
विश्व कप से विदाई के बाद कांगो के कोच को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिली पिता के निधन की दुखद सूचना
इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 की हार के बाद मीडिया से बात कर रहे सैबेस्टियन डेसाब्रे को टीम प्रवक्ता ने सार्वजनिक रूप से पिता के देहांत की जानकारी दी, जिससे पूरा हॉल सन्न रह गया।
अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में बुधवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस का आखिरी सवाल खत्म ही हुआ था कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के मीडिया अधिकारी जेरी कलेमो ने अचानक माइक संभाला। उन्होंने फ्रेंच में कहा, “हम घोषणा करते हैं कि कोच ने अपने पिता को खो दिया है। हमारी हार्दिक संवेदनाएं।” कोच सैबेस्टियन डेसाब्रे, जो अभी-अभी अपनी टीम के ऐतिहासिक विश्व कप सफर के अंत का विश्लेषण कर रहे थे, एक पल के लिए स्तब्ध रह गए। उनके चेहरे पर अविश्वास और गहरा सदमा साफ झलक रहा था। उन्होंने धीमी आवाज में “मर्सी” (धन्यवाद) कहा और तुरंत कुर्सी छोड़कर हॉल से बाहर चले गए। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दुनिया भर के खेल प्रशंसकों ने इसे दिल दहला देने वाला क्षण बताया।
यह भावनात्मक झटका उस मैच के कुछ ही मिनटों बाद आया जिसमें कांगो ने इंग्लैंड के खिलाफ 75 मिनट तक 1-0 की बढ़त बनाए रखी। ब्रायन सिपेंगा ने सातवें मिनट में गोल कर कांगो को सपने जैसी शुरुआत दी थी। लेकिन इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने 75वें और 86वें मिनट में दो गोल दागकर स्कोर 2-1 कर दिया और टीम को अंतिम-16 में पहुंचा दिया। कांगो के गोलकीपर लियोनेल म्पासी ने कई बेहतरीन बचाव किए, जिनमें से एक पर जूड बेलिंगहम ने सराहना में उन्हें गले लगा लिया। म्पासी ने बाद में मुस्कुराते हुए कहा, “मैंने अपना शरीर विज्ञान को समर्पित कर दिया।”
डेसाब्रे की कोचिंग में कांगो ने 1974 के बाद पहली बार विश्व कप में वापसी की और पहली बार नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। तब देश ज़ैरे के नाम से खेला था और बिना कोई अंक या गोल किए तीन मैचों में 14 गोल खाकर बाहर हो गया था। इस बार ग्रुप के में उन्होंने उज़्बेकिस्तान को 3-1 से हराकर पहली विश्व कप जीत दर्ज की, पुर्तगाल को 1-1 की बराबरी पर रोका और कोलंबिया से 0-1 से हार के बावजूद चार अंकों के साथ सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान की टीम के रूप में अगले दौर में जगह बनाई। अफ्रीकी मीडिया ने इसे महाद्वीप के फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक करार दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई इस घटना पर वैश्विक प्रतिक्रिया तीव्र रही। यूरोपीय समाचार पत्रों ने इसे “अविश्वसनीय और हृदयविदारक” बताया, जबकि एशियाई मीडिया ने इस बात पर सवाल उठाए कि क्या कोच को यह सूचना पहले से थी या उन्होंने वहीं पहली बार सुना। फ्रांसीसी अखबार ‘ला दोफिने’ ने लिखा कि सूचना देने का तरीका “अनाड़ी” था। भारतीय खेल पत्रकारिता में इस प्रसंग ने खिलाड़ियों और कोचों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहस छेड़ दी, विशेषकर उच्च दबाव वाले टूर्नामेंटों के दौरान।
इंग्लैंड अब रविवार को मेक्सिको सिटी के एज़्टेका स्टेडियम में सह-मेज़बान मेक्सिको से भिड़ेगा। कांगो की टीम स्वदेश लौटेगी, लेकिन डेसाब्रे के लिए यह सफर एक अपूरणीय व्यक्तिगत क्षति के साथ समाप्त हुआ।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जर्मन मीडिया इस घोषणा को एक असंवेदनशील घोटाले के रूप में देखती है। प्रेस अधिकारी ने अचानक कोच के पिता की मृत्यु की सूचना दी, जिससे आक्रोश फैल गया। अधिकारी के लिए व्यक्तिगत परिणामों की संभावना जताई जा रही है।
लैटिन अमेरिकी मीडिया इस दृश्य को हृदयविदारक और अविश्वसनीय बताती है। कोच को एलिमिनेशन के बाद गहरे दुख के क्षण में लाइव यह खबर मिली। इस घटना को एक क्रूर भावनात्मक आघात के रूप में देखा जाता है।
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