Edition of 20:00 CETगुरुवार, 18 जून 2026
311 स्रोत · 17 भाषाएँआज 108 ब्रीफिंग
राजनीतिमंगलवार, 16 जून 2026

पेरू चुनाव में फुजीमोरी की बढ़त, सांचेज़ का परिणाम न मानने का ऐलान और गहराता राजनीतिक संकट

99% मतगणना के बाद भी अनिश्चितता बरकरार, वामपंथी उम्मीदवार रॉबर्टो सांचेज़ ने चुनावी प्रक्रिया पर पारदर्शिता का आरोप लगाकर परिणाम अस्वीकार करने और राजधानी लीमा में प्रदर्शनों का आह्वान किया।

पेरू के राष्ट्रपति पद के दूसरे चरण के चुनाव में दक्षिणपंथी उम्मीदवार कीको फुजीमोरी ने अपनी बढ़त को और मजबूत कर लिया है, लेकिन देश एक गहरे राजनीतिक अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है। 99 प्रतिशत से अधिक मतपत्रों की गिनती के बाद फुजीमोरी को 50.1% और वामपंथी प्रतिद्वंद्वी रॉबर्टो सांचेज़ को 49.9% वोट मिले हैं—महज 35,000 मतों का अंतर। इसके बावजूद राष्ट्रीय चुनाव कार्यालय (ONPE) ने अभी तक विजेता की घोषणा नहीं की है, क्योंकि लगभग 2,50,000 विवादित वोटों की समीक्षा बाकी है। सांचेज़ की पार्टी ‘जुंटोस पोर एल पेरू’ ने इस प्रक्रिया को ‘पारदर्शिताहीन’ करार देते हुए परिणाम न मानने की घोषणा कर दी और आगामी बुधवार को लीमा में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

यह कड़ा मुकाबला पेरू के समाज की गहरी विभाजन रेखाओं को उजागर करता है। लहुआयताम्बो नामक एक छोटे से पर्वतीय जिले में दोनों उम्मीदवारों को ठीक 181-181 वोट मिले—यह दुर्लभ स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर फैले ध्रुवीकरण का सूक्ष्म प्रतिबिंब है। शुरुआती गिनती में सांचेज़ आगे थे, लेकिन विदेशी मतों और विवादित मतपत्रों की पड़ताल ने पलड़ा फुजीमोरी की ओर झुका दिया। चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि अंतिम परिणाम आने में दो सप्ताह से लेकर महीने भर तक का समय लग सकता है, जिससे राजनीतिक खिंचाव और बढ़ने की आशंका है।

सांचेज़ खेमे के रुख में आए अचानक बदलाव ने भी विवाद को हवा दी है। जब वे मतगणना में आगे चल रहे थे, तब पार्टी ने प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही थी, लेकिन पिछड़ने पर ‘अनियमितताओं’ और ‘नियमों में बदलाव’ के आरोप लगाए—हालांकि ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए। दूसरी ओर, 2022-23 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों ने न्यायालय के बाहर धरना देकर फुजीमोरी को ‘तानाशाह की बेटी’ बताते हुए उनके राष्ट्रपति बनने का विरोध किया। इन परिवारों का आरोप है कि फुजीमोरी ने पूर्व राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते के कार्यकाल में हुई हिंसा के दोषियों को संरक्षण दिया।

यह घटनाक्रम लैटिन अमेरिका में लोकतांत्रिक संस्थाओं की नाजुकता को एक बार फिर रेखांकित करता है। पेरू में वर्षों से भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता का दौर रहा है, और इस चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो, सत्ता हस्तांतरण सुचारू रूप से होता नहीं दिख रहा। भारत जैसे स्थापित लोकतंत्रों के लिए यह एक सबक है कि चुनावी निकायों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता कितनी अहम होती है। यदि विवादित वोटों की समीक्षा के बाद भी अंतर मामूली रहता है, तो सड़कों पर टकराव और कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है, जिससे पेरू की आर्थिक सुधार यात्रा और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों पर जोखिम बढ़ेगा।

