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स्वास्थ्य और विज्ञानसोमवार, 15 जून 2026

डिमेंशिया का घटता खतरा और मेटाबॉलिज्म के नुस्खे: सेहत पर नए शोध की बड़ी तस्वीर

उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया की दरें गिर रही हैं, जबकि आहार और जीवनशैली में छोटे बदलाव मधुमेह, कैंसर और मोटापे से बचाव के रास्ते खोल रहे हैं।

दुनिया भर में उम्रदराज़ आबादी बढ़ने के बावजूद, डिमेंशिया को लेकर एक उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है: अमीर देशों में किसी भी उम्र में इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना पिछले कुछ दशकों में हर पीढ़ी के साथ करीब 13 प्रतिशत घटी है। यह गिरावट बताती है कि जीवनशैली, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का असर दिमाग पर गहरा होता है। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में पाया कि तांबे पर आधारित एक दवा Cu(ATSM) अल्ज़ाइमर से जुड़े ज़हरीले प्रोटीन को कम करके याददाश्त सुधार सकती है। दूसरी ओर, रूस और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने 15 साल के अध्ययनों की समीक्षा के बाद बताया कि हाई-फैट, लो-कार्ब कीटो डाइट दिमागी कोशिकाओं को वैकल्पिक ईंधन (कीटोन बॉडीज़) देकर पार्किंसन और अल्ज़ाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से बचाव कर सकती है।

हालांकि, दिमाग की सेहत का राज़ काफी हद तक मेटाबॉलिज्म की बुनियाद पर टिका है, और यहीं एक खामोश खतरा छिपा है। ब्रिटेन के डॉक्टर डोमिनिक ग्रीनियर ने आगाह किया है कि दुनिया भर में लाखों लोग प्रीडायबिटीज़ के साथ जी रहे हैं, जिसमें ब्लड शुगर बढ़ा हुआ होता है लेकिन लक्षण नहीं दिखते। इंडोनेशिया में तो किशोरों में टाइप-2 डायबिटीज़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिसके पीछे स्क्रीन टाइम, खराब नींद और मीठे खाने की लत को जिम्मेदार ठहराया गया है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह चेतावनी और भी अहम है, जहां चावल रोज़ाना की थाली का केंद्र है। विशेषज्ञ सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या ऑर्गेनिक किस्में अपनाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। साथ ही, कुवैत के दासमान डायबिटीज़ इंस्टीट्यूट के एक चौंकाने वाले अध्ययन ने दिखाया कि डाइट से चीनी को पूरी तरह हटा देना आंत और मेटाबॉलिज्म के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए शहद बनाम चीनी की बहस में विशेषज्ञ एक संतुलित रुख अपनाते हैं: शहद में एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व ज़रूर हैं, लेकिन इसकी मात्रा भी सीमित रखनी चाहिए।

रोज़मर्रा के खान-पान में छोटे-छोटे फेरबदल कई बीमारियों से बचाव की चाबी बन सकते हैं। मैक्सिको के बाज़ारों में आसानी से मिलने वाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्ज़ियों से तैयार नाश्ता कोशिकाओं को बुढ़ापे से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। वहीं, अमेरिकी आहार विशेषज्ञों ने वज़न घटाने के लिए ग्रीक योगर्ट, स्ट्रॉबेरी और ग्रेनोला से बने पारफेट को सबसे असरदार सुबह का भोजन बताया है, क्योंकि प्रोटीन और फाइबर भूख को काबू में रखते हैं। दलिया, बेरीज़ और एवोकाडो जैसे विकल्प भी इसी सूची में शामिल हैं। योगर्ट के फायदे यहीं नहीं रुकते: एक अध्ययन के अनुसार यह आंत के माइक्रोबायोम को संतुलित करके कोलन कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है, और नींबू-एवोकाडो के साथ मिलकर दिल की सेहत के लिए बेहतरीन ड्रेसिंग बनाता है। कॉफी प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है—31 बड़े अध्ययनों के विश्लेषण से पता चला कि नियमित कॉफी पीने वाली महिलाओं, खासकर मेनोपॉज़ के बाद, में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा कम रहता है।

