
कार्य समय लचीलेपन पर जर्मन गठबंधन में दरार, कोलंबिया-मेक्सिको में घंटे घटाने की पहल
जर्मनी में श्रम मंत्री के सख्त प्रस्ताव से गठबंधन में तनाव, कोलंबिया-मेक्सिको में कार्य घंटे घटाने की पहल, और स्वीडन में बीमारी वेतन पर तीखी बहस।
जर्मनी की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में कार्य समय कानून में ढील देने को लेकर गहरे मतभेद उभर आए हैं। गठबंधन समझौते में दैनिक आठ घंटे की अधिकतम सीमा के बजाय साप्ताहिक अधिकतम कार्य घंटों की अनुमति देने का वादा किया गया था, ताकि कर्मचारी परिवार और पेशे के बीच बेहतर संतुलन बना सकें। लेकिन श्रम मंत्री बेयरबेल बास (एसपीडी) द्वारा तैयार मसौदा विधेयक ने इस लचीलेपन को अत्यंत कठोर शर्तों में बाँध दिया है: साप्ताहिक मॉडल केवल उन्हीं कंपनियों के लिए खुलेगा जो सामूहिक सौदेबाजी (टैरिफ वर्ट्राग) के दायरे में आती हैं, साथ ही स्वास्थ्य सुरक्षा के विशेष नियम और हर दिन की इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। नियोक्ता संगठनों और गठबंधन सहयोगी सीडीयू/सीएसयू ने इस प्रस्ताव को ‘गठबंधन अनुबंध का खुला उल्लंघन’ और ‘अविश्वास से भरा’ करार दिया है। खुद बास ने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह इस विषय को छूना ही नहीं चाहतीं, जिससे सुधार की राह और जटिल हो गई है।
इसके विपरीत, लैटिन अमेरिका में कार्य घंटों में ठोस कटौती हो रही है। कोलंबिया में 15 जुलाई से अधिकतम साप्ताहिक कार्य समय 48 से घटकर 42 घंटे हो जाएगा, जो 2021 में शुरू हुई क्रमिक प्रक्रिया का अंतिम चरण है। यह बदलाव इस मान्यता पर आधारित है कि अधिक घंटे काम करने का मतलब अधिक उत्पादकता नहीं है – ओईसीडी में कोलंबिया सबसे अधिक घंटे काम करने के बावजूद सबसे कम उत्पादकता वाला देश था। साथ ही, आराम के दिनों में काम करने पर अधिभार 80% से बढ़ाकर 90% और अगले वर्ष 100% किया जा रहा है। मेक्सिको में भी सरकार ने 2026 से साप्ताहिक 40 घंटे की सीमा लागू करने की योजना बनाई है, जिसके तहत ओवरटाइम पर सख्त नियंत्रण और न्यूनतम मजदूरी में 13% वृद्धि का प्रावधान है। कोलंबियाई प्रगतिशील खेमे में इन सुधारों को उदारवादी केंद्र-वाम नीतियों के रूप में देखा जाता है, जो बुनियादी अधिकारों को सार्वभौमिक बनाने पर केंद्रित हैं, न कि कट्टरपंथी वाम मोड़ के रूप में।
स्वीडन में बहस कार्य समय के साथ-साथ बीमारी वेतन की शर्तों पर भी केंद्रित है। सोशल डेमोक्रैट, वामपंथी और हरित दल मिलकर कार्य सप्ताह छोटा करने और ‘कैरेंस’ (बीमारी की पहली दिन की कटौती) को समाप्त करने का समर्थन कर रहे हैं। व्यवसायिक संगठनों ने सरकारी ज्ञापन के हवाले से चेतावनी दी है कि कैरेंस हटाने से नियोक्ताओं की प्रत्यक्ष बीमारी वेतन लागत 38% बढ़कर 14.9 अरब क्रोनर हो जाएगी, और अनुपस्थिति बढ़ने से अतिरिक्त 10 अरब का बोझ पड़ सकता है। ऐतिहासिक अनुभव भी डरावना है: 1980 के दशक के अंत में कैरेंस खत्म करने के बाद स्वीडन पश्चिमी यूरोप में सबसे अधिक बीमार छुट्टी वाला देश बन गया था, जिसके चलते 1990 के दशक में इसे फिर से लागू करना पड़ा। दूसरी ओर, लिबरल पार्टी जैसी केंद्र-दक्षिण ताकतें स्कूल, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे ‘वास्तविक महत्वपूर्ण’ मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कर रही हैं, जबकि कुछ विश्लेषक मध्यमार्गी गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं।
ये घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर कार्य समय और श्रम सुरक्षा के बीच बढ़ते तनाव को रेखांकित करते हैं। जर्मनी का विवाद दिखाता है कि डिजिटल और लचीली अर्थव्यवस्था में पुराने ढाँचों को तोड़ना राजनीतिक रूप से कितना कठिन है, खासकर जब श्रमिक संघ और सामाजिक लोकतांत्रिक दल सुरक्षा उपायों को बचाना चाहते हैं। लैटिन अमेरिकी देश कानूनी कटौती के जरिए कार्य-जीवन संतुलन सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, हालाँकि उत्पादकता लाभ अभी सिद्ध होना बाकी है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह वैश्विक रुझान महत्वपूर्ण संकेत देता है। भारत के नए श्रम संहिता में चार-दिवसीय कार्य सप्ताह का विकल्प रखा गया है, लेकिन दैनिक घंटे बढ़ाकर 12 तक करने की शर्त के साथ – ठीक वैसा ही लचीलापन जिस पर जर्मनी में विवाद है। भारत जैसे विशाल अनौपचारिक क्षेत्र वाले देश में उत्पादकता, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाना और भी जटिल होगा। आने वाले वर्षों में यह बहस न केवल घंटों की संख्या पर, बल्कि काम के स्वरूप और उसके मूल्यांकन के तरीकों पर भी केंद्रित रहेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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महाद्वीपीय यूरोप में छोटे कार्य सप्ताह की बहस तीव्र राजनीतिक संघर्ष और नियोक्ता विरोध से चिह्नित है। कार्य घंटे घटाने के प्रस्तावों को खर्चीला और विचारधारात्मक बताया जा रहा है, जबकि यूनियनें और वामपंथी श्रमिक सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं। जर्मनी में गठबंधन सरकार आठ घंटे की दैनिक सीमा पर टूटने का खतरा है, रूढ़िवादी श्रम मंत्रालय पर नियमों को लचीला बनाने के बजाय सख्त करने का आरोप लगा रहे हैं।
लैटिन अमेरिका में कार्य घंटों में कमी को एक ऐतिहासिक और प्रगतिशील उपलब्धि के रूप में मनाया जा रहा है। कोलंबिया 42 घंटे के सप्ताह में परिवर्तन पूरा कर रहा है, ओईसीडी सूचियों में अपनी नकारात्मक शीर्ष रैंकिंग को पीछे छोड़ते हुए। मेक्सिको में, सरकार ओवरटाइम को समाप्त करने का आदेश देती है और 40 घंटे के सप्ताह की तैयारी कर रही है, जिसे एक सदी में सबसे महत्वपूर्ण सुधार बताया गया है।
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