
एज्टेका में इंग्लैंड की चुनौती: वियाग्रा के दावे खारिज, मैक्सिकन फैंस का शोरगुल
इंग्लैंड के कोच थॉमस टुशेल ने विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल से पहले वियाग्रा के इस्तेमाल की अफवाहों का मजाकिया अंदाज में खंडन किया, जबकि मेक्सिको के प्रशंसकों ने टीम की नींद खराब करने के लिए होटल के बाहर हंगामा किया।
मेक्सिको सिटी के एज्टेका स्टेडियम में होने वाले विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल से ठीक पहले इंग्लैंड की टीम एक अजीबोगरीब विवाद में घिर गई, जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोच थॉमस टुशेल से पूछा गया कि क्या खिलाड़ी ऊंचाई के प्रभावों से निपटने के लिए वियाग्रा का इस्तेमाल कर रहे हैं। टुशेल ने मुस्कुराते हुए कहा, “यह जानकारी मुझ तक नहीं पहुंची, इसलिए यह सच नहीं है।” इसके बाद मिडफील्डर जॉर्डन हेंडरसन ने भी चुटकी लेते हुए कहा, “खैर, वियाग्रा से मदद मिलती है… मैं मजाक कर रहा हूं!” हालांकि, इन हल्के-फुल्के जवाबों के पीछे एक गंभीर वैज्ञानिक आधार छिपा था।
वियाग्रा का सक्रिय तत्व सिल्डेनाफिल रक्त वाहिकाओं को चौड़ा कर फेफड़ों में ऑक्सीजन अवशोषण बढ़ा सकता है, जिससे पतली हवा में प्रदर्शन में सुधार की संभावना रहती है। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के नियमों के तहत यह दवा प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इसका वास्तविक लाभ सिर्फ 3,800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर ही देखने को मिलता है। एज्टेका समुद्र तल से लगभग 2,240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए ब्रिटिश और इतालवी मीडिया में इस अफवाह ने जोर पकड़ लिया था कि इंग्लिश मेडिकल स्टाफ ने खिलाड़ियों को यह विकल्प दिया होगा। टुशेल ने साफ किया कि टीम ने इसका सहारा नहीं लिया, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि ऊंचाई का असर सभी पर दिख रहा है।
मैदान के बाहर इंग्लैंड को एक और चुनौती का सामना करना पड़ा। मेक्सिको के प्रशंसकों ने टीम के होटल का पता लगाकर रातभर कार के हॉर्न, नारेबाजी और पटाखों से शोरगुल किया ताकि खिलाड़ियों की नींद खराब हो सके। यह वही रणनीति थी जो पहले इक्वाडोर के खिलाफ सफल रही थी। स्थानीय पुलिस को सुरक्षा घेरा बनाकर प्रशंसकों को पीछे धकेलना पड़ा ताकि टुशेल के खिलाड़ी मैच से पहले आराम कर सकें। इस मनोवैज्ञानिक दबाव के बावजूद, हेंडरसन ने बताया कि ट्रेनिंग के शुरुआती मिनटों में थकान महसूस हुई लेकिन बाद में वे परिस्थितियों के अभ्यस्त हो गए।
इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला काफी अहम है क्योंकि पिछले दौर में उन्होंने डीआर कांगो के खिलाफ 2-1 की नाटकीय जीत दर्ज की थी, जिसमें कप्तान हैरी केन ने आखिरी मिनटों में दो गोल किए। दूसरी ओर, मेजबान मेक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया है और एज्टेका में उसका रिकॉर्ड बेहद मजबूत है – 2013 के बाद से यहां एक भी हार नहीं झेलनी पड़ी है। ऊंचाई, शोरगुल और विरोधी टीम का दबदबा मिलकर इंग्लैंड के लिए एक कठिन संयोजन बनाते हैं।
अब सारी निगाहें रविवार की रात होने वाले इस मुकाबले पर टिकी हैं, जहां इंग्लैंड को न केवल अपने खेल कौशल बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी परिचय देना होगा। जीतने वाली टीम विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचेगी, जहां उसका सामना अगले दौर में और भी कड़ी चुनौती से होगा।
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