
संतान का सुख चाहिए, पर जेब की चिंता सताती है: युवाओं के सपनों और हकीकत के बीच की खाई
यूएनएफपीए के एक सर्वेक्षण में 73 देशों के युवाओं ने बताया कि परिवार बनाने की चाहत बनी हुई है, लेकिन आर्थिक सुरक्षा के बिना यह सपना अधूरा रह जाता है।
राजधानी ढाका के आगरगाँव इलाके में एक किराए के फ्लैट में बैठे इमरान हुसैन अपनी पत्नी के साथ दूसरे बच्चे की योजना बना रहे थे, लेकिन हर बार हिसाब लगाते वक्त उनका माथा चिंता से सिकुड़ जाता। प्रोथम आलो से बातचीत में उन्होंने बताया कि डॉक्टर के पास बार-बार जाना, प्रसव के समय अस्पताल का खर्च, बेबी फ़ूड और डायपर, फिर स्कूल की फीस—यह सब सोचकर लगता है कि तनख्वाह तो उतनी नहीं बढ़ेगी। एक निजी कंपनी में नौकरी करने वाले इमरान का यह गणित सिर्फ उनका नहीं है; यह दुनिया भर के करोड़ों युवाओं के मन में चल रही उथल-पुथल की एक झलक है।
इसी साल यूएनएफपीए ने 'डेमोग्राफिक फ्यूचर सर्वे' जारी किया, जिसमें बांग्लादेश समेत 73 देशों के 18 से 39 साल के 1 लाख 9 हजार से अधिक युवाओं से पूछा गया कि वे रिश्तों और पितृत्व-मातृत्व के बारे में क्या सोचते हैं। नतीजे चौंकाने वाले थे: हर 10 में से 8 युवा मानते हैं कि बच्चे संसार में जो खुशी लाते हैं, वही माँ-बाप बनने की सबसे बड़ी वजह है। लेकिन ठीक उतने ही बड़े अनुपात—88 प्रतिशत—ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा इसके लिए पहली शर्त है, और 87 प्रतिशत ने स्थायी नौकरी को अनिवार्य बताया। इटली की बोकोनी यूनिवर्सिटी की जनसांख्यिकीविद् लेतिज़िया मेनकारिनी के अनुसार, यह सर्वेक्षण साबित करता है कि युवा परिवार से मुँह नहीं मोड़ रहे, बल्कि वे उन पूर्व-शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे जिन्हें वे खुद ज़रूरी मानते हैं—यानी अपना घर और एक स्थिर आय।
दक्षिण एशिया में यह विरोधाभास और गहरा है। बांग्लादेश की एक चौथाई से अधिक आबादी 15 से 29 साल के युवा हैं, लेकिन लगभग आधी लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती है, और किशोरी मातृत्व दर अब भी ऊँची है। भारत में मीडियन उम्र 28 साल है और कामकाजी आबादी का अनुपात अपने चरम पर है, फिर भी प्रजनन दर 1.9 पर आ गई है—प्रतिस्थापन स्तर से नीचे। मेक्सिको में युवा जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अनिश्चितता का हवाला देते हैं; अर्जेंटीना में एक दशक में यह मानने वालों का प्रतिशत 77 से गिरकर 46 हो गया कि संतान सुखी जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है। इटली में मध्य वर्ग पिस रहा है, और युवतियाँ तब तक माँ बनने से हिचकती हैं जब तक उनके पास स्थिर नौकरी न हो।
यह सब एक ऐसे दौर में हो रहा है जब दक्षिण एशिया के सामने जनसांख्यिकीय लाभांश का सुनहरा मौका है, लेकिन अगर युवाओं की आकांक्षाओं को हवा न दी गई तो यह मौका बोझ में बदल सकता है। सर्वेक्षण बताता है कि दो-तिहाई युवा भविष्य को लेकर आशावादी हैं, फिर भी परिवार बनाने की चाह और उसे वहन करने की क्षमता के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है। ढाका के उस किराए के कमरे में बैठा इमरान हुसैन जब डायपर और स्कूल फीस का जोड़-घटाव करता है, तो वह सिर्फ एक बांग्लादेशी पिता की चिंता नहीं जी रहा—वह एक ऐसी पीढ़ी की धड़कन सुन रहा है जो परिवार का सपना तो देखती है, लेकिन उसे हकीकत की ज़मीन पर उतारने के लिए ज़रूरी सीढ़ियाँ नहीं पा रही।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
