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भू-राजनीति और राजनीतिशनिवार, 27 जून 2026

इंडोनेशिया में ईंधन दाम बढ़ने और मुफ्त भोजन योजना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, 24 गिरफ्तार

सुराबाया में पुलिस ने पथराव और आगजनी के बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, अधिकार समूहों ने मनमानी कार्रवाई का आरोप लगाया।

इंडोनेशिया के सुराबाया शहर में शुक्रवार (26 जून 2026) को ईंधन की कीमतों में वृद्धि और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की प्रमुख मुफ्त भोजन योजना के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कम से कम 24 लोगों को गिरफ्तार किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवन के पास पथराव किया और सड़क पर कचरा जलाया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए 'कड़ी कार्रवाई' की। अधिकार समूहों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों से शनिवार तड़के 3:30 बजे तक पूछताछ की गई, लेकिन उन पर कोई आरोप नहीं लगाया गया।

सुराबाया पुलिस प्रमुख लुथफी सुलिस्तियावान ने संवाददाताओं को बताया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रक्षेप्य फेंकने के बाद अधिकारियों ने उन्हें पीछे धकेलने के लिए सख्त कदम उठाए। उन्होंने 'दर्जनों' गिरफ्तारियों की पुष्टि की, लेकिन सटीक संख्या नहीं बताई। वहीं, मानवाधिकार संगठन कॉन्ट्रास सुराबाया और एलबीएच सुराबाया ने आरोप लगाया कि बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मियों ने अंधाधुंध तरीके से लोगों को पकड़ा, जिनमें वे लोग भी शामिल थे जो प्रदर्शन में शामिल नहीं थे। इन समूहों ने सभी बंदियों की तत्काल रिहाई और कानूनी सहायता की मांग की है।

यह प्रदर्शन इंडोनेशिया में बढ़ते आर्थिक दबाव की पृष्ठभूमि में हुआ। मध्य पूर्व में युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने से सरकार ने गैर-सब्सिडी वाले पेट्रोल की कीमतों में लगभग 30% की वृद्धि की, ताकि बजटीय दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा, प्रबोवो प्रशासन की बहु-अरब डॉलर की मुफ्त भोजन योजना, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को पोषण प्रदान करना है, बड़े पैमाने पर खाद्य विषाक्तता और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी है। सरकार ने 22 जून से 13 जुलाई तक इस योजना को आंशिक रूप से निलंबित कर दिया, जिससे लगभग 16.8 करोड़ डॉलर की बचत होने का अनुमान है। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक खर्च के दबाव के चलते आर्थिक विकास दर 5% से अधिक नहीं रह सकती, जो सरकार के 5.4% के लक्ष्य से कम है।

प्रबोवो के 2024 में पदभार ग्रहण करने के बाद से यह अशांति की पहली बड़ी लहर नहीं है। पिछले वर्ष अगस्त-सितंबर में सांसदों के लिए भत्तों में वृद्धि के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन हुए थे, जो पुलिस वाहन की चपेट में आकर एक डिलीवरी ड्राइवर की मौत के बाद हिंसक हो गए थे। अधिकार समूहों के अनुसार, उन प्रदर्शनों में 10 लोगों की मौत हुई और हजारों गिरफ्तारियां हुईं, हालांकि बाद में अधिकांश को रिहा कर दिया गया। वर्तमान मामले में, गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को अभी तक आरोपों का सामना नहीं करना पड़ा है, लेकिन अधिकार समूहों का कहना है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार की आशंका है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव जारी है, और आगे की बातचीत या कानूनी कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं हुई है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेसअरब लेवांत-मगरिब प्रेस
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

सुराबाया में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और मुफ्त भोजन योजना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और आग लगाई। पुलिस ने एक महिला सहित 24 लोगों को गिरफ्तार किया और रात भर पूछताछ की। यह प्रदर्शन इंडोनेशिया भर में सरकार विरोधी रैलियों की श्रृंखला का हिस्सा था।

अरब लेवांत-मगरिब प्रेस
चेतावनीआक्रोश

इंडोनेशिया में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे क्योंकि नागरिक भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जिसकी वजह ईंधन की बढ़ती लागत और मुफ्त भोजन कार्यक्रम का निलंबन है। यह संकट मध्य पूर्व युद्ध से जुड़ा है, जिसके कारण रुपया गिर गया और शेयर बाजार को एक तिहाई का नुकसान हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से झड़प की और बिगड़ती जीवन स्थितियों से राहत की मांग की।

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परीक्षा की देहरी पर: एक प्रमाणपत्र की प्रतीक्षा से लेकर पाँच लाख उम्मीदवारों तक·वेनेजुएला में भूकंप के 8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकले सुरक्षा गार्ड·विंबलडन में जोकोविच ने फेडरर के 105 जीत के रिकॉर्ड की बराबरी की, चौथे दौर में सफीउलिन से भिड़ंत·जश्न का जुनून बना काल: मेक्सिको-इंग्लैंड मुकाबले से पहले सुरक्षा की नई इबारत·ट्रंप को शांति पुरस्कार: 50 यूरोपीय सांसदों ने फीफा अध्यक्ष के खिलाफ जांच की मांग की·स्पेन ने ऑस्ट्रिया को 3-0 से रौंदा, 16 साल बाद नॉकआउट जीत; अब पुर्तगाल से महामुकाबला·डेविड बनाम गोलियथ: केप वर्डे का मेसी की अर्जेंटीना से ऐतिहासिक विश्व कप मुकाबला·इंडोनेशिया और जापान में तेज़ भूकंप, सुनामी की आशंका नहीं; किसी हताहत की सूचना नहीं·परीक्षा की देहरी पर: एक प्रमाणपत्र की प्रतीक्षा से लेकर पाँच लाख उम्मीदवारों तक·वेनेजुएला में भूकंप के 8 दिन बाद मलबे से जिंदा निकले सुरक्षा गार्ड·विंबलडन में जोकोविच ने फेडरर के 105 जीत के रिकॉर्ड की बराबरी की, चौथे दौर में सफीउलिन से भिड़ंत·जश्न का जुनून बना काल: मेक्सिको-इंग्लैंड मुकाबले से पहले सुरक्षा की नई इबारत·ट्रंप को शांति पुरस्कार: 50 यूरोपीय सांसदों ने फीफा अध्यक्ष के खिलाफ जांच की मांग की·स्पेन ने ऑस्ट्रिया को 3-0 से रौंदा, 16 साल बाद नॉकआउट जीत; अब पुर्तगाल से महामुकाबला·डेविड बनाम गोलियथ: केप वर्डे का मेसी की अर्जेंटीना से ऐतिहासिक विश्व कप मुकाबला·इंडोनेशिया और जापान में तेज़ भूकंप, सुनामी की आशंका नहीं; किसी हताहत की सूचना नहीं·
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शनिवार, 27 जून 2026