सेहत की इस तस्वीर में नींद और कपड़ों की भूमिका भी अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन्हें रात में गर्मी लगती है, उनके लिए लिनन बिस्तर कॉटन से बेहतर है, क्योंकि यह ज़्यादा हवादार और टिकाऊ होता है। वहीं पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीने की बदबू को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि वे तेल सोख लेते हैं लेकिन नमी नहीं। ये सब जानकारियां एक समेकित संदेश देती हैं: सेहत कोई एक जादुई नुस्खा नहीं, बल्कि दिमाग, आंत, नींद और दैनिक आदतों का आपसी तालमेल है। भारत जैसे देश में, जहां पारंपरिक भोजन से प्रोसेस्ड फूड की ओर रुझान बढ़ रहा है, यह वैश्विक शोध समय रहते सचेत होने और छोटे, विज्ञान-समर्थित कदम उठाने की प्रेरणा देता है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

59%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa atlantica / anglosferaStampa sud-est asiatica
Stampa atlantica / anglosfera/ progressista
trionfopragmatismo

नए शोध से पता चलता है कि उम्र-विशिष्ट डिमेंशिया का खतरा घट रहा है, जो बढ़ती उम्र की आबादी के बीच उम्मीद जगाता है। शिंगल्स का टीका लगवाने और प्रसंस्कृत अनाज के बजाय साबुत अनाज की ब्रेड चुनने जैसे सरल कदम मस्तिष्क और चयापचय स्वास्थ्य को सहारा दे सकते हैं। समग्र संदेश सशक्तिकरण का है: हमारे संज्ञानात्मक भविष्य पर हमारा नियंत्रण हमारी सोच से कहीं अधिक है।

Stampa sud-est asiatica
allarmepragmatismopaternalismo

स्वास्थ्य अधिकारी युवाओं में बढ़ते मधुमेह को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, जो शर्करा युक्त आहार और गतिहीन जीवनशैली से प्रेरित है। व्यावहारिक सुझाव चावल के सेवन के तरीके में बदलाव, संतुलित नाश्ते का चयन और चीनी को पूरी तरह खत्म न करने पर जोर देते हैं। इस बीच, तांबे पर आधारित एक दवा अल्जाइमर के विषैले प्रोटीन को कम करने की क्षमता दिखाती है, लेकिन प्रमुख स्वर तत्काल जीवनशैली सुधार का है।

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सोमवार, 15 जून 2026

डिमेंशिया का घटता खतरा और मेटाबॉलिज्म के नुस्खे: सेहत पर नए शोध की बड़ी तस्वीर

उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया की दरें गिर रही हैं, जबकि आहार और जीवनशैली में छोटे बदलाव मधुमेह, कैंसर और मोटापे से बचाव के रास्ते खोल रहे हैं।

दुनिया भर में उम्रदराज़ आबादी बढ़ने के बावजूद, डिमेंशिया को लेकर एक उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है: अमीर देशों में किसी भी उम्र में इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना पिछले कुछ दशकों में हर पीढ़ी के साथ करीब 13 प्रतिशत घटी है। यह गिरावट बताती है कि जीवनशैली, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का असर दिमाग पर गहरा होता है। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में पाया कि तांबे पर आधारित एक दवा Cu(ATSM) अल्ज़ाइमर से जुड़े ज़हरीले प्रोटीन को कम करके याददाश्त सुधार सकती है। दूसरी ओर, रूस और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने 15 साल के अध्ययनों की समीक्षा के बाद बताया कि हाई-फैट, लो-कार्ब कीटो डाइट दिमागी कोशिकाओं को वैकल्पिक ईंधन (कीटोन बॉडीज़) देकर पार्किंसन और अल्ज़ाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से बचाव कर सकती है।

हालांकि, दिमाग की सेहत का राज़ काफी हद तक मेटाबॉलिज्म की बुनियाद पर टिका है, और यहीं एक खामोश खतरा छिपा है। ब्रिटेन के डॉक्टर डोमिनिक ग्रीनियर ने आगाह किया है कि दुनिया भर में लाखों लोग प्रीडायबिटीज़ के साथ जी रहे हैं, जिसमें ब्लड शुगर बढ़ा हुआ होता है लेकिन लक्षण नहीं दिखते। इंडोनेशिया में तो किशोरों में टाइप-2 डायबिटीज़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिसके पीछे स्क्रीन टाइम, खराब नींद और मीठे खाने की लत को जिम्मेदार ठहराया गया है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह चेतावनी और भी अहम है, जहां चावल रोज़ाना की थाली का केंद्र है। विशेषज्ञ सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या ऑर्गेनिक किस्में अपनाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। साथ ही, कुवैत के दासमान डायबिटीज़ इंस्टीट्यूट के एक चौंकाने वाले अध्ययन ने दिखाया कि डाइट से चीनी को पूरी तरह हटा देना आंत और मेटाबॉलिज्म के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए शहद बनाम चीनी की बहस में विशेषज्ञ एक संतुलित रुख अपनाते हैं: शहद में एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व ज़रूर हैं, लेकिन इसकी मात्रा भी सीमित रखनी चाहिए।