| जापानी-कोरियाई प्रेस | −0.50 | critical |
बांग्लादेश सरकार परिवार नियोजन सुनिश्चित करने में विफल रही है, जिससे देश का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
यह गुट चिंताजनक आंकड़ों को उजागर करके और सरकारी उपेक्षा को दोष देकर अपना मामला बनाता है, जिससे तात्कालिकता की भावना पैदा होती है।
यह गुट प्रजनन दर में गिरावट के वैश्विक रुझान और आर्थिक बाधाओं को छोड़ देता है जो युवाओं को बच्चे पैदा करने में देरी करने के लिए प्रेरित करते हैं, जो अन्य गुटों में केंद्रीय हैं।
अर्जेंटीना का समाज विकसित हो रहा है, और घटती प्रजनन दर प्रगति का संकेत है, समस्या नहीं।
यह गुट प्रवृत्ति को विकास और व्यक्तिगत पसंद के प्राकृतिक परिणाम के रूप में प्रस्तुत करके सामान्य बनाता है, अपने रुख का समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक सांस्कृतिक डेटा का उपयोग करता है।
यह गुट उन आर्थिक और सामाजिक दबावों को छोड़ देता है जो निःसंतानता की ओर ले जाते हैं, साथ ही बढ़ती उम्र की आबादी के संभावित नकारात्मक परिणामों को भी, जो अन्य गुटों में उजागर किए गए हैं।
यूरोपीय युवा बच्चे पैदा करने को तैयार हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था उन्हें विफल कर रही है, विशेष रूप से मध्यम वर्ग को।
यह गुट वर्ग-आधारित विश्लेषण का उपयोग करके तर्क देता है कि आर्थिक स्थितियां, सांस्कृतिक बदलाव नहीं, मूल कारण हैं, आकांक्षाओं पर सर्वेक्षण डेटा का हवाला देते हुए।
यह गुट निःसंतानता की ओर सांस्कृतिक बदलाव और घटती प्रजनन दर के सकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ परिवारों का समर्थन करने में सरकारी नीतियों की भूमिका को छोड़ देता है।
जापानी महिलाओं को बच्चे न होने के लिए अन्यायपूर्ण रूप से आंका जाता है, भले ही समाज उनके लिए काम और परिवार को संयोजित करना कठिन बना देता है।
यह गुट सामाजिक मानदंडों और वास्तविकता के बीच अंतर को उजागर करने के लिए व्यक्तिगत आख्यानों और अनुमानों का उपयोग करता है, निःसंतान महिलाओं के लिए सहानुभूति जगाता है।
यह गुट अन्य गुटों में जोर दी गई आर्थिक और आवास बाधाओं के साथ-साथ जनसंख्या में गिरावट की व्यापक जनसांख्यिकीय चिंताओं को छोड़ देता है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ईरान के नए सर्वोच्च नेता का बदले का ऐलान, ट्रंप की धमकी से बढ़ा पश्चिम एशिया में तनाव
6 भाषाएँ · 18 स्रोत
Economy & Markets सेऋण, जनसांख्यिकी और नीति: दुनिया के आवास बाजारों में तीन बड़े बदलाव
4 भाषाएँ · 6 स्रोत
Technology सेओपनएआई का नया एआई एजेंट ChatGPT Work लॉन्च, एटलस ब्राउज़र का अंत
7 भाषाएँ · 7 स्रोत