
हेनरी नोवाक मामले में ब्रिटिश पुलिस अधिकारियों पर घोर कदाचार की जांच शुरू
18 वर्षीय छात्र की मृत्यु के बाद हथकड़ी लगाने वाले दो अधिकारियों पर जांच, नस्ल और धर्म की भूमिका भी दायरे में।
ब्रिटेन की स्वतंत्र पुलिस आचरण कार्यालय (आईओपीसी) ने बुधवार को घोषणा की कि हैम्पशायर कांस्टेबुलरी के दो अधिकारियों के विरुद्ध संभावित घोर कदाचार की जांच शुरू की गई है। यह कार्रवाई दिसंबर 2025 में साउथैम्पटन में 18 वर्षीय छात्र हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या के बाद हुई, जब पीड़ित को मरते हुए हथकड़ी लगाई गई थी। आईओपीसी के अनुसार, जांच में यह देखा जाएगा कि क्या अधिकारियों ने कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों, बल प्रयोग और असम्मानजनक आचरण के पेशेवर मानकों का उल्लंघन किया। साथ ही, इस बात की भी पड़ताल होगी कि क्या पीड़ित या आरोपी की नस्ल या धर्म ने अधिकारियों के निर्णयों को प्रभावित किया।
घटना के समय हत्यारा विक्रम दिगवा, जो सिख धर्म का अनुयायी है, ने झूठा दावा किया था कि नोवाक ने उस पर नस्लीय हमला किया। पुलिस की बॉडीकैम फुटेज में नोवाक बार-बार कहता सुनाई देता है, 'मुझे चाकू मारा गया है, मैं सांस नहीं ले पा रहा', जबकि एक अधिकारी जवाब देता है, 'मुझे नहीं लगता तुम्हें मारा गया है, दोस्त।' दिगवा को 1 जून को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जिसके बाद साउथैम्पटन में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। ब्रिटेन के धुर-दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं और राजनेताओं ने इस मामले को न्याय व्यवस्था में श्वेत बहुसंख्यकों के प्रति कथित पूर्वाग्रह के सबूत के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि वामपंथी और उदारवादी समूहों ने इसे नस्लीय विभाजन फैलाने का प्रयास बताया।
नोवाक के परिवार ने पुलिस के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और अधिकारियों के व्यवहार को 'अमानवीय और अपमानजनक' करार दिया, साथ ही आग्रह किया कि इस मृत्यु का इस्तेमाल 'और अधिक विभाजन, घृणा या तनाव पैदा करने' में न किया जाए। आईओपीसी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह भी शामिल किया है कि क्या सामुदायिक तनाव के समय अधिकारियों के निर्णय किसी पूर्वधारणा या पूर्वाग्रह से प्रभावित हुए। पैथोलॉजिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नोवाक की चोटें इतनी गंभीर थीं कि आपातकालीन प्रतिक्रिया के बावजूद उनकी मृत्यु घटनास्थल पर ही हो जाती, लेकिन यह तथ्य पुलिस आचरण की जांच को प्रभावित नहीं करता।
आईओपीसी के निदेशक डेरिक कैंपबेल ने स्पष्ट किया कि घोर कदाचार की सूचना का अर्थ यह नहीं कि अनुशासनिक कार्यवाही निश्चित है; जांच पूरी होने पर ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, दोनों अधिकारियों से पूछताछ जारी है और नियंत्रण कक्ष के कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा हो रही है। यह मामला ब्रिटेन में पुलिसिंग में नस्लीय संवेदनशीलता और प्राथमिक चिकित्सा प्राथमिकताओं पर एक व्यापक बहस का केंद्र बन गया है, जिसके दक्षिण एशियाई मूल के समुदायों सहित अल्पसंख्यक समूहों के साथ पुलिस संबंधों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
Swedish police acted correctly in an imminent danger situation, as the factual report shows.
It shifts attention to a similar case in another country, normalizing police use of force and leaving no room for criticism of the British incident.
The British case is not mentioned, nor the specific circumstances of the dying student being handcuffed.
There is nothing relevant in that story for our audience; other topics deserve attention.
The total absence of coverage signals that the incident is not considered newsworthy, downgrading it to irrelevance.
No details of the British case are reported, neither the watchdog's reaction nor the circumstances of the student's death.
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