अंतिम समाचार
रियल मैड्रिड का मोरिन्हो युग: एंज़ो फ़र्नांडीज़ के साथ व्यक्तिगत समझौता, चेल्सी को 100 मिलियन यूरो का प्रस्ताव·चीनी छोड़ने के नुकसान, सुशी का शुगर स्पाइक और कॉफी का सही समय: नाश्ते से जुड़े नए खुलासे·वैश्विक विमानन में विस्तार की नई लहर: एतिहाद का टोक्यो A380, रियाद एयर का दुबई आगमन और लैटम का विस्तार·अमेरिकी AI नियंत्रण से वैश्विक हलचल: एंथ्रोपिक पर रोक, भारत-यूरोप की पहल और सार्वजनिक हिस्सेदारी की माँग·ट्रंप की 'अमेरिकी ध्वज नीली' महत्वाकांक्षा शैवाल के हमले में ध्वस्त, करोड़ों का खर्च बेकार·चंद्रमा और शुक्र का दुर्लभ 'चुंबन', बृहस्पति-बुध भी साथ; आसमान में दिखा अनोखा नजारा·मेसी की हैट्रिक से अर्जेंटीना की धमाकेदार शुरुआत, रोनाल्डो और स्पेन चौंके·रोनाल्डो पर उम्र का साया: कांगो के खिलाड़ी ने कहा 'वह अब पहले जैसे नहीं रहे'·रियल मैड्रिड का मोरिन्हो युग: एंज़ो फ़र्नांडीज़ के साथ व्यक्तिगत समझौता, चेल्सी को 100 मिलियन यूरो का प्रस्ताव·चीनी छोड़ने के नुकसान, सुशी का शुगर स्पाइक और कॉफी का सही समय: नाश्ते से जुड़े नए खुलासे·वैश्विक विमानन में विस्तार की नई लहर: एतिहाद का टोक्यो A380, रियाद एयर का दुबई आगमन और लैटम का विस्तार·अमेरिकी AI नियंत्रण से वैश्विक हलचल: एंथ्रोपिक पर रोक, भारत-यूरोप की पहल और सार्वजनिक हिस्सेदारी की माँग·ट्रंप की 'अमेरिकी ध्वज नीली' महत्वाकांक्षा शैवाल के हमले में ध्वस्त, करोड़ों का खर्च बेकार·चंद्रमा और शुक्र का दुर्लभ 'चुंबन', बृहस्पति-बुध भी साथ; आसमान में दिखा अनोखा नजारा·मेसी की हैट्रिक से अर्जेंटीना की धमाकेदार शुरुआत, रोनाल्डो और स्पेन चौंके·रोनाल्डो पर उम्र का साया: कांगो के खिलाड़ी ने कहा 'वह अब पहले जैसे नहीं रहे'·
अपडेट 05:04 am1 भाषा · 3 स्रोत
3 स्रोत|1 भाषा|3 मिनट पढ़ना
मंगलवार, 16 जून 2026

पेरू चुनाव में फुजीमोरी की बढ़त, सांचेज़ का परिणाम न मानने का ऐलान और गहराता राजनीतिक संकट

99% मतगणना के बाद भी अनिश्चितता बरकरार, वामपंथी उम्मीदवार रॉबर्टो सांचेज़ ने चुनावी प्रक्रिया पर पारदर्शिता का आरोप लगाकर परिणाम अस्वीकार करने और राजधानी लीमा में प्रदर्शनों का आह्वान किया।