रोज़मर्रा के खान-पान में छोटे-छोटे फेरबदल कई बीमारियों से बचाव की चाबी बन सकते हैं। मैक्सिको के बाज़ारों में आसानी से मिलने वाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्ज़ियों से तैयार नाश्ता कोशिकाओं को बुढ़ापे से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। वहीं, अमेरिकी आहार विशेषज्ञों ने वज़न घटाने के लिए ग्रीक योगर्ट, स्ट्रॉबेरी और ग्रेनोला से बने पारफेट को सबसे असरदार सुबह का भोजन बताया है, क्योंकि प्रोटीन और फाइबर भूख को काबू में रखते हैं। दलिया, बेरीज़ और एवोकाडो जैसे विकल्प भी इसी सूची में शामिल हैं। योगर्ट के फायदे यहीं नहीं रुकते: एक अध्ययन के अनुसार यह आंत के माइक्रोबायोम को संतुलित करके कोलन कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है, और नींबू-एवोकाडो के साथ मिलकर दिल की सेहत के लिए बेहतरीन ड्रेसिंग बनाता है। कॉफी प्रेमियों के लिए भी अच्छी खबर है—31 बड़े अध्ययनों के विश्लेषण से पता चला कि नियमित कॉफी पीने वाली महिलाओं, खासकर मेनोपॉज़ के बाद, में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा कम रहता है।

सेहत की इस तस्वीर में नींद और कपड़ों की भूमिका भी अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन्हें रात में गर्मी लगती है, उनके लिए लिनन बिस्तर कॉटन से बेहतर है, क्योंकि यह ज़्यादा हवादार और टिकाऊ होता है। वहीं पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीने की बदबू को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि वे तेल सोख लेते हैं लेकिन नमी नहीं। ये सब जानकारियां एक समेकित संदेश देती हैं: सेहत कोई एक जादुई नुस्खा नहीं, बल्कि दिमाग, आंत, नींद और दैनिक आदतों का आपसी तालमेल है। भारत जैसे देश में, जहां पारंपरिक भोजन से प्रोसेस्ड फूड की ओर रुझान बढ़ रहा है, यह वैश्विक शोध समय रहते सचेत होने और छोटे, विज्ञान-समर्थित कदम उठाने की प्रेरणा देता है।

स्रोतों में मतभेद

स्वास्थ्य और विज्ञान · 4 स्रोत · 2 भाषाएँ

59%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक38%
न्यूनत्र12%
निंदक50%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa atlantica / anglosferaStampa sud-est asiatica
Stampa atlantica / anglosfera/ progressista
trionfopragmatismo

नए शोध से पता चलता है कि उम्र-विशिष्ट डिमेंशिया का खतरा घट रहा है, जो बढ़ती उम्र की आबादी के बीच उम्मीद जगाता है। शिंगल्स का टीका लगवाने और प्रसंस्कृत अनाज के बजाय साबुत अनाज की ब्रेड चुनने जैसे सरल कदम मस्तिष्क और चयापचय स्वास्थ्य को सहारा दे सकते हैं। समग्र संदेश सशक्तिकरण का है: हमारे संज्ञानात्मक भविष्य पर हमारा नियंत्रण हमारी सोच से कहीं अधिक है।

Stampa sud-est asiatica
allarmepragmatismopaternalismo

स्वास्थ्य अधिकारी युवाओं में बढ़ते मधुमेह को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, जो शर्करा युक्त आहार और गतिहीन जीवनशैली से प्रेरित है। व्यावहारिक सुझाव चावल के सेवन के तरीके में बदलाव, संतुलित नाश्ते का चयन और चीनी को पूरी तरह खत्म न करने पर जोर देते हैं। इस बीच, तांबे पर आधारित एक दवा अल्जाइमर के विषैले प्रोटीन को कम करने की क्षमता दिखाती है, लेकिन प्रमुख स्वर तत्काल जीवनशैली सुधार का है।

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