
2030 विश्व कप: 64 टीमों का प्रस्ताव, छह मेज़बान देशों में बिखरेगा फुटबॉल का महाकुंभ
कॉनमेबोल अध्यक्ष एलेजांद्रो डोमिंग्वेज़ ने शताब्दी संस्करण में 64 राष्ट्रीय टीमों को शामिल करने की आधिकारिक पैरवी शुरू कर दी है, जिससे टूर्नामेंट का स्वरूप और भू-राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ (कॉनमेबोल) के अध्यक्ष एलेजांद्रो डोमिंग्वेज़ ने सोशल मीडिया पर एक धमाकेदार घोषणा करते हुए 2030 फीफा विश्व कप में 64 टीमों की भागीदारी का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इसे ‘विश्व कप की शताब्दी मनाने का ऐतिहासिक अवसर’ बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब 48 टीमों वाला 2026 संस्करण अभी समाप्त ही हुआ है और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो पहले ही संकेत दे चुके हैं कि विस्तार के मुद्दे पर ‘संबंधित समितियों में चर्चा होगी’। डोमिंग्वेज़ के अनुसार, यह कदम सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं बल्कि वैश्विक फुटबॉल के ढांचागत विकास की ज़रूरत है, क्योंकि 48 टीमों के प्रयोग ने साबित कर दिया कि अधिक भागीदारी से ‘सच्चा वैश्विक उत्सव’ बनता है।
प्रस्तावित 64-टीम प्रारूप 2030 टूर्नामेंट की पहले से जटिल भौगोलिक संरचना को और उलझा देगा। मूल योजना के तहत उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे को शताब्दी वर्ष के सम्मान में केवल एक-एक उद्घाटन मैच की मेज़बानी मिलनी है, जबकि मुख्य आयोजन स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को में होगा। लेकिन 64 टीमें आने पर दक्षिण अमेरिकी देशों को पूरे-पूरे ग्रुप की मेज़बानी का मौका मिल सकता है, जिससे उनकी भूमिका प्रतीकात्मक से कहीं अधिक बढ़ जाएगी। यूरोपीय और अफ्रीकी महाद्वीपों के बीच बंटे इस आयोजन में दक्षिण अमेरिका की सक्रिय भागीदारी फीफा की महाद्वीपीय रोटेशन नीति को भी प्रभावित करेगी—कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इसी बहाने 2034 विश्व कप के लिए सऊदी अरब की एकमात्र दावेदारी का रास्ता साफ हुआ था।
प्रस्ताव पर वैश्विक प्रतिक्रिया तीखी और विभाजित है। यूरोपीय फुटबॉल संघ (यूईएफए) के अध्यक्ष अलेक्सांदर चेफेरिन ने इसे ‘खराब विचार’ करार दिया, जबकि ला लीगा अध्यक्ष जावियर तेबास ने इसे ‘फुटबॉल उद्योग का सतत विनाश’ बताते हुए इन्फेंटिनो के इस्तीफे की मांग कर दी। यूरोपीय क्लब फुटबॉल को अपने कैलेंडर पर बढ़ते दबाव और प्रतिस्पर्धी संतुलन बिगड़ने की चिंता है। दूसरी ओर, एशियाई, अफ्रीकी और कॉनकाकाफ संघों के कई सदस्य देश इस विस्तार का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि इससे उन्हें अधिक क्वालीफिकेशन स्थान और फीफा से बढ़ी हुई आय प्राप्त होगी। इन्फेंटिनो का ‘हर देश को सपना देखने का हक’ वाला नारा इन्हीं क्षेत्रों में गूंज रहा है, जहां फीफा रैंकिंग के निचले पायदान की टीमों के लिए विश्व कप का दरवाज़ा खुलने की उम्मीद है।
खेल प्रारूप और लॉजिस्टिक्स के लिहाज़ से 64 टीमों का मतलब होगा 128 मैच, जो 2026 के 104 मुकाबलों से काफी अधिक है। फोर्ब्स के अनुमान के मुताबिक, इसके लिए 20-22 स्टेडियमों की ज़रूरत होगी, जिससे किसी एक देश के लिए अकेले मेज़बानी करना लगभग असंभव हो जाएगा। हालांकि, प्रारूप गणितीय रूप से सरल हो जाएगा: 16 ग्रुप, हर ग्रुप में चार टीमें, और शीर्ष दो का सीधा नॉकआउट में प्रवेश—2026 के सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों की पेचीदगी खत्म। फीफा की आय में भारी उछाल की संभावना है; 2022 विश्व कप से 73 अरब क्रोनोर का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि 2026 के लिए 144 अरब क्रोनोर तक पहुंचने का अनुमान है। 64 टीमों के साथ यह आंकड़ा और विस्फोटक हो सकता है, जिसका सीधा लाभ क्षेत्रीय संघों को वितरित होने वाली राशि में दिखेगा।
फिलहाल फीफा ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इन्फेंटिनो ने 2026 विश्व कप के बाद इस मुद्दे पर औपचारिक समीक्षा का वादा किया है। अगला ठोस कदम फीफा परिषद की बैठकों में उठेगा, जहां 2030 के प्रारूप पर अंतिम निर्णय होना है। तब तक, छह राष्ट्रों में फैले इस शताब्दी संस्करण की तस्वीर धुंधली है—एक ओर यूरोपीय शक्तियों का विरोध, दूसरी ओर वैश्विक दक्षिण की महत्वाकांक्षाएं, और बीच में इन्फेंटिनो का अगले साल होने वाला पुनर्निर्वाचन।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.60 | critical |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.70 | aligned |
The proposal is a hypothetical; the focus is on the practicalities of a 64-team tournament across six countries.
By framing the expansion as a question ('what could it look like?'), the article avoids endorsing or condemning, instead inviting the reader to consider the logistical challenges.
The article omits the strong opposition from La Liga president Javier Tebas and the logistical concerns raised by European commentators, presenting only the pro-expansion perspective from FIFA vice president Dominguez.
The expansion is a logistical nightmare that undermines the prestige of the World Cup; Infantino's push for growth is driven by power, not football.
By repeatedly using the phrase 'logistical nightmare' and comparing the tournament to an inflated balloon, the bloc creates a sense of absurdity and inevitability of failure, making the proposal seem unfeasible.
The bloc omits the centenary celebration argument and the perspective of CONMEBOL that sees expansion as a historical opportunity, focusing solely on the negative aspects.
The 2030 World Cup with 64 teams is a historic opportunity to celebrate the centenary and expand the dream of football to all nations.
By linking the expansion directly to the centenary and the origins of the World Cup in South America, the bloc creates a narrative of rightful homage and progress, making opposition seem disrespectful to history.
The bloc omits the logistical concerns and the strong opposition from European football authorities, presenting the expansion as universally welcomed.
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