
यूक्रेन: नाफ्तोगाज प्रमुख कोरेत्स्की नए प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री की छंटनी पर सड़कों पर विरोध
यूक्रेनी संसद ने सर्गेई कोरेत्स्की को प्रधानमंत्री नियुक्त किया, वहीं रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव की बर्खास्तगी के खिलाफ कीव समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए।
यूक्रेन की वर्खोव्ना राडा ने 16 जुलाई 2026 को राज्य ऊर्जा कंपनी नाफ्तोगाज के प्रमुख सर्गेई कोरेत्स्की को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। 289 सांसदों के समर्थन से पारित यह निर्णय राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की उस घोषणा के बाद आया, जिसमें उन्होंने सरकारी फेरबदल को 'राजनीतिक रणनीति में बदलाव' का हिस्सा बताया था। कोरेत्स्की ने संसद में कहा कि उनकी सरकार 'रक्षा, आर्थिक विकास और यूरोपीय एकीकरण' पर केंद्रित होगी। ज़ेलेंस्की ने उन्हें इस पद के लिए 'सबसे तैयार' उम्मीदवार बताया, खासकर आगामी सर्दियों में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से, जब रूसी हमलों से बुनियादी ढांचे को खतरा है। कोरेत्स्की इससे पहले यूक्रनाफ्ता और नाफ्तोगाज का नेतृत्व कर चुके हैं।
इस फेरबदल के केंद्र में रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव की बर्खास्तगी भी है, जिसके खिलाफ कीव, ओडेसा, ल्वीव और द्निप्रो जैसे शहरों में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने 'जो काम कर रहा है, उसे तोड़ो मत' जैसे नारे लगाए। यूक्रेनी मीडिया के अनुसार, फेदोरोव ने स्वयं पुष्टि की कि उनका सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ ऑलेक्ज़ेंडर सिर्स्की के साथ टकराव चल रहा था। वहीं पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि फेदोरोव ने रक्षा बजट में भ्रष्टाचार रोकने और कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाले अनुबंधों को अवरुद्ध करने का प्रयास किया था, जिससे प्रभावशाली हस्तियां नाराज हो गईं। यूक्रेनी वायु सेना के उप कमांडर पावलो येलिज़ारोव ने फेदोरोव के समर्थन में इस्तीफा दे दिया और इसे 'देश की रक्षा क्षमता के लिए बड़ी बुराई' करार दिया।
रूसी मीडिया स्रोतों के अनुसार, यह फेरबदल पश्चिमी साझेदारों को यह दिखाने के लिए किया गया कि कीव सत्ता के नवीनीकरण और भ्रष्टाचार से लड़ने में सक्षम है। इन रिपोर्टों में दावा किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिदेंको की विदाई राष्ट्रपति प्रशासन प्रमुख आंद्रेई येरमाक से जुड़े भ्रष्टाचार जांच के चलते हुई, और नए प्रधानमंत्री कोरेत्स्की के तैमूर मिंदिच से संबंध हैं, जिन्हें 'ज़ेलेंस्की का खजांची' कहा जाता था और जो एक बड़ी ऊर्जा घोटाले की जांच के दायरे में हैं। हालांकि, यूक्रेनी पक्ष ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
स्विरिदेंको की सरकार मात्र एक वर्ष ही चली; इससे पहले मार्च 2020 से जुलाई 2025 तक डेनिस श्मिहाल प्रधानमंत्री रहे। यूक्रेनी सांसदों के अनुसार, स्विरिदेंको को अमेरिका में राजदूत बनाया जा सकता है। नई सरकार के मंत्रियों पर मतदान बाद में होना है। ज़ेलेंस्की ने कहा कि वे फेदोरोव और सिर्स्की दोनों को हटाना चाहते थे, लेकिन अभी ऐसा संभव नहीं है। यह घटनाक्रम यूक्रेन के लिए ऐसे समय में हुआ है जब युद्ध जारी है और ऊर्जा अवसंरचना पर रूसी हमलों की आशंका बनी हुई है। पश्चिमी सहयोगी इस बात पर नज़र रखेंगे कि नया नेतृत्व सैन्य सुधारों और भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों को किस दिशा में ले जाता है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
Russia projects Ukrainian instability as proof of a corrupt system.
The narrative selects Fedorov's resignation and protests to generalize a picture of systemic crisis, omitting the wartime context that motivates the reshuffle.
The war context and the need to prepare for winter are omitted, which are present in European and Atlantic sources.
The West acknowledges the need for the reshuffle but highlights the shadows of corruption.
The narrative balances strategic necessity with criticism, using protests as a warning sign without condemning the entire process.
The near-unanimous vote (289 to 1) indicating broad parliamentary support is omitted.
India observes the Ukrainian reshuffle from afar without taking sides.
The narrative limits itself to reporting essential facts, avoiding any interpretation or emotional contextualization.
The war context and winter implications, present in European and Atlantic sources, are omitted.
Northern Europe views the reshuffle as a pragmatic move for energy security.
The narrative focuses on concrete challenges (winter, energy) and the new premier's experience, avoiding politicization of protests.
Protests and corruption allegations are omitted, which are present in Indian and Atlantic sources.
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