
जर्मनी की हार के बाद खेमे में दरार: नागल्समैन और खिलाड़ियों के बयानों में विरोधाभास
इक्वाडोर के खिलाफ 1-2 की हार के बाद जर्मन कोच ने प्रयास की कमी से इनकार किया, जबकि किमिच और उंडाव ने कहा- विपक्षी टीम में ज्यादा भूख थी।
न्यू जर्सी के मैदान पर जर्मनी ने इक्वाडोर के सामने 1-2 से हारकर ग्रुप ई का अंतिम मुकाबला एक अप्रत्याशित मोड़ पर खत्म किया। लेरॉय साने ने महज 109 सेकंड में गोल करके टीम को सपनों की शुरुआत दी, लेकिन इसके बाद जर्मन रणनीति बिखर गई। निल्सन आंगुलो ने सातवें मिनट में बराबरी दिलाई और दूसरे हाफ में गोंजालो प्लाटा ने मैनुअल नॉयर की चूक का फायदा उठाकर इक्वाडोर को ऐतिहासिक जीत दिला दी। यह वही इक्वाडोर था जिसे नॉकआउट में बने रहने के लिए हर हाल में अंक चाहिए थे, और उसकी हर चुनौती में वह भूख साफ झलक रही थी।
जर्मनी पहले ही कुराकाओ और कोटे डी आइवर को हराकर ग्रुप विजेता के रूप में 32 के दौर में जगह पक्की कर चुका था, इसलिए यह मैच उसके लिए महज औपचारिकता था। लेकिन मैदान पर जो हुआ, उसने जर्मन खेमे के भीतर गहरी असहमति को उजागर कर दिया। कोच जूलियन नागल्समैन ने हार के बाद कहा कि उनकी टीम ने पूरी कोशिश की और हार सामरिक गलतियों की वजह से हुई। उन्होंने ‘प्रयास की कमी’ वाली बात को ‘बकवास’ करार दिया। लेकिन कप्तान जोशुआ किमिच और स्ट्राइकर डेनिज उंडाव ने खुलेआम इसके उलट राय रखी। उंडाव ने कहा, ‘मुझे लगा कि वे हमसे ज्यादा जीत चाहते थे।’ किमिच ने भी स्वीकारा कि ‘विपक्षी आज ज्यादा दृढ़ था और जीत का असली हकदार था।’
जर्मन मीडिया में इस हार को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। पूर्व लिवरपूल कोच युर्गन क्लॉप, जो अब टीवी कमेंटेटर हैं, ने जर्मनी की गलतियों को ‘तबाही’ बताया और कहा कि डिफेंसिव एरिया में गेंद गंवाना बचकाना था। दक्षिण अमेरिकी प्रेस ने इक्वाडोर की जुझारू वापसी को रेखांकित किया, जिसने पहले हाफ में ही बराबरी करके जर्मन योजना को ध्वस्त कर दिया। एशियाई रिपोर्टों में नागल्समैन के शांत रवैये और खिलाड़ियों के बीच बढ़ती दूरी को केंद्र में रखा गया, जबकि भारतीय मीडिया ने इस विरोधाभास को ‘खेमे में दरार’ के रूप में पेश किया।
नागल्समैन ने स्वीकारा कि शुरुआती गोल के बाद टीम ने ‘सामरिक आत्महत्या’ कर ली और धैर्य खो दिया। उन्होंने बचाव पंक्ति और मानसिक शांति की कमी को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन किसी खिलाड़ी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया। दूसरी ओर, इक्वाडोर के खिलाड़ियों ने हर मौके पर आक्रामकता दिखाई और मिडफील्ड में जर्मनी को पूरी तरह दबोच लिया। यह जीत इक्वाडोर को सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में से एक के रूप में अगले दौर में ले गई।
अब जर्मनी का सामना 30 जून को बोस्टन स्टेडियम में आठ सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में से किसी एक से होगा। नागल्समैन ने कहा कि वे रविवार के अभ्यास सत्र के बाद ही शुरुआती लाइनअप तय करेंगे। लेकिन इस हार ने यह साफ कर दिया कि जर्मनी को सिर्फ रणनीति ही नहीं, बल्कि सामूहिक मानसिकता में भी सुधार करना होगा, वरना उसका विश्व कप अभियान जल्दी ही समाप्त हो सकता है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Ecuador must win to stay alive in Group E; Germany is already through.
Adopts a purely descriptive tone, focused on numbers and mathematical chances, avoiding any exploration of internal aspects of the German team.
Does not mention the rift between Germany's coach and players after the defeat.
This bloc does not report the news.
No rhetorical technique applied, as the topic is entirely absent from coverage.
Completely omits the match and its aftermath.
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