
ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी दी
एंडी बर्नहैम ने पूर्ववर्ती स्टार्मर की नीति को जारी रखते हुए डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिकी 'रक्षात्मक' कार्रवाइयों को हरी झंडी दी, जिससे घरेलू विरोध और कानूनी चिंताएं बढ़ गई हैं।
ब्रिटेन के नवनियुक्त प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान के विरुद्ध अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। ब्लूमबर्ग और टेलीग्राफ की रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के कार्यकाल के अंतिम दिनों में लिया गया और बर्नहैम ने पदभार संभालने के 48 घंटों के भीतर इस पर सहमति जता दी। इसमें हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया और इंग्लैंड के ग्लॉस्टरशर में रॉयल एयर फोर्स फेयरफोर्ड जैसे प्रमुख बेस शामिल हैं, जिनका उपयोग अमेरिकी बमवर्षक और लड़ाकू विमान ईरानी मिसाइल ठिकानों और होर्मुज जलडमरूमध्य को निशाना बनाने वाली सुविधाओं के खिलाफ कर रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इन अड्डों तक पहुंच को वैश्विक सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि यूरोप की रक्षा के लिए हजारों सैनिक तैनात करने के बावजूद नाटो सहयोगियों से ऐसे अनुरोध अस्वीकार किए जाने पर गहरी निराशा है। ब्रिटिश सरकार ने इन कार्रवाइयों को 'रक्षात्मक' करार दिया है और तर्क दिया है कि ये ईरान के कथित मिसाइल खतरे से निपटने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं। बर्नहैम के कार्यालय ने अभी तक इस निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन ट्रंप के साथ उनकी पहली फोन वार्ता में होर्मुज में जहाजरानी की सुरक्षा पर जोर दिया गया, जिसे ट्रंप ने 'बहुत अच्छी बातचीत' बताया।
ईरानी सूत्रों और सरकारी मीडिया ने अमेरिकी कार्रवाइयों को 'सैन्य आक्रमण' और युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। ईरान का कहना है कि उसने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए इजरायली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हमशहरी ऑनलाइन के अनुसार, यह संघर्ष फरवरी 2026 में शुरू हुआ, 40 दिनों के बाद अप्रैल में युद्धविराम हुआ, लेकिन जुलाई 2026 में ट्रंप ने इस्लामाबाद समझौते का उल्लंघन करते हुए पुनः हमले शुरू कर दिए और होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी। ईरानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि संकट का स्थायी समाधान केवल आक्रमण की पूर्ण समाप्ति, खतरों के निवारण और कूटनीतिक रास्ते से ही संभव है।
ब्रिटेन के भीतर इस निर्णय को लेकर राजनीतिक विरोध उभर रहा है। लेबर पार्टी के वामपंथी सांसद, ग्रीन पार्टी और लिबरल डेमोक्रेट्स का तर्क है कि अमेरिकी अभियानों के लिए ब्रिटिश अड्डों का इस्तेमाल देश को युद्ध अपराधों में सहभागी बना सकता है। नवनियुक्त विदेश मंत्री एड मिलिबैंड पहले ही स्टार्मर को ऐसी अनुमति देने से रोक चुके हैं, जिसे वाशिंगटन ने नकारात्मक रूप में याद रखा है। ट्रंप द्वारा पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकी ने ब्रिटिश अधिकारियों के बीच कानूनी परिणामों की चिंता बढ़ा दी है। डिएगो गार्सिया बेस, जो 1971 से अमेरिकी सैन्य अभियानों का केंद्र रहा है, इस संघर्ष में भी रसद और ईंधन आपूर्ति का अहम केंद्र बना हुआ है। फिलहाल, बर्नहैम सरकार ने पूर्ववर्ती नीति को जारी रखा है, लेकिन आधिकारिक बयान के अभाव में यह मामला संसदीय बहस और कानूनी समीक्षा की ओर बढ़ सकता है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.80 | critical |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | −0.20 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
Iran condemns the new British PM's complicity in American aggression, calling the use of British bases a tool of war.
By repeatedly using the term 'aggression' and highlighting the speed of the decision, the narrative constructs a moral outrage and victimhood.
Omits that the strikes are described as 'defensive' by the UK and US, and that the previous PM had already authorized similar use.
Israel observes the pressure on the new British PM as a test of alliance loyalty, focusing on the diplomatic stakes rather than the strikes themselves.
By framing the decision as a 'test' and a 'first judgment', the narrative shifts attention to power dynamics between allies, normalizing the base use as a matter of loyalty.
Omits the Iranian perspective of victimhood and the characterization of strikes as aggression, as well as any domestic UK opposition.
The Atlantic alliance views the use of British bases as a legitimate defensive measure, in continuity with previous policy.
By describing the operations as 'defensive' and citing Bloomberg without comment, the action is normalized as part of standard military cooperation.
Omits the term 'aggression' used by Iran and any criticism of the decision, as well as the pressure from Trump.
Russia records the British PM's decision as a fact, without taking a position.
The brevity and absence of evaluative adjectives create an effect of detachment, as if the news does not merit comment.
Omits any context of aggression or defense, and any mention of Iranian reaction.
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