
सुपर एल नीनो और जलवायु संकट: एक अरब बच्चों पर मंडराता खतरा, ऊर्जा व कृषि क्षेत्र में हलचल
यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि दुनिया के आधे बच्चे एक साथ कई जलवायु आपदाओं की चपेट में हैं, जबकि प्रशांत महासागर में उभर रहा शक्तिशाली एल नीनो वैश्विक मौसम, बिजली आपूर्ति और खाद्य उत्पादन को अस्त-व्यस्त कर सकता है।
सोमवार को यूनिसेफ ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की, जिसके अनुसार दुनिया भर में 1.1 अरब से अधिक बच्चे – यानी लगभग आधी बाल आबादी – एक साथ कम से कम तीन जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं। सूखा, अत्यधिक गर्मी (35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर) और लू का संयोजन सबसे आम है, जिससे 29.6 करोड़ बच्चे प्रभावित हैं। इसी दौरान प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली एल नीनो घटना आकार ले रही है, जिसके 2027 तक बने रहने की आशंका है। ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो और अमेरिकी एनओएए ने पुष्टि की है कि यह 1997 के बाद दूसरा सबसे तीव्र एल नीनो हो सकता है, जो वैश्विक तापमान को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा और चरम मौसमी घटनाओं को बढ़ावा देगा।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत और बांग्लादेश, इस दोहरे संकट की मार झेलने के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं। भारतीय मीडिया रिपोर्टों और प्रोथोम आलो के अनुसार, सुपर एल नीनो मानसून को अनियमित कर सकता है, जिससे कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ की स्थिति बनेगी। यूनिसेफ का आंकड़ा बताता है कि इस क्षेत्र में बच्चों की भारी आबादी पहले से ही बाढ़, तटीय तूफानों और गर्म हवाओं की चपेट में है। कृषि पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए यह दोहरी मार है – कोको, कॉफी और चीनी जैसी नरम वस्तुओं का उत्पादन प्रभावित होगा, जबकि पशुपालन पर अनियमित वर्षा और चरागाहों की कमी का दबाव बढ़ेगा।
लैटिन अमेरिका में एल नीनो का असर पहले ही ऊर्जा योजनाकारों को सक्रिय कर चुका है। ब्राजील के राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली संचालक (ओएनएस) ने उत्तरी क्षेत्र में सूखे की आशंका को देखते हुए दक्षिणी जलाशयों, खासकर इताइपु बांध, में पानी बचाने की रणनीति शुरू कर दी है। बेलो मोंटे, जिराऊ और सांतो आंतोनियो जैसी रणनीतिक जलविद्युत परियोजनाओं पर संकट मंडरा रहा है, जो शाम के पीक आवर्स में बिजली की रीढ़ हैं। मार्च में हुई क्षमता नीलामी अपर्याप्त साबित हुई, और विशेषज्ञ बैटरी भंडारण को स्थिरता का जरूरी उपाय बता रहे हैं। कोलंबिया में मेडेलिन जैसे शहर ऑक्सफोर्ड अध्ययन में वैश्विक ताप लहर जोखिम सूची में 172वें स्थान पर हैं, जहां सामाजिक-आर्थिक कमजोरी गर्मी के प्रभाव को गहरा करती है। अर्जेंटीना का मौसम विभाग जून-अगस्त 2026 के लिए औसत से अधिक गर्म सर्दियों का अनुमान दे रहा है, हालांकि कभी-कभार ठंडी हवाओं के झोंके संभव हैं।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण है। पूर्वानुमान बताते हैं कि एल नीनो नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच चरम पर होगा, और इसका प्रभाव 2027 तक खिंच सकता है। यूनिसेफ ने सरकारों से बाल-केंद्रित जलवायु अनुकूलन नीतियों की मांग की है। ब्राजील में संघीय लेखा न्यायालय ने विवादों के बावजूद ऊर्जा नीलामी को बरकरार रखा, लेकिन भविष्य की नीलामियों में लचीले संसाधनों और भंडारण को प्राथमिकता देने की सीख स्पष्ट है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारों के पास अभी भी योजना बनाने का समय है, लेकिन एक साथ आने वाले सूखे, बाढ़, लू और ऊर्जा अस्थिरता के झटकों से निपटने के लिए एकीकृत तैयारी जरूरी है। यह संकट इस बात की याद दिलाता है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि बच्चों और अर्थव्यवस्थाओं की मौजूदा सच्चाई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Satellite imagery confirms a Super El Niño is taking shape, with a 90% probability of severe impacts. Brazilian authorities warn of extreme weather and rising electricity bills as thermal power plants are activated, while Fitch Ratings cautions that vulnerable sovereigns face heightened economic shock risks. Argentina's Entre Ríos region is bracing for unusually intense effects.
Australia's Bureau of Meteorology has officially declared a very strong El Niño, possibly the strongest on record, heightening the risk of drought, heatwaves and bushfires. The event is expected to disrupt global weather patterns and bring some of the hottest and driest conditions in the country's modern history.
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