
ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी: लेबनान पर इजरायली हमला अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन होगा
तेहरान ने वाशिंगटन को आगाह किया कि इजरायल का लेबनान पर कोई भी हमला या कब्जा जारी रहना अमेरिका के साथ हुए अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन होगा, और इस सौदे में हिजबुल्लाह भी एक पक्ष है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने मंगलवार को एक निर्णायक राजनयिक दांव खेलते हुए स्पष्ट किया कि इजरायल द्वारा लेबनान पर कोई भी सैन्य हमला या लेबनानी भूमि पर उसकी निरंतर उपस्थिति, अमेरिका के साथ हुए अंतरिम शांति समझौते का सीधा उल्लंघन होगा। तेहरान में विदेशी राजनयिकों को संबोधित करते हुए अराकची ने इस समझौते के पक्षों को असामान्य रूप से परिभाषित किया: एक ओर अमेरिका और इजरायल, दूसरी ओर ईरान और हिजबुल्लाह। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहे हैं, और इसने लेबनान के भविष्य को ईरान-अमेरिका वार्ता के केंद्र में ला खड़ा किया है।
अराकची ने सोमवार रात लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर समझौते की रूपरेखा साझा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान लेबनान के खिलाफ आक्रामकता समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और अमेरिका पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि समझौते के प्रावधानों का पालन हो। लेबनानी नेतृत्व ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़ा, जिससे यह संकेत मिलता है कि बेरूत भी इस व्यापक शांति ढांचे को अपनी सुरक्षा के लिए अहम मानता है।
वहीं अमेरिकी पक्ष से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार नहीं रखने पर सहमति जताई है, लेकिन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस दस्तावेज को “बहुत सामान्य” बताकर ईरान की अनुपालन इच्छा पर संदेह जताया। अराकची की चेतावनी ने इस संशय को और गहरा दिया है, क्योंकि इजरायल इस समझौते का औपचारिक हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, फिर भी ईरान उसे बाध्यकारी पक्ष मान रहा है।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए, यह घटनाक्रम ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी आबादी की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में किसी भी नए तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जबकि एक स्थायी युद्धविराम क्षेत्रीय आर्थिक गलियारों को पुनर्जीवित कर सकता है। ईरान का हिजबुल्लाह को समझौते में शामिल करना यह दर्शाता है कि तेहरान अपने प्रॉक्सी नेटवर्क को किसी भी व्यापक समझौते से अलग नहीं होने देगा, जिससे वार्ता का दायरा परमाणु मुद्दे से कहीं आगे बढ़ गया है।
आगामी दिनों में स्विस वार्ता से पहले यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका इजरायल को लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए राजी कर पाता है। यदि इजरायली हमले जारी रहे, तो ईरान इस अंतरिम समझौते को शुरू में ही टूटा हुआ घोषित कर सकता है, जिससे संघर्ष विराम की पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। दूसरी ओर, यदि सभी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं पर कायम रहे, तो यह समझौता मध्य पूर्व में एक नए सुरक्षा ढांचे की नींव रख सकता है, जिसमें लेबनान की संप्रभुता और हिजबुल्लाह का भविष्य केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अंतरिम समझौते को एक सामान्य रूपरेखा बताया गया है, जिसमें अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की अनुपालन इच्छा पर संदेह जताया है। लेबनान को लेकर ईरान की चेतावनी को शर्तें थोपने का प्रयास माना जा रहा है, जबकि समझौते की अस्पष्ट शर्तें इसकी प्रवर्तनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।
ईरान घोषणा करता है कि कोई भी इज़रायली सैन्य कार्रवाई या लेबनानी भूमि पर निरंतर कब्ज़ा समझौता ज्ञापन का स्पष्ट उल्लंघन है। संयुक्त राज्य अमेरिका को इज़रायल को उसकी आक्रामकता रोकने के लिए मजबूर करने हेतु प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, तथा युद्धविराम को व्यापक शांति से अविभाज्य बताया गया है।
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