इंडोनेशिया में ईंधन दाम बढ़ने और मुफ्त भोजन योजना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, 24 गिरफ्तार

सुराबाया में पुलिस ने पथराव और आगजनी के बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, अधिकार समूहों ने मनमानी कार्रवाई का आरोप लगाया।

इंडोनेशिया के सुराबाया शहर में शुक्रवार (26 जून 2026) को ईंधन की कीमतों में वृद्धि और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की प्रमुख मुफ्त भोजन योजना के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कम से कम 24 लोगों को गिरफ्तार किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवन के पास पथराव किया और सड़क पर कचरा जलाया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए 'कड़ी कार्रवाई' की। अधिकार समूहों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों से शनिवार तड़के 3:30 बजे तक पूछताछ की गई, लेकिन उन पर कोई आरोप नहीं लगाया गया।

सुराबाया पुलिस प्रमुख लुथफी सुलिस्तियावान ने संवाददाताओं को बताया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रक्षेप्य फेंकने के बाद अधिकारियों ने उन्हें पीछे धकेलने के लिए सख्त कदम उठाए। उन्होंने 'दर्जनों' गिरफ्तारियों की पुष्टि की, लेकिन सटीक संख्या नहीं बताई। वहीं, मानवाधिकार संगठन कॉन्ट्रास सुराबाया और एलबीएच सुराबाया ने आरोप लगाया कि बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मियों ने अंधाधुंध तरीके से लोगों को पकड़ा, जिनमें वे लोग भी शामिल थे जो प्रदर्शन में शामिल नहीं थे। इन समूहों ने सभी बंदियों की तत्काल रिहाई और कानूनी सहायता की मांग की है।

यह प्रदर्शन इंडोनेशिया में बढ़ते आर्थिक दबाव की पृष्ठभूमि में हुआ। मध्य पूर्व में युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने से सरकार ने गैर-सब्सिडी वाले पेट्रोल की कीमतों में लगभग 30% की वृद्धि की, ताकि बजटीय दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा, प्रबोवो प्रशासन की बहु-अरब डॉलर की मुफ्त भोजन योजना, जिसका उद्देश्य स्कूली बच्चों को पोषण प्रदान करना है, बड़े पैमाने पर खाद्य विषाक्तता और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी है। सरकार ने 22 जून से 13 जुलाई तक इस योजना को आंशिक रूप से निलंबित कर दिया, जिससे लगभग 16.8 करोड़ डॉलर की बचत होने का अनुमान है। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक खर्च के दबाव के चलते आर्थिक विकास दर 5% से अधिक नहीं रह सकती, जो सरकार के 5.4% के लक्ष्य से कम है।

प्रबोवो के 2024 में पदभार ग्रहण करने के बाद से यह अशांति की पहली बड़ी लहर नहीं है। पिछले वर्ष अगस्त-सितंबर में सांसदों के लिए भत्तों में वृद्धि के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन हुए थे, जो पुलिस वाहन की चपेट में आकर एक डिलीवरी ड्राइवर की मौत के बाद हिंसक हो गए थे। अधिकार समूहों के अनुसार, उन प्रदर्शनों में 10 लोगों की मौत हुई और हजारों गिरफ्तारियां हुईं, हालांकि बाद में अधिकांश को रिहा कर दिया गया। वर्तमान मामले में, गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को अभी तक आरोपों का सामना नहीं करना पड़ा है, लेकिन अधिकार समूहों का कहना है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार की आशंका है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव जारी है, और आगे की बातचीत या कानूनी कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं हुई है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

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स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

निंदक100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेसअरब लेवांत-मगरिब प्रेस
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

सुराबाया में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और मुफ्त भोजन योजना के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और आग लगाई। पुलिस ने एक महिला सहित 24 लोगों को गिरफ्तार किया और रात भर पूछताछ की। यह प्रदर्शन इंडोनेशिया भर में सरकार विरोधी रैलियों की श्रृंखला का हिस्सा था।

अरब लेवांत-मगरिब प्रेस
चेतावनीआक्रोश

इंडोनेशिया में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे क्योंकि नागरिक भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, जिसकी वजह ईंधन की बढ़ती लागत और मुफ्त भोजन कार्यक्रम का निलंबन है। यह संकट मध्य पूर्व युद्ध से जुड़ा है, जिसके कारण रुपया गिर गया और शेयर बाजार को एक तिहाई का नुकसान हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से झड़प की और बिगड़ती जीवन स्थितियों से राहत की मांग की।

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