
इंडोनेशिया के आचे में टिकटॉक पर चुंबन प्रसारित करने पर युगल को सार्वजनिक रूप से बेंत मारे गए
शरिया अदालत ने अविवाहित जोड़े को 21-21 कोड़े लगाने की सज़ा सुनाई, जिसे कम से कम सौ लोगों ने देखा; मानवाधिकार संगठनों ने इसकी निंदा की है।
इंडोनेशिया के आचे प्रांत में एक शरिया अदालत ने बिना विवाह के टिकटॉक लाइवस्ट्रीम के दौरान चुंबन करने के दोषी एक 22 वर्षीय पुरुष और 25 वर्षीय महिला को सार्वजनिक रूप से 21-21 बेंत मारने की सज़ा दी। बांदा आचे के बुस्तानुस्सलातिन सिटी पार्क में बृहस्पतिवार को लबादा और हुड पहने अधिकारियों ने यह सज़ा दी, जिसे कम से कम सौ लोगों ने देखा। यह पहला मामला है जब प्रांत में सोशल मीडिया के ज़रिए शरिया उल्लंघन पर शारीरिक दंड दिया गया।
आचे की शरिया पुलिस के प्रमुख मुहम्मद रिज़ाल के अनुसार, यह जोड़ा “स्पष्ट रूप से इस्लामी शरिया का उल्लंघन” कर रहा था। स्थानीय निवासी ऐनी नधीरा ने इसे दूसरों के लिए सबक़ बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर सावधानी बरतने की ज़रूरत है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडोनेशिया के कार्यकारी निदेशक उस्मान हामिद ने इस सज़ा को “अत्यधिक” बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार अनुचित भले ही हो, लेकिन इसके लिए क़ैद या बेंत मारना अपराध की श्रेणी में नहीं आना चाहिए। संगठन ने इसे क्रूर, अमानवीय और मानवीय गरिमा को गिराने वाला बताते हुए इसकी समाप्ति की माँग की है।
यह घटनाक्रम इंडोनेशिया के धर्मनिरपेक्ष संविधान और आचे की विशेष स्वायत्तता के बीच तनाव को रेखांकित करता है। केंद्र सरकार ने 2006 में अलगाववादी संघर्ष समाप्त करने के शांति समझौते के तहत प्रांत को धार्मिक क़ानून लागू करने का अधिकार दिया था, जिसे 2015 में ग़ैर-मुस्लिमों पर भी लागू कर दिया गया। अब यह क़ानून डिजिटल अभिव्यक्ति तक फैल गया है, जहाँ व्यभिचार, समलैंगिक संबंध, जुआ, शराब पीने और स्त्रियों के तंग कपड़े पहनने जैसे मामलों में 100 कोड़े तक की सज़ा का प्रावधान है।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य में, यह मामला धार्मिक क़ानूनों और डिजिटल निगरानी के अंतर्संबंध को सामने लाता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में ईशनिंदा क़ानूनों के तहत सोशल मीडिया सामग्री पर कार्रवाई होती रही है, लेकिन आचे का यह पहला मामला है जहाँ लाइवस्ट्रीम पर निजी पल साझा करने पर शारीरिक दंड दिया गया। इंडोनेशिया ने अमानवीय दंडों के उन्मूलन से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संधि की पुष्टि की है, फिर भी आचे में सार्वजनिक बेंत मारने की प्रथा जारी है।
फ़िलहाल सज़ा पूरी हो चुकी है और अदालत ने सबूत के तौर पर मोबाइल फ़ोन व यूएसबी ड्राइव ज़ब्त कर नष्ट करने का आदेश दिया है। अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद आचे प्रशासन ने क़ानून में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया है, जबकि मानवाधिकार संगठन इस प्रथा को समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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आचेह में शरिया कानून सार्वजनिक शारीरिक दंड के साथ लागू होता है: टिकटॉक पर एक चुंबन के लिए एक युवा जोड़े को 21-21 कोड़े मारे गए, जो नकाबपोश लोगों ने सौ दर्शकों के सामने दिए। यह घटना आधुनिकता और कट्टरता के बीच इंडोनेशिया के नाजुक संतुलन को उजागर करती है, और सजा की क्रूरता पर आक्रोश पैदा करती है।
इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में एक युवा जोड़े को टिकटॉक लाइवस्ट्रीम पर चुंबन के लिए शरिया अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद 21-21 कोड़े मारे गए। सार्वजनिक पार्क में नकाबपोश अधिकारियों द्वारा दी गई यह सजा कम से कम 100 लोगों ने देखी। यह मामला क्षेत्र में इस्लामी कानून के सख्त प्रवर्तन को रेखांकित करता है।
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