यह इलाक़ा दक्षिण एशिया की सीमा से सटा होने के कारण मौसम का यह उथल-पुथल सीमापार प्रभावों की याद दिलाता है।
यूरोप में गर्मी की लहर अपने चरम की ओर बढ़ रही है। फ्रांस में छाया में भी तापमान 40°C तक पहुँचने का पूर्वानुमान है, और बुधवार से यह लहर पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगी। जर्मनी में भी एक ऊँचाई वाला वायु-खंड पारे को सप्ताहांत तक लगभग 40°C पर पहुँचा देगा। मध्य-पूर्व में इज़राइल की मौसम सेवा ने जॉर्डन घाटी के लिए लाल हीट स्ट्रेस चेतावनी, बेट शीआन और अरावा के लिए नारंगी, तथा गोलान पहाड़ियों, नेगेव और गलील क्षेत्रों के लिए पीली चेतावनी जारी की है। 21 जून को आधिकारिक तौर पर गर्मियों के आगमन के साथ ही बाढ़ और भीषण गर्मी का यह एक साथ प्रकोप इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि वैश्विक मौसम पैटर्न कितनी तेज़ी से अस्थिर हो रहे हैं और महाद्वीपों को एकजुट तैयारी की कितनी सख़्त ज़रूरत है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
फ्रांस और जर्मनी में भीषण गर्मी की लहर, तापमान 40°C तक पहुंचने की संभावना। अधिकारियों ने हीट स्ट्रेस की चेतावनी दी और सावधानी बरतने की सलाह दी। इस घटना को 'हीट व्हिप' के रूप में दर्शाया गया है, साथ ही हीट डोम के विस्तार के नक्शे भी जारी किए गए हैं।
दिल्ली और आसपास के इलाकों में बारिश और तेज़ हवाओं से भीषण गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने 21 जून तक बौछारें और गरज के साथ बारिश का अनुमान लगाया है, तापमान सामान्य से नीचे रहेगा। निवासी राहत महसूस कर रहे हैं, और लहज़ा सुखद राहत का है, अलार्म का नहीं।
संबंधित लेख
नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट का सफल फेफड़ा प्रत्यारोपण, शाही परिवार के लिए राहत भरी खबर
8 भाषाएँ · 29 स्रोत
अपराध एवं आपदाटेक्सास हाईवे पर बिजनेस जेट दुर्घटना: आग के बीच राहगीरों ने बचाई जानें, एक की मौत
8 भाषाएँ · 28 स्रोत
राजनीतिG7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप का 'मैं हूं बॉस' वाला अंदाज, दुनिया हंसी लेकिन सवाल भी उठे
11 भाषाएँ · 19 स्रोत