पेरू के राष्ट्रपति पद के दूसरे चरण के चुनाव में दक्षिणपंथी उम्मीदवार कीको फुजीमोरी ने अपनी बढ़त को और मजबूत कर लिया है, लेकिन देश एक गहरे राजनीतिक अनिश्चितता की ओर बढ़ रहा है। 99 प्रतिशत से अधिक मतपत्रों की गिनती के बाद फुजीमोरी को 50.1% और वामपंथी प्रतिद्वंद्वी रॉबर्टो सांचेज़ को 49.9% वोट मिले हैं—महज 35,000 मतों का अंतर। इसके बावजूद राष्ट्रीय चुनाव कार्यालय (ONPE) ने अभी तक विजेता की घोषणा नहीं की है, क्योंकि लगभग 2,50,000 विवादित वोटों की समीक्षा बाकी है। सांचेज़ की पार्टी ‘जुंटोस पोर एल पेरू’ ने इस प्रक्रिया को ‘पारदर्शिताहीन’ करार देते हुए परिणाम न मानने की घोषणा कर दी और आगामी बुधवार को लीमा में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

यह कड़ा मुकाबला पेरू के समाज की गहरी विभाजन रेखाओं को उजागर करता है। लहुआयताम्बो नामक एक छोटे से पर्वतीय जिले में दोनों उम्मीदवारों को ठीक 181-181 वोट मिले—यह दुर्लभ स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर फैले ध्रुवीकरण का सूक्ष्म प्रतिबिंब है। शुरुआती गिनती में सांचेज़ आगे थे, लेकिन विदेशी मतों और विवादित मतपत्रों की पड़ताल ने पलड़ा फुजीमोरी की ओर झुका दिया। चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि अंतिम परिणाम आने में दो सप्ताह से लेकर महीने भर तक का समय लग सकता है, जिससे राजनीतिक खिंचाव और बढ़ने की आशंका है।

सांचेज़ खेमे के रुख में आए अचानक बदलाव ने भी विवाद को हवा दी है। जब वे मतगणना में आगे चल रहे थे, तब पार्टी ने प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही थी, लेकिन पिछड़ने पर ‘अनियमितताओं’ और ‘नियमों में बदलाव’ के आरोप लगाए—हालांकि ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए। दूसरी ओर, 2022-23 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों ने न्यायालय के बाहर धरना देकर फुजीमोरी को ‘तानाशाह की बेटी’ बताते हुए उनके राष्ट्रपति बनने का विरोध किया। इन परिवारों का आरोप है कि फुजीमोरी ने पूर्व राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते के कार्यकाल में हुई हिंसा के दोषियों को संरक्षण दिया।

यह घटनाक्रम लैटिन अमेरिका में लोकतांत्रिक संस्थाओं की नाजुकता को एक बार फिर रेखांकित करता है। पेरू में वर्षों से भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता का दौर रहा है, और इस चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो, सत्ता हस्तांतरण सुचारू रूप से होता नहीं दिख रहा। भारत जैसे स्थापित लोकतंत्रों के लिए यह एक सबक है कि चुनावी निकायों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता कितनी अहम होती है। यदि विवादित वोटों की समीक्षा के बाद भी अंतर मामूली रहता है, तो सड़कों पर टकराव और कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है, जिससे पेरू की आर्थिक सुधार यात्रा और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों पर जोखिम बढ़ेगा।

स्रोतों में मतभेद

राजनीति · 3 स्रोत · 1 भाषा

0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

यह समाचार यहाँ छपा

3 स्रोत · 1 भाषा

संबंधित लेख

राजनीति

ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका समझौते को मंजूरी दी, ट्रंप को बताया 'हताश'

6 भाषाएँ · 25 स्रोत

अपराध एवं आपदा

ब्रिटेन के चिड़ियाघर में तीन साल के बच्चे को मगरमच्छ के बाड़े में फेंकने का आरोप, 30 वर्षीय व्यक्ति गिरफ्तार

6 भाषाएँ · 21 स्रोत

राजनीति

अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी हटाई, हॉरमुज़ जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह बहाल

5 भाषाएँ · 22 स्रोत

और पढ़ें