
जर्मनी में बीमार छुट्टी पर नया विवाद: पहले दिन से डॉक्टरी प्रमाणपत्र अनिवार्य
गठबंधन सरकार के फैसले से चिकित्सा संगठनों में रोष, सहयोगी दल एसपीडी के भीतर मतभेद और कार्यान्वयन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
जर्मनी की गठबंधन सरकार ने बीमारी की छुट्टी के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कर्मचारियों के लिए बीमारी के पहले दिन से ही डॉक्टरी प्रमाणपत्र (सिक नोट) प्रस्तुत करना अनिवार्य करने की घोषणा की है। साथ ही, कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई फोन पर बीमारी की छुट्टी लेने की सुविधा को समाप्त कर दिया जाएगा। चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स (सीडीयू) ने इस कदम को “कठिन निर्णय” बताते हुए कहा कि जर्मनी में बीमार छुट्टियों की “अत्यधिक” संख्या अब सहन नहीं की जा सकती और यह देश की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए नुकसानदेह है। यह फैसला व्यापक आर्थिक सुधार पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जर्मन अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है।
सरकार के इस निर्णय पर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही मतभेद उभर आए हैं। सीडीयू के संसदीय दल के नेता येन्स श्पान ने योजना का बचाव करते हुए कहा कि जर्मनी में प्रति कर्मचारी वार्षिक लगभग 18 बीमार दिन यूरोपीय संघ में सबसे अधिक हैं। वहीं, सहयोगी दल एसपीडी के नेता और उप-चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने “व्यावहारिक समाधान” की आवश्यकता पर बल दिया, और श्रम मंत्री बेयरबेल बास ने कहा कि वे इस बात की जांच करेंगी कि क्या इस नियम का कोई वास्तविक प्रभाव होगा या यह केवल कठिनाइयाँ पैदा करेगा। सरकारी प्रवक्ता स्टेफान कोर्नेलियुस ने बाद में स्पष्ट किया कि प्रमाणपत्र पहले दिन ही भौतिक रूप से जमा कराना अनिवार्य नहीं होगा और वीडियो परामर्श के जरिए बीमारी प्रमाणित करने का विकल्प बना रहेगा, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार अपने रुख में कुछ नरमी ला रही है।
चिकित्सा संगठनों ने इस योजना की तीखी आलोचना की है। वैधानिक स्वास्थ्य बीमा चिकित्सकों के राष्ट्रीय संघ (केबीवी) ने इसे “पागलपन की सीमा” पर बताया और चेतावनी दी कि इससे हर साल लगभग तीन करोड़ अतिरिक्त मरीज डॉक्टरों के पास पहुँचेंगे, जिससे प्रतीक्षालयों में संक्रमण फैलने और स्वास्थ्य सेवा पर अत्यधिक बोझ पड़ने का खतरा है। जनरल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने भी कहा कि जिन्हें केवल एक-दो दिन आराम की जरूरत होती, वे भी क्लीनिकों में भीड़ बढ़ाएँगे। यहाँ तक कि सीडीयू के कुछ वरिष्ठ नेता, जैसे नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया के मुख्यमंत्री हेंड्रिक वुस्ट, ने भी पेट-दर्द जैसी बीमारियों में प्रतीक्षालय में संक्रमण के जोखिम की चिंता जताई।
अंतरराष्ट्रीय तुलना में जर्मनी की मौजूदा व्यवस्था उदार मानी जाती है, लेकिन यह कोई अपवाद नहीं है। ओईसीडी आँकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में प्रति कर्मचारी औसतन लगभग छह सप्ताह की बीमार छुट्टी होती है, जबकि इटली में यह मात्र 0.6 सप्ताह और ग्रीस में 0.2 सप्ताह है। जर्मनी में 1994 से यह नियम लागू है कि चौथे दिन से प्रमाणपत्र अनिवार्य होता है, हालाँकि नियोक्ता पहले भी माँग सकते थे। फोन द्वारा छुट्टी की सुविधा 2020 में अस्थायी रूप से शुरू हुई और 2023 में स्थायी कर दी गई थी। यह पूरा विवाद एक बड़े 34-सूत्रीय आर्थिक सुधार पैकेज का हिस्सा है, जिसमें कर कटौती, पेंशन सुधार और श्रम बाजार में लचीलापन लाने के उपाय शामिल हैं। भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह बहस कर्मचारी कल्याण और आर्थिक उत्पादकता के बीच संतुलन की वैश्विक चुनौती को रेखांकित करती है, जो श्रम सुधारों पर हर जगह चर्चा का केंद्र है।
फिलहाल यह निर्णय राजनीतिक घोषणा भर है; कानूनी मसौदा अभी तैयार किया जाना बाकी है। एसपीडी ने संकेत दिया है कि वह डॉक्टरों और मरीजों पर अनावश्यक बोझ से बचने के लिए व्यावहारिक संशोधनों पर जोर देगी। सरकार का लक्ष्य इस पैकेज के मुख्य तत्वों को वर्ष के अंत तक संसद से पारित कराना है। आने वाले सप्ताहों में विधेयक पर बातचीत और संभावित संशोधनों की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।
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