
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अमेरिका-ईरान तनाव पर गहरी चिंता जताई, संयम की अपील
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने टेलीफोन पर बातचीत में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के बावजूद बढ़ते तनाव को शांति प्रयासों के लिए हानिकारक बताया।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच शनिवार को हुई टेलीफोन वार्ता में दोनों पक्षों ने अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव वृद्धि पर “गहरी चिंता” व्यक्त की। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि पुनः संघर्ष किसी के हित में नहीं है और यह क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के प्रयासों को कमजोर करता है। इशाक डार ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और मध्यस्थता प्रयासों को सार्थक परिणाम तक पहुँचाने के लिए आवश्यक समय व स्थान देने की अपील दोहराई।
यह वार्ता ऐसे समय हुई जब जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन” पर हस्ताक्षर हुए थे। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय और क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते का नाम इस्लामाबाद की मध्यस्थ भूमिका को मान्यता देते हुए रखा गया था। पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व तनाव के दौरान पाकिस्तान एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है, और इसी संदर्भ में सऊदी अरब ने भी जारी कूटनीतिक प्रयासों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया तथा तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने के महत्व पर बल दिया।
इसी दिन जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी और कतर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी के बीच भी दूरभाष वार्ता हुई। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दोनों मंत्रियों ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने, तनाव वृद्धि को समाप्त करने तथा ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम समझौते और आपसी सहमति के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने पर चर्चा की। उन्होंने तनाव समाप्त करने और संकट के समाधान के रूप में बातचीत की ओर लौटने की आवश्यकता पर जोर दिया। सफादी ने कतर द्वारा समझौते के क्रियान्वयन और स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की, और दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर भी बात की।
ये दोनों उच्च-स्तरीय संपर्क एक व्यापक क्षेत्रीय कूटनीतिक सक्रियता को रेखांकित करते हैं जिसका उद्देश्य अमेरिका-ईरान तनाव को नियंत्रित करना और मध्यस्थता के लिए राजनीतिक स्थान बनाए रखना है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वे आपसी संपर्क बनाए रखेंगे, जबकि जॉर्डन और कतर ने खाड़ी सहयोग परिषद के देशों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर एकजुटता दिखाई। सभी पक्षों ने मध्यस्थता प्रयासों को समय देने और कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता देने की वकालत की, हालांकि किसी ठोस अगले कदम की घोषणा नहीं की गई। फिलहाल, क्षेत्रीय कूटनीति का ध्यान मौजूदा समझौतों को बचाए रखने और पुनः संघर्ष को रोकने पर केंद्रित है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
ईरान और उसके सहयोगी दोहराते हैं कि तनाव किसी के लिए लाभदायक नहीं है और इस्लामाबाद समझौते को संरक्षित किया जाना चाहिए।
चिंता को सार्वभौमिक और समझौते को एकमात्र आधार के रूप में प्रस्तुत करके, यह ईरानी स्थिति को वैध बनाता है।
खाड़ी राज्य संयम और पाकिस्तानी मध्यस्थता के समर्थन का आह्वान करते हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका और वार्ता की आवश्यकता पर जोर देकर, यह दोषारोपण से बचता है और तटस्थ रुख बनाए रखता है।
लेवंत और मगरेब देश संवाद और तनाव पर नियंत्रण के महत्व पर जोर देते हैं।
तनाव कम करने और मध्यस्थता के समर्थन के आह्वान को दोहराकर, यह तनाव वृद्धि के खिलाफ क्षेत्रीय सहमति बनाता है।
लैटिन अमेरिका अलगाव के साथ देखता है, बिना पक्ष लिए चिंता दर्ज करता है।
बिना टिप्पणी के तथ्यों की रिपोर्ट करके, यह निष्पक्ष पर्यवेक्षक की स्थिति ग्रहण करता है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
वैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश की मजबूती और डिजिटल वित्तीय जोखिमों का दबाव
5 भाषाएँ · 8 स्रोत
Technology सेAI कौशल के लिए प्रीमियम, अन्य भूमिकाओं में ठहराव: वैश्विक श्रम बाजार का नया विभाजन
1 भाषा · 3 स्रोत
Science & Health सेखुशी का राज़: रिश्ते, सीखने की जिज्ञासा और कृतज्ञता, दौलत नहीं
3 भाषाएँ · 7 स्रोत