
वक्फ की रोशनी से लेकर डिजिटल कक्षाओं तक: ज्ञान की वैश्विक यात्राएँ
सिंगापुर में वक्फ राशि के वितरण से लेकर इंडोनेशियाई छात्रों की यूरोपीय छात्रवृत्ति और रूसी शिक्षा प्रणाली के पुनर्गठन तक, दुनिया भर में शिक्षा और सशक्तिकरण के प्रयास नए आयाम गढ़ रहे हैं।
जुलाई की एक दोपहर, सिंगापुर के इस्लामी केंद्र हब इस्लाम सिंगापुर में करीब 70 मेहमान और लाभार्थी मौजूद थे। मजलिस उगामा इस्लाम सिंगापुर (एमयूआईएस) ने घोषणा की कि वित्तीय वर्ष 2025 के लिए 80 लाख डॉलर से अधिक की वक्फ राशि वितरित की जाएगी। इसमें से 45 लाख डॉलर स्थानीय स्तर पर 18 मस्जिदों, 7 मदरसों और 30 इस्लामी संगठनों को मिले—यह पिछले वर्ष से 6.6% अधिक था। यह राशि बुनियादी ढाँचे और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित थी। मुख्य कार्यकारी कादिर मैदीन ने इस्लामी कानून के तहत इन निधियों के सतत प्रबंधन की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए आमदनी का स्रोत बना रहे।
सिंगापुर से कुछ ही दूर, इंडोनेशिया में भी इस्लामी परोपकार और शिक्षा के बीच एक समानांतर कहानी लिखी जा रही है। इंडोनेशियाई उलेमा परिषद (एमयूआई) और यायासन बरबागी बहागिया (शेयरिंग हैप्पीनेस) ने कोंग्रेस उमत इस्लाम इंडोनेशिया (केयूआईआई) आठवीं के दौरान एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य ज़कात, इन्फ़ाक, सदक़ा और वक्फ के प्रबंधन के ज़रिए आर्थिक सशक्तिकरण, शिक्षा, दावा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग करना है। वहीं, बादल अमील ज़कात नास्योनाल (बाज़नास) में 15 छात्रों ने सामूहिक इंटर्नशिप शुरू की, जहाँ उन्हें धन संग्रह, विपणन और मानव संसाधन प्रभागों में वास्तविक अनुभव मिलेगा। बाज़नास के डिप्टी आरिफ़िन पुर्वकानंता ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को ज़कात प्रबंधन की पेशेवर समझ देगा।
जहाँ दक्षिण-पूर्व एशिया में धार्मिक बंदोबस्ती से शिक्षा को बल मिल रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्तियाँ ज्ञान की सीमाओं को तोड़ रही हैं। इसी वर्ष, 90 इंडोनेशियाई छात्र इरास्मस मुंडस संयुक्त मास्टर कार्यक्रम के तहत यूरोप में अध्ययन शुरू करेंगे। इनमें से 78 को यूरोपीय संघ की पूर्ण छात्रवृत्ति मिली है, जबकि शेष को विश्वविद्यालयों और कंपनियों से सहायता मिली। यूरोपीय संघ के राजदूत डेनिस चैबी ने इसे इंडोनेशिया के मानव संसाधन और द्विपक्षीय संबंधों में निवेश बताया। इसी तरह, अमेरिकी राज्यों के संगठन (ओएएस) और यूनिवर्सिडाड यूरोपिया ने अर्जेंटीना सहित सदस्य देशों के पेशेवरों के लिए स्पेन में ऑनलाइन मास्टर डिग्री पर 50% की 75 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की हैं। ये कार्यक्रम स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में हैं, और इनकी अंतिम तिथि 30 सितंबर है।
दूसरी ओर, रूस अपनी उच्च शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव की ओर बढ़ रहा है। उप-शिक्षा मंत्री कॉन्स्टेंटिन मोगिलेव्स्की के अनुसार, 2030 तक सभी विश्वविद्यालय त्रि-स्तरीय ढाँचे में स्थानांतरित हो जाएँगे—बुनियादी उच्च शिक्षा (4-6 वर्ष), विशेषीकृत (1-3 वर्ष) और आस्पिरांतुरा एक अलग स्तर के रूप में। यह प्रयोग फिलहाल 17 विश्वविद्यालयों में चल रहा है और 1 सितंबर 2026 से नए प्रवेशार्थियों पर लागू होगा। शिक्षा को ‘रूढ़िवादी क्षेत्र’ बताते हुए मोगिलेव्स्की ने ‘सावधानीपूर्वक और क्रमिक’ कार्यान्वयन पर ज़ोर दिया।
इस तरह, सिंगापुर की मस्जिदों में गूँजती दुआओं से लेकर जकार्ता के कार्यालयों में कंप्यूटर स्क्रीन पर टिकी निगाहों तक, शिक्षा और सशक्तिकरण के ये प्रयास बताते हैं कि ज्ञान का भूगोल स्थिर नहीं है। चाहे वह वक्फ की सदियों पुरानी परंपरा हो या डिजिटल कक्षा की नई रौशनी, हर पहल अपने सांस्कृतिक सूत्र में मनुष्य को सँवारने का एक माध्यम है। और शायद असली तस्वीर वह है, जिसमें बाज़नास में इंटर्न करता एक छात्र अपने पहले प्रोजेक्ट की फाइल खोलता है—उस पल में न तो कोई सीमा है, न कोई शोर, बस एक शांत आत्मविश्वास।
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