
अफ़ग़ानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप, दिल्ली-एनसीआर और पाकिस्तान तक झटके
शनिवार शाम आए गहरे भूकंप से पूरे दक्षिण एशिया में कंपन महसूस किया गया, हालांकि तत्काल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
अफ़ग़ानिस्तान के हिंदू कुश पर्वतमाला क्षेत्र में शनिवार शाम 7:04 बजे (स्थानीय समय) 6.2 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके झटके अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी प्रांतों से लेकर पाकिस्तान, भारत के दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ तक महसूस किए गए। ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के कई इलाकों में भी कंपन दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) और भारतीय राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफ़ग़ानिस्तान में ज़मीन से लगभग 208 से 215 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
गहराई अधिक होने के कारण सतह पर क्षति की आशंका कम रही, लेकिन कंपन इतने व्यापक थे कि काबुल, स्वात घाटी, इस्लामाबाद, श्रीनगर और नोएडा-गुरुग्राम जैसे शहरों में लोग एहतियातन इमारतों से बाहर निकल आए। अफ़ग़ानिस्तान के बाल्ख़, बदख़्शां, नंगरहार और ख़ोस्त प्रांतों में भी तेज़ झटके महसूस किए गए। समाचार एजेंसियों के संवाददाताओं ने काबुल में एक इमारत की भीतरी दीवार पर बड़ी दरार देखी, हालांकि कहीं से भी तत्काल किसी हताहत या बड़े ढांचागत नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
यह भूकंप ऐसे समय आया जब पिछले चौबीस घंटों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कम से कम चार मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जा चुके थे, जिनमें सबसे शक्तिशाली 5.5 तीव्रता का झटका शनिवार सुबह 8:36 बजे आया। इनसे दूरदराज़ के इलाकों में पांच लोग घायल हुए और कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए। विशेषज्ञ इस पूरे क्षेत्र को भारतीय और यूरेशियाई टेक्टॉनिक प्लेटों के टकराव क्षेत्र में स्थित बताते हैं, जहां हिंदू कुश और हेरात जैसी सक्रिय भ्रंश रेखाएं लगातार भूकंपीय जोखिम पैदा करती हैं।
अफ़ग़ानिस्तान में अप्रैल 2026 में 5.8 तीव्रता के भूकंप से 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि अगस्त 2025 में 6.0 तीव्रता के एक उथले भूकंप ने पूर्वी पहाड़ी गांवों को तबाह कर 2,200 से अधिक लोगों की जान ले ली थी। दशकों के संघर्ष से कमज़ोर पड़ी ग्रामीण बस्तियों में मकानों की खराब बनावट और पहाड़ी इलाकों में संचार व ढांचागत सीमाएं आपदा प्रतिक्रिया को जटिल बनाती रही हैं। फ़िलहाल, अफ़ग़ानिस्तान और प्रभावित पड़ोसी देशों के अधिकारी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.50 | critical |
The Iranian regime, through its media, quantifies the tragedy with official figures and economic damage, aligning with the Venezuelan government's narrative.
The use of precise numbers (deaths, injuries, billions of dollars) creates an aura of objectivity and urgency, shifting focus to the need for aid and the country's resilience.
The human and individual aspect of the tragedy, such as the footballer's family story that appears in other blocs, is omitted.
Russia, through its agencies, merely records official data without adding interpretation, presenting itself as a neutral observer.
The choice to cite sources such as EFE and the Venezuelan National Assembly president lends authority, while the absence of commentary avoids taking sides.
The estimate of economic damage ($6.7 billion) that appears in the Iranian bloc is omitted.
Mediterranean Europe, through Italian media, gives voice to the innocent victim and family grief, humanizing the disaster.
The choice to focus on a single emblematic case (mother and daughter) evokes empathy and outrage, making the news accessible and engaging.
The overall death toll and economic damage figures available in other blocs are omitted.
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