
पाकिस्तान के टैंक जिले में आत्मघाती हमला: 15 की मौत, टीटीपी ने किया दावा
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक सुरक्षा चौकी पर हुए आत्मघाती हमले में 12 सैनिकों सहित 15 लोगों की मौत, टीटीपी ने जिम्मेदारी ली; पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर लगाए आरोप।
24 जुलाई 2026 की रात पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के टैंक जिले में एक संयुक्त सैन्य-पुलिस सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 15 लोग मारे गए। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के अनुसार, हमलावरों ने पहले चौकी की परिधि तोड़ने का प्रयास किया, विफल होने पर उन्होंने विस्फोटकों से भरा एक वाहन दीवार से टकरा दिया। इस धमाके में 12 सैन्यकर्मी, दो पुलिसकर्मी और वन विभाग के एक पूर्व अधिकारी की मौत हो गई, जबकि कम से कम 24 लोग घायल बताए गए हैं।
पाकिस्तानी तालिबान (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, टीटीपी) ने एक बयान जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली है और दावा किया है कि इसमें चार आत्मघाती हमलावर शामिल थे। आईएसपीआर ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने 12 उग्रवादियों को मार गिराया और इलाके में सफाई अभियान जारी है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, विस्फोट से सुरक्षा चौकी का बुनियादी ढांचा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ और मलबे में तीन सैनिकों के फंसे होने की आशंका है।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने लंबे समय से यह आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान की धरती पर टीटीपी और अन्य आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाह मिल रही है। इस्लामाबाद के अनुसार, हाल के महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बढ़ती आतंकी घटनाओं के पीछे अफगानिस्तान से होने वाली घुसपैठ एक प्रमुख कारण है। दूसरी ओर, काबुल में तालिबान सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है और इसे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा विफलता करार देती है। इस विवाद के चलते दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव गहराया है, और जून 2026 में पूर्वी अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमलों में संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दर्जनों नागरिकों की मौत हुई थी।
दक्षिण एशियाई सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से टीटीपी की बढ़ती सक्रियता का हिस्सा है। पाकिस्तान के ‘अज़्म-ए-इस्तेहकाम’ अभियान के बावजूद, सीमावर्ती इलाकों में आतंकी वारदातों में कमी नहीं आ रही है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक और सैन्य तनाव को और बढ़ा सकता है। मामला अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों पर उठाए जाने की संभावना है, क्योंकि दोनों देशों के बीच आपसी आरोपों का सिलसिला जारी है